82 लाख की जमीन, 18 लाख की रजिस्ट्री और पुलिस अधिकारी पर FIR; कटनी में DSP नेहा पच्चीसिया घिरीं

कटनी, मध्य प्रदेश, 21 अगस्त 2026: मध्य प्रदेश के कटनी में पदस्थ नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विभागीय जांच के बाद पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर कटनी के कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया समेत तीन लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। मामला एक हत्या के आरोपी के परिवार की जमीन के कथित दबाव में कम कीमत पर सौदा और रजिस्ट्री कराने से जुड़ा है।

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में नेहा पच्चीसिया के अलावा क्षितिज राज और मारूफ अहमद के खिलाफ BNS की संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की गई है। कटनी एसपी अभिनय विश्वकर्मा ने FIR दर्ज होने की पुष्टि की है। फिलहाल पुलिस जमीन के सौदे, कथित दबाव और पैसों के लेनदेन से जुड़े पूरे मामले की जांच कर रही है।

82.86 लाख की जमीन 18.20 लाख में रजिस्ट्री का आरोप

मामले में सबसे बड़ा सवाल जमीन की कीमत को लेकर है। विभागीय जांच और शिकायत में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, ग्राम कन्हवारा में स्थित करीब 2.15 हेक्टेयर जमीन की सरकारी गाइडलाइन कीमत लगभग 82 लाख 86 हजार रुपये बताई गई। आरोप है कि इसी जमीन की रजिस्ट्री महज 18 लाख 20 हजार रुपये में कराई गई।

दस्तावेजों में भुगतान के तौर पर 15 लाख रुपये का चेक और 3.20 लाख रुपये नकद दिए जाने का उल्लेख होने की बात सामने आई है। इसी कीमत के अंतर को लेकर शिकायतकर्ता ने गंभीर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि जमीन मालिक के परिवार पर दबाव बनाया गया था।

हत्या के मामले से जुड़ा है पूरा विवाद

यह जमीन सौदा एक हत्या के मामले की जांच के दौरान सामने आया। शिकायतकर्ता आकाश लोधी के मुताबिक, उसके पिता रमेश लोधी से जुड़ी जमीन को लेकर दबाव बनाया गया था। आकाश लोधी को एक युवक की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी बनाया गया था और उसे गिरफ्तार किया गया था।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि गिरफ्तारी के बाद परिवार पर जमीन बेचने का दबाव बनाया गया। आकाश लोधी का दावा है कि उसके पिता को कथित तौर पर दो दिन तक CSP के घर पर रखा गया और इसके बाद सरकारी वाहन से कन्हवारा स्थित जमीन की रजिस्ट्री कराने ले जाया गया। ये शिकायतकर्ता के आरोप हैं, जिनकी पुलिस जांच कर रही है।

सौदे की रकम को लेकर भी सामने आया अलग दावा

शिकायतकर्ता की ओर से जमीन के सौदे को लेकर एक अलग दावा भी किया गया। उसके मुताबिक, करीब 82 लाख रुपये की गाइडलाइन कीमत वाली जमीन का सौदा 1.07 करोड़ रुपये में तय हुआ था। आरोप है कि रजिस्ट्री के समय केवल 15 लाख रुपये का चेक दिया गया और बाकी रकम बाद में देने का आश्वासन दिया गया।

जब कथित तौर पर बाकी रकम नहीं मिली तो रमेश लोधी ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत की और जमीन के नामांतरण पर आपत्ति भी दर्ज कराई। इसके बाद मामला अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचा और जांच शुरू हुई।

बैंक खातों के लेनदेन की भी जांच

विभागीय जांच के दौरान जमीन की रजिस्ट्री और उससे जुड़े बैंक लेनदेन की भी जांच की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, जमीन के खरीदार मारूफ अहमद हनफी के खाते में 15 लाख रुपये क्षितिज राज के खाते से ट्रांसफर किए जाने की जानकारी सामने आई।

जांच में इस लेनदेन को भी महत्वपूर्ण माना गया। शिकायत में क्षितिज राज को नेहा पच्चीसिया का कथित पार्टनर और संबंधी बताया गया है। हालांकि इस संबंध और लेनदेन की पूरी भूमिका आपराधिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

शिकायत के बाद शुरू हुई विभागीय जांच

जमीन सौदे को लेकर शिकायत सामने आने के बाद जबलपुर रेंज के अधिकारियों ने मामले की जांच कराई। रिपोर्ट के अनुसार, जांच की जिम्मेदारी जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और IPS अधिकारी अनु बेनीवाल को सौंपी गई थी।

जांच में जमीन के दस्तावेज, रजिस्ट्री, भुगतान और बैंक खातों से जुड़े पहलुओं को देखा गया। विभागीय जांच के बाद मामले को गंभीर मानते हुए आगे आपराधिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई।

इसके बाद भोपाल सतर्कता शाखा की शिकायत और जबलपुर जोन के निर्देश पर कुठला थाने में FIR दर्ज की गई।

नेहा पच्चीसिया पहले भी रही हैं चर्चा में

CSP नेहा पच्चीसिया इससे पहले भी विभागीय शिकायतों और विवादों को लेकर चर्चा में रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी की शिकायत के बाद उनके ड्राइवर केशव सिंह को निलंबित किया गया था और CSP से तीन थानों का प्रभार भी वापस लिया गया था।

इसके अलावा हत्या के एक मामले में समय पर चालान पेश नहीं होने और आरोपी को डिफॉल्ट बेल मिलने को लेकर भी विभागीय जांच की बात सामने आई थी। इसी मामले से जुड़े आरोपी ने न्यायालय में परिवाद पेश कर जमीन को लेकर भी आरोप लगाए थे।

एयर होस्टेस से बनीं पुलिस अधिकारी

नेहा पच्चीसिया की पेशेवर पृष्ठभूमि भी इस मामले के साथ चर्चा में आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस सेवा में आने से पहले उन्होंने एयर होस्टेस के तौर पर काम किया था। इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी की और पुलिस अधिकारी बनीं।

अब FIR के बाद क्या होगा?

FIR दर्ज होने के बाद मामला अब आपराधिक जांच के चरण में पहुंच गया है। पुलिस जमीन के दस्तावेजों, रजिस्ट्री में दर्ज रकम, बैंक खातों में हुए लेनदेन और शिकायत में लगाए गए दबाव के आरोपों की जांच करेगी।

जांच एजेंसी यह भी देखेगी कि जमीन का वास्तविक सौदा किस रकम में हुआ था, भुगतान किसने किया और पूरी प्रक्रिया में तीनों आरोपियों की कथित भूमिका क्या थी।

फिलहाल FIR में लगाए गए आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। मामले की अंतिम स्थिति पुलिस जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में सामने आएगी।

कटनी के इस मामले ने उठाए कई सवाल

कटनी का यह मामला सरकारी पद और निजी संपत्ति के बीच संभावित टकराव को लेकर भी सवाल खड़े करता है। एक तरफ जमीन की सरकारी गाइडलाइन कीमत और रजिस्ट्री रकम में बड़ा अंतर बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ शिकायतकर्ता ने जमीन बेचने के लिए दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया है।

अब जांच का सबसे अहम हिस्सा यही होगा कि जमीन का सौदा वास्तव में किन परिस्थितियों में हुआ, रकम का वास्तविक भुगतान कितना हुआ और इसमें शामिल लोगों की भूमिका क्या थी।

FIR दर्ज होने के बाद पुलिस जांच शुरू हो चुकी है और आने वाले समय में दस्तावेजों तथा वित्तीय लेनदेन की जांच से इस विवाद की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

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