मुंबई/महाराष्ट्र, 21 अगस्त 2026: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान अब महज प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहा है। राज्य के परिवहन विभाग ने नियम को जमीन पर लागू करने के लिए राज्यव्यापी जांच अभियान शुरू कर दिया है। पहले ही दिन पर्याप्त मराठी ज्ञान नहीं पाए जाने पर 1,268 व्यावसायिक यात्री वाहन चालकों को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें मुख्य रूप से ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालक शामिल हैं।
यह कार्रवाई महाराष्ट्र मोटर वाहन नियमों में किए गए संशोधन के बाद शुरू हुई है। नियम के तहत यात्री सेवा देने वाले व्यावसायिक वाहन चालकों के लिए मराठी का व्यावहारिक ज्ञान जरूरी किया गया है। परिवहन विभाग अब यह जांच रहा है कि चालक यात्रियों से मराठी में सामान्य बातचीत कर सकते हैं या नहीं।
मुंबई से शुरू हुई सड़क पर भाषा की जांच
20 अगस्त से महाराष्ट्र के अलग-अलग RTO क्षेत्रों में चालकों की भाषा क्षमता की जांच शुरू की गई। मुंबई के दादर ईस्ट में भी RTO अधिकारियों ने सड़क पर ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों से बातचीत कर उनकी मराठी समझ को परखा।
अधिकारियों के मुताबिक यह कोई पारंपरिक लिखित भाषा परीक्षा नहीं है। चालकों से ऐसी परिस्थितियों पर आधारित सवाल पूछे जा रहे हैं, जिनका सामना उन्हें रोजाना यात्रियों के साथ काम करते समय करना पड़ता है।
मसलन, यात्री से उसकी मंजिल पूछना, रास्ता समझना, किराए या मीटर से संबंधित बातचीत करना और किसी जगह तक पहुंचने की जानकारी देना जैसे सामान्य संवाद जांच का हिस्सा हैं।
16 सवालों के जरिए परखी जा रही भाषा
RTO की टीमों के पास मराठी भाषा के व्यावहारिक ज्ञान को परखने के लिए सवालों की एक प्रश्नावली है। अलग-अलग रिपोर्टों में इसे 15 और 16 सवालों की प्रश्नावली बताया गया है, जिसका उद्देश्य औपचारिक भाषा परीक्षा लेना नहीं बल्कि चालक की रोजमर्रा की बातचीत की क्षमता देखना है।
जांच के दौरान अधिकारियों की ओर से यह देखा जा रहा है कि चालक यात्री की बात समझ सकता है या नहीं और जरूरी जवाब मराठी में दे सकता है या नहीं।
RTO अधिकारियों के मुताबिक यात्री सेवा देने वाले वाहन चालक का स्थानीय भाषा में बुनियादी संवाद कर पाना यात्रियों की सुविधा और सेवा से जुड़ा महत्वपूर्ण पहलू है।
एक महीने का नोटिस, फिर कार्रवाई
जिन चालकों को जांच में मराठी का पर्याप्त व्यावहारिक ज्ञान नहीं मिला, उन्हें तुरंत नौकरी या ड्राइविंग से हटाने के बजाय एक महीने का नोटिस दिया जा रहा है। इस अवधि में उन्हें मराठी सीखने और दोबारा जांच के लिए तैयार होने का मौका दिया जाएगा।
अगर दोबारा जांच में भी चालक आवश्यक स्तर की मराठी नहीं बोल पाता है, तो उसके बैज को तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। लगातार नियमों का पालन नहीं करने की स्थिति में बैज और परमिट पर आगे की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
इस वजह से बड़ी संख्या में ऐसे चालकों के सामने चिंता बढ़ गई है, जो दूसरे राज्यों से महाराष्ट्र आकर वर्षों से ऑटो या टैक्सी चलाकर अपना परिवार चला रहे हैं।
1,268 चालकों को मिला नोटिस
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया कि राज्यव्यापी जांच के पहले दिन मराठी का पर्याप्त ज्ञान नहीं पाए जाने पर 1,268 ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को नोटिस जारी किए गए।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि सरकार ने मराठी प्रशिक्षण अभियान के बाद अब नियमों के पालन की जांच को भी शुरू कर दिया है।
परिवहन विभाग का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं है। जिन चालकों को भाषा में कमी मिलेगी, उन्हें पहले सुधार का अवसर दिया जाएगा।
पहले चलाया गया था मराठी प्रशिक्षण अभियान
सरकार ने इस नियम को लागू करने से पहले ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी प्रशिक्षण अभियान भी चलाया था। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 1.65 लाख ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र दिए जा चुके हैं।
18 अगस्त को ठाणे में आयोजित एक कार्यक्रम में भी इस प्रशिक्षण अभियान की प्रगति की जानकारी दी गई थी। सरकार के मुताबिक बड़ी संख्या में चालकों ने प्रशिक्षण पूरा किया है और अब RTO की ओर से वास्तविक परिस्थितियों में भाषा की समझ जांची जा रही है।
दूसरे राज्यों से आए चालकों की बढ़ी चिंता
मुंबई और महाराष्ट्र के दूसरे शहरों में बड़ी संख्या में ऐसे ऑटो और टैक्सी चालक हैं, जो उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों से आकर काम करते हैं। इनमें से कई चालक रोजमर्रा की बातचीत के लिए हिंदी या स्थानीय बोलियों का इस्तेमाल करते हैं।
अब मराठी के व्यावहारिक ज्ञान को अनिवार्य किए जाने के बाद ऐसे चालकों के सामने भाषा सीखने की चुनौती बढ़ गई है। हालांकि सरकार ने इसके लिए प्रशिक्षण का विकल्प उपलब्ध कराया है और नोटिस के बाद एक महीने का समय भी दिया जा रहा है।
कुछ चालकों का कहना है कि उन्हें रोजमर्रा की मराठी समझ में आती है और वे इसे और बेहतर सीखने के लिए तैयार हैं। वहीं कुछ चालक इस बात को लेकर सवाल उठा रहे हैं कि किसी व्यक्ति को भाषा बोलने के लिए बाध्य करना उचित है या नहीं।
सरकार का तर्क क्या है?
महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि राज्य में यात्री सेवा देने वाले चालकों के लिए स्थानीय भाषा का बुनियादी ज्ञान जरूरी है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने पहले ही स्पष्ट किया था कि जो चालक मराठी सीखने से इनकार करेंगे, उनके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार का यह भी कहना है कि महाराष्ट्र में दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को रोजगार मिलने में कोई रोक नहीं है, लेकिन राज्य की स्थानीय भाषा का प्रचार-प्रसार और यात्रियों के साथ संवाद सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
पुराने परमिट भी जांच के घेरे में
मराठी भाषा की जांच के साथ-साथ महाराष्ट्र सरकार पुराने ऑटो-रिक्शा और टैक्सी परमिट की वैधता की भी जांच कराने की तैयारी में है। इसके लिए परिवहन विभाग की ओर से विशेष जांच दल यानी SIT गठित करने की बात कही गई है।
इस जांच में यह देखा जाएगा कि पुराने परमिट नियमों के मुताबिक वैध हैं या नहीं और उनका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है।
विवाद भी बढ़ा, लेकिन सरकार अपने फैसले पर कायम
मराठी की अनिवार्यता को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक और सामाजिक बहस भी तेज हो गई है। एक तरफ सरकार इसे यात्रियों की सुविधा और स्थानीय भाषा के ज्ञान से जोड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ कुछ चालक संगठनों और गैर-मराठी भाषी लोगों की ओर से इसे लेकर चिंता जताई जा रही है।
फिलहाल RTO की कार्रवाई राज्यभर में शुरू हो चुकी है। आने वाले दिनों में उन 1,268 चालकों की दोबारा जांच महत्वपूर्ण होगी, जिन्हें एक महीने का समय दिया गया है।
अब आगे क्या होगा?
महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए आने वाले सप्ताह महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। जिन चालकों को नोटिस मिला है, उन्हें निर्धारित अवधि में मराठी का आवश्यक व्यावहारिक ज्ञान हासिल करना होगा।
अगर वे दोबारा जांच में सफल होते हैं तो उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई नहीं होगी। लेकिन अगर वे तय मानक पूरा नहीं कर पाए, तो उनके बैज के निलंबन जैसी कार्रवाई हो सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने महाराष्ट्र में स्थानीय भाषा, रोजगार और यात्री सेवा के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल सरकार का रुख स्पष्ट है—ऑटो, टैक्सी और ऐप आधारित यात्री सेवा में काम करने वाले चालकों को मराठी का बुनियादी कामकाजी ज्ञान रखना होगा और RTO अब इसकी सड़क पर जांच भी कर रहा है।
