स्थान: राजस्थान-मध्य प्रदेश सीमा
दिनांक: 15 जुलाई, 2026
विशेष संवाददाता:
राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा पर मादक पदार्थों की तस्करी के नए और खतरनाक तरीके सामने आए हैं। हाल ही में हुए कुछ सनसनीखेज खुलासों ने यह साबित कर दिया है कि ड्रग माफिया अब ‘होम डिलीवरी’ जैसी सुविधाओं के जरिए युवाओं को नशे के जाल में धकेल रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में तस्करों का नेटवर्क इतना सक्रिय हो गया है कि महज 12 मिनट के भीतर नशे की खेप ग्राहक तक पहुंचाई जा रही है [1.1.2]।
’12 मिनट में डिलीवरी’ का खौफनाक नेटवर्क
तस्करी के इस नए मॉडल में तस्कर तकनीक और स्थानीय रास्तों का बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं। तस्करों का दावा है कि उनके पास एक ऐसा नेटवर्क है, जिसके जरिए वे किसी भी इलाके में 12 मिनट से कम समय में स्मैक या अन्य ड्रग्स पहुंचा सकते हैं।
- तस्करों का दुस्साहस: एक स्टिंग ऑपरेशन में एक तस्कर को यह कहते हुए सुना गया— “साथ दो, किसी को टिकने नहीं देंगे।” यह बयान उनके नेटवर्क के विस्तार और स्थानीय स्तर पर उनके प्रभाव को दर्शाता है।
- होम डिलीवरी: सांचौर और उसके आसपास के सीमावर्ती इलाकों में, नेशनल हाईवे के किनारे बने ढाबों और होटलों को ‘नशा आपूर्ति केंद्रों’ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है [1.1.2]। वहां से बिना किसी डर के नशे की होम डिलीवरी की जा रही है [1.1.2]।
क्या है तस्करी का रूट?
पुलिस सूत्रों और हालिया पड़ताल के अनुसार, राजस्थान से एमपी की ओर जाने वाले तस्कर मुख्य रूप से उन रास्तों का उपयोग कर रहे हैं जो पुलिस की सीधी निगरानी से दूर हैं:
- हाइवे के किनारे होटल: नेशनल हाईवे पर स्थित छोटे होटल और ढाबे इस सिंडिकेट के ‘स्टॉपओवर’ बने हुए हैं, जहाँ से ड्रग्स को छोटे पैकेट्स में एमपी के जिलों में भेजा जाता है [1.1.2]।
- गुप्त रास्ते: तस्कर सीमावर्ती गाँवों के कच्चे रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे वे पुलिस की पिकेट्स से बचकर निकल जाते हैं।
- छोटे सप्लायर: बड़ी खेप को पहले सुरक्षित गोदामों में रखा जाता है और फिर स्थानीय स्तर पर छोटे सप्लायर्स के माध्यम से ग्राहकों तक 10-12 मिनट में पहुंचाया जाता है [1.1.2]।
प्रशासन की कार्रवाई और चुनौतियां
राजस्थान और मध्य प्रदेश की पुलिस सीमावर्ती क्षेत्रों में ‘ऑपरेशन वज्र प्रहार’ जैसे अभियानों के जरिए तस्करों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है [1.1.1]। हालांकि, तस्करों की बदलती रणनीति के कारण इन्हें पकड़ना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
हाल के दिनों में पुलिस ने कई तस्करों को गिरफ्तार किया है, जो नशे की खेप ले जाने के लिए जानवरों का सहारा लेने या एंबुलेंस जैसी गाड़ियों का उपयोग करने जैसे हथकंडे अपना रहे हैं [1.1.1]।
विशेषज्ञों की राय:
समाजशास्त्रियों का मानना है कि नशे की इस ‘होम डिलीवरी’ ने छोटे कस्बों के युवाओं को बड़ी मुश्किल में डाल दिया है। जब ड्रग्स इतनी आसानी से उपलब्ध होते हैं, तो नशे की लत लगने की दर कई गुना बढ़ जाती है।
पुलिस प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे ऐसे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत दें। साथ ही, सीमावर्ती जिलों में विशेष निगरानी और ‘नशा मुक्ति अभियान’ को और अधिक प्रभावी बनाने की मांग उठ रही है।
