35 साल बाद बांग्लादेश में राष्ट्रपति पद का चुनाव, फखरुल और ओली अहमद आमने-सामने

ढाका, 20 अगस्त 2026: बांग्लादेश में करीब 35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबला देखने को मिल रहा है। गुरुवार को देश की जातीय संसद में नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर और 11 दलों के विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद राष्ट्रपति पद की दौड़ में आमने-सामने हैं।

बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में राष्ट्रपति का चुनाव जनता सीधे नहीं करती, बल्कि संसद के सदस्य राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। इस बार 349 सांसद मतदान के लिए पात्र हैं। चुनाव आयोग के अनुसार मतदान संसद भवन में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक होगा।

1991 के बाद पहली बार सीधा मुकाबला

इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि 1991 के बाद पहली बार राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हो रहा है। पिछले कई दशकों में राष्ट्रपति चुनाव आमतौर पर निर्विरोध या आपसी सहमति से होते रहे हैं। इस बार दो उम्मीदवार मैदान में होने के कारण सांसदों को वास्तव में वोट डालकर अपना राष्ट्रपति चुनना होगा।

हालांकि संख्याबल के लिहाज से BNP उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को मजबूत स्थिति में माना जा रहा है। BNP के पास संसद में स्पष्ट बहुमत है, इसलिए उनका चुनाव लगभग तय माना जा रहा है।

कौन हैं मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर?

मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के लंबे समय से प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। वह पार्टी के महासचिव रहे हैं और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के करीबी सहयोगियों में गिने जाते हैं।

प्रधानमंत्री और BNP अध्यक्ष तारिक रहमान ने उन्हें राष्ट्रपति पद के लिए पार्टी का उम्मीदवार बनाया है। राष्ट्रपति चुनाव से पहले BNP की संसदीय दल की बैठक में फखरुल ने पार्टी के सांसदों से उन्हें समर्थन देने की अपील भी की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यदि उनसे कोई गलती हुई हो या अनजाने में किसी को ठेस पहुंची हो तो वह माफी मांगते हैं।

विपक्ष ने ओली अहमद को उतारा

मिर्जा फखरुल के सामने 11 दलों के विपक्षी गठबंधन ने कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद को अपना उम्मीदवार बनाया है। ओली अहमद बांग्लादेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े हैं।

विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार के मैदान में उतरने से इस बार राष्ट्रपति चुनाव महज औपचारिक प्रक्रिया नहीं रह गया है। हालांकि संसद में BNP के मजबूत बहुमत के कारण ओली अहमद के लिए जीत की संभावना कम मानी जा रही है।

राष्ट्रपति पद खाली होने के बाद हुआ चुनाव

बांग्लादेश में राष्ट्रपति पद खाली होने के बाद नए राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने स्वास्थ्य कारणों से पिछले महीने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका पांच साल का कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ था।

उनके इस्तीफे के बाद संसद के अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति की भूमिका निभा रहे हैं। संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति पद खाली होने के 90 दिनों के भीतर नए राष्ट्रपति का चुनाव कराया जाना जरूरी है।

राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है?

बांग्लादेश में राष्ट्रपति का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान से नहीं होता। संविधान के तहत राष्ट्रपति को संसद के सदस्य चुनते हैं। इस बार कुल 349 सांसद मतदान के पात्र हैं।

मतदान संसद के चैंबर में होगा और चुनाव आयोग ने इसके लिए दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक का समय निर्धारित किया है। मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना की जाएगी और विजेता की घोषणा की जाएगी।

शुक्रवार को हो सकता है शपथ ग्रहण

बांग्लादेश में नए राष्ट्रपति के चुनाव के बाद शुक्रवार शाम शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किए जाने की तैयारी है। रिपोर्टों के मुताबिक नए राष्ट्रपति को बंगभवन के दरबार हॉल में शपथ दिलाई जाएगी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह चुनाव?

यह चुनाव केवल राष्ट्रपति चुनने की संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में संभावित बदलाव के संकेत भी दे रहा है। करीब तीन दशक से अधिक समय बाद राष्ट्रपति पद पर वास्तविक मुकाबला होना अपने आप में महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है।

विशेषज्ञों की नजर इस बात पर भी है कि नए राष्ट्रपति की भूमिका भविष्य में कितनी प्रभावशाली होती है। भारत समेत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा पर नजर बनी हुई है।

BNP के पास संसद में मजबूत बहुमत होने के कारण मिर्जा फखरुल को स्पष्ट बढ़त हासिल है। इसके बावजूद ओली अहमद की उम्मीदवारी ने चुनाव को औपचारिक निर्विरोध चुनाव से अलग एक प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया बना दिया है।

आज तय होगी बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति की तस्वीर

35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए हो रहे इस मुकाबले में सांसद आज अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। मतदान और मतगणना के बाद यह साफ हो जाएगा कि बांग्लादेश के अगले राष्ट्रपति के रूप में मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर चुने जाते हैं या ओली अहमद कोई बड़ा उलटफेर करने में कामयाब होते हैं।

हालांकि मौजूदा संसदीय समीकरण मिर्जा फखरुल के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इस चुनाव ने बांग्लादेश की राजनीति में राष्ट्रपति पद को लेकर एक नई बहस जरूर शुरू कर दी है।

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