स्थान: नई दिल्ली
दिनांक: 15 जुलाई, 2026
विशेष संवाददाता, नई दिल्ली:
देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम ने दो अलग-अलग रूप धारण कर लिए हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने जहां एक ओर पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ का अलर्ट जारी किया है, वहीं दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे उत्तरी राज्यों में गर्मी और उमस की स्थिति बनी हुई है [1.1.4, 1.1.7, 1.1.8]।
बिहार और ओडिशा पर बारिश का ‘रेड अलर्ट’
मौसम विभाग ने पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के लिए भारी बारिश की चेतावनी दी है [1.1.4, 1.1.7]।
- ओडिशा और बिहार: ओडिशा में कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश (Extremely Heavy Rainfall) होने की संभावना है [1.1.4, 1.1.6]। वहीं, बिहार में भी भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है [1.1.4, 1.1.7]। इन राज्यों के निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है [1.1.7]।
- पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश पहले से ही भारी बारिश और बाढ़ की चपेट में हैं [1.1.8]। इन राज्यों में स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है और अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश जारी रहने का अनुमान है [1.1.8]। रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वोत्तर में अब तक लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं [1.1.8]।
दिल्ली-NCR में गर्मी और उमस का सितम
राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में मानसून के सक्रिय होने के बावजूद गर्मी से राहत नहीं मिल रही है [1.1.8]।
- तापमान का पारा: दिल्ली में बुधवार और गुरुवार को अधिकतम तापमान 37°C से 39°C के बीच रहने का अनुमान है [1.1.8]।
- उमस भरी गर्मी: हरियाणा, दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में ‘गर्म और आर्द्र’ (Hot and Humid) मौसम की स्थिति बनी रहेगी [1.1.2, 1.1.4]। हालांकि, इन इलाकों में छिटपुट बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना बनी हुई है, लेकिन इससे तापमान में कोई बड़ी गिरावट की उम्मीद कम है [1.1.7, 1.1.8]।
राजस्थान में मानसून की सुस्ती
पश्चिमी भारत, विशेषकर राजस्थान में मानसून की चाल धीमी पड़ गई है [1.1.9]। राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क बना हुआ है और बारिश की गतिविधियां सामान्य से कम दर्ज की जा रही हैं [1.1.9]। यहां आने वाले कुछ दिनों तक मानसून के कमजोर रहने का अनुमान है [1.1.9]।
सावधानी:
मौसम विभाग ने विशेष रूप से पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के निवासियों को सलाह दी है कि वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सतर्क रहें और स्थानीय आधिकारिक बुलेटिनों पर नजर बनाए रखें [1.1.7]। जलभराव की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर रहें और खराब मौसम के दौरान आंधी-तूफान से बचाव के उपाय करें [1.1.4, 1.1.7]।
