नेपाल बाढ़ में लापता भारतीयों की तलाश तेज, 3 हजार DNA सैंपल की जांच से तैयार हुईं 1200 से ज्यादा प्रोफाइल

नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद लापता लोगों की पहचान के लिए भारत की ओर से चलाया जा रहा फोरेंसिक अभियान तेज हो गया है। भारतीय फोरेंसिक टीम ने अब तक करीब 3,000 DNA सैंपल प्रोसेस किए हैं और 1,200 से अधिक DNA प्रोफाइल तैयार की हैं। इन प्रोफाइल की मदद से नेपाल में मिले अज्ञात शवों और लापता लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

275 भारतीय नागरिक अभी भी लापता

नेपाल की बाढ़ में 275 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा भारतीय मूल के कुछ अन्य लोगों के भी लापता होने की सूचना है।

लापता लोगों की पहचान के लिए उनके परिजनों के DNA सैंपल और नेपाल में बरामद अज्ञात शवों से लिए गए नमूनों का मिलान किया जा रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य सही व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित कर उसके परिवार तक जानकारी और अवशेष पहुंचाना है।

काठमांडू की प्रयोगशालाओं में चल रही जांच

भारतीय फोरेंसिक विशेषज्ञ नेपाल में स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। काठमांडू की कई प्रयोगशालाओं में DNA सैंपल की जांच और प्रोफाइल तैयार करने का काम किया जा रहा है।

फोरेंसिक टीम के सामने बड़ी संख्या में नमूनों की जांच करने के साथ-साथ उनकी वैज्ञानिक तरीके से प्रोफाइलिंग और मिलान की चुनौती है। तैयार की जा रही DNA प्रोफाइल को लापता लोगों के परिवारों से लिए गए संदर्भ नमूनों के साथ मिलाया जा रहा है।

DNA जांच क्यों बनी जरूरी?

बाढ़ और भूस्खलन के बाद कई शव लंबे समय तक मलबे, नदी के किनारे या दुर्गम इलाकों में रहने के कारण सामान्य पहचान के योग्य नहीं रह जाते। कई मामलों में चेहरे, कपड़े या दूसरे पहचान संबंधी संकेतों के आधार पर पहचान करना मुश्किल हो सकता है।

ऐसी स्थिति में DNA जांच वैज्ञानिक पहचान का महत्वपूर्ण माध्यम बनती है। माता-पिता, बच्चों या भाई-बहन जैसे करीबी जैविक रिश्तेदारों के DNA से तुलना करके अज्ञात शवों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

लापता लोगों के परिवारों को पहचान का इंतजार

नेपाल में आई आपदा के कई सप्ताह बाद भी बड़ी संख्या में परिवार अपने परिजनों की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में DNA प्रोफाइलिंग की प्रक्रिया परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे अज्ञात शवों की पहचान वैज्ञानिक तरीके से की जा सकती है।

भारत की ओर से उपलब्ध कराई जा रही फोरेंसिक सहायता का उद्देश्य नेपाल में चल रहे पहचान अभियान को गति देना और भारतीय नागरिकों तथा भारतीय मूल के लापता लोगों से जुड़े मामलों में मदद करना है।

बचाव और राहत अभियान भी जारी

DNA पहचान अभियान के साथ नेपाल में राहत और बचाव से जुड़े प्रयास भी जारी हैं। बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित पहाड़ी इलाकों में मलबे और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण खोज अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच, भारी मलबा और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचा राहत एवं खोज कार्य को प्रभावित कर रहा है। इसके बावजूद लापता लोगों की तलाश और शवों की पहचान के प्रयास जारी हैं।

पहचान की प्रक्रिया में तकनीक की अहम भूमिका

बड़ी प्राकृतिक आपदा के बाद जब बड़ी संख्या में लोग लापता हों और शवों की पहचान मुश्किल हो, तब DNA प्रोफाइलिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस प्रक्रिया में प्रत्येक नमूने को वैज्ञानिक तरीके से जांचकर उसका DNA प्रोफाइल तैयार किया जाता है और फिर उपलब्ध संदर्भ नमूनों से उसका मिलान किया जाता है।

नेपाल में चल रहे अभियान में तैयार की जा रही 1,200 से अधिक DNA प्रोफाइल इसी पहचान प्रक्रिया का हिस्सा हैं। लगभग 3,000 सैंपल पर काम किया जा चुका है और फोरेंसिक टीम की जांच प्रक्रिया आगे भी जारी है।

परिवारों को जल्द पहचान मिलने की उम्मीद

नेपाल की बाढ़ में लापता भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों के परिवारों के लिए DNA जांच से पहचान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की उम्मीद बनी है। हालांकि प्रत्येक मामले में पहचान के लिए नमूनों का वैज्ञानिक मिलान और संबंधित अधिकारियों द्वारा पुष्टि आवश्यक होगी।

फिलहाल भारतीय और नेपाली पक्ष मिलकर DNA प्रोफाइलिंग तथा लापता लोगों की पहचान की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय फोरेंसिक टीम का काम जारी है और नेपाल के अधिकारियों से लापता भारतीय नागरिकों के संबंध में आगे की जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

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