ग्रेटर नोएडा, 24 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात एक चलती स्लीपर बस में लगी भीषण आग ने यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मचा दी। इस दर्दनाक हादसे में 9 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। बस दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही थी और हादसा जेवर थाना क्षेत्र में एक्सप्रेसवे के करीब 33 किलोमीटर के पास हुआ।
हादसे के बाद सामने आए एक यात्री के बयान ने घटना को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्री सुनील कुमार के अनुसार, बस में आग लगने से पहले ही जलने जैसी बदबू और धुआं महसूस हो रहा था। यात्रियों ने चालक और परिचालक को इसकी जानकारी भी दी थी और बस रोककर जांच करने के लिए कहा था। पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनकी चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया गया।
पहले आई जलने की बदबू, फिर फैलने लगा धुआं
यात्री के मुताबिक, बुधवार रात करीब 11:30 बजे बस यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर क्षेत्र के पास पहुंची थी। उस समय बस में कई यात्री सो रहे थे। इसी दौरान ड्राइवर केबिन की तरफ से जलने जैसी बदबू आने लगी।
कुछ यात्रियों ने इसकी जानकारी चालक और परिचालक को दी। शिकायत के अनुसार, यात्रियों ने बस रोकने और समस्या की जांच करने की मांग भी की, लेकिन बस तत्काल नहीं रोकी गई। एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि चालक और परिचालक ने यात्रियों की चिंता को गंभीरता से नहीं लिया।
कुछ ही देर में सीट के पास से उठने लगीं आग की लपटें
यात्रियों के अनुसार, बदबू महसूस होने के कुछ समय बाद हालात अचानक बिगड़ गए। ड्राइवर की सीट के पास से तेज आग की लपटें दिखाई देने लगीं और बस के अंदर धुआं भरने लगा।
इसके बाद यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। कई लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए बस से बाहर निकलने की कोशिश की। कुछ यात्रियों ने बस से कूदकर जान बचाई, जबकि कई लोग अंदर ही फंस गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि यात्रियों को सामान निकालने या ठीक से बाहर निकलने तक का समय नहीं मिला।
यात्री बोले- समय रहते बस रुक जाती तो बच सकती थीं जानें
सुनील कुमार ने दावा किया कि यदि यात्रियों की शुरुआती शिकायत के बाद बस को समय रहते सड़क किनारे रोक दिया जाता और जांच की जाती, तो लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने का ज्यादा समय मिल सकता था।
उन्होंने बताया कि आग फैलने के बाद यात्रियों ने खुद ही बचाव की कोशिश शुरू कर दी। बस में मौजूद अग्निशमन सिलेंडर से आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया, लेकिन आग तेजी से फैलती चली गई। कुछ यात्रियों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश भी की।
9 यात्रियों की मौत, कई घायल
पुलिस के अनुसार हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इनमें एक महिला समेत आठ पुरुषों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। कई अन्य यात्री झुलसे हैं और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए हैं और परिजनों को सूचना दी गई है।
बस में यात्रियों की संख्या को लेकर अलग-अलग शुरुआती जानकारी सामने आई है। विभिन्न रिपोर्टों में करीब 35 से 40 यात्रियों के सवार होने की बात कही गई है। पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
आग लगने की वजह अभी स्पष्ट नहीं
हादसे के बाद आग लगने की वास्तविक वजह की जांच की जा रही है। शुरुआती पुलिस जानकारी में एसी सिस्टम में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है, लेकिन अंतिम कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
पुलिस ने यात्री की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है। अब चालक और परिचालक की भूमिका, बस की तकनीकी स्थिति और आग लगने से पहले यात्रियों द्वारा दी गई चेतावनी समेत कई पहलुओं की जांच की जा रही है।
ड्राइवर और परिचालक की भूमिका भी जांच के घेरे में
हादसे के बाद यात्रियों के आरोपों ने बस संचालन और यात्री सुरक्षा से जुड़े सवालों को भी सामने ला दिया है। शिकायत में दावा किया गया है कि यात्रियों द्वारा जलने की बदबू की जानकारी देने के बावजूद बस को तुरंत नहीं रोका गया।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है। पुलिस शिकायत, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और बस की तकनीकी जांच के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आग किस वजह से लगी और शुरुआती चेतावनी मिलने के बाद क्या कदम उठाए गए थे।
