ग्लासगो (स्कॉटलैंड) | 21 जुलाई 2026
23 जुलाई से स्कॉटलैंड के ग्लासगो में शुरू होने जा रहे 23वें कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 को लेकर दुनिया भर के खेल प्रेमियों के बीच उत्सुकता तो है, लेकिन इस बार का आयोजन कई मायनों में अलग और ऐतिहासिक होने जा रहा है। इस संस्करण को पिछले 32 वर्षों का सबसे छोटा कॉमनवेल्थ गेम्स माना जा रहा है, क्योंकि इसमें केवल 10 खेल शामिल किए गए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि हॉकी, बैडमिंटन, कुश्ती (रेसलिंग), क्रिकेट और टेबल टेनिस जैसे लोकप्रिय खेल इस बार प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं होंगे।
कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन के अनुसार, पहले ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य को 2026 खेलों की मेजबानी करनी थी, लेकिन बढ़ती लागत और वित्तीय चुनौतियों के कारण उसने आयोजन से हाथ खींच लिया। इसके बाद ग्लासगो ने सीमित बजट और पहले से उपलब्ध खेल सुविधाओं के आधार पर मेजबानी की जिम्मेदारी स्वीकार की। खर्च कम रखने के उद्देश्य से प्रतियोगिता का स्वरूप छोटा किया गया और खेलों की संख्या में बड़ी कटौती की गई। यही कारण है कि यह संस्करण हाल के दशकों का सबसे सीमित कॉमनवेल्थ गेम्स बन गया है।
इस बार जिन खेलों को कार्यक्रम से बाहर रखा गया है, उनमें भारत के लिए सबसे अधिक पदक दिलाने वाले खेल भी शामिल हैं। बैडमिंटन, कुश्ती, हॉकी, टेबल टेनिस और क्रिकेट पिछले संस्करणों में भारतीय दल के लिए प्रमुख पदक स्रोत रहे हैं। बर्मिंघम 2022 में भारत ने कुल 61 पदक जीते थे, जिनमें से लगभग आधे पदक इन्हीं खेलों से आए थे। ऐसे में इन खेलों की अनुपस्थिति भारतीय दल के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
हालांकि प्रतियोगिता में एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, वेटलिफ्टिंग, जूडो, स्विमिंग, जिम्नास्टिक, 3×3 बास्केटबॉल और कुछ पैरा स्पोर्ट्स जैसे खेल शामिल रहेंगे। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार भारत की पदक उम्मीदें मुख्य रूप से एथलेटिक्स, मुक्केबाजी और वेटलिफ्टिंग पर टिकी रहेंगी। भारतीय दल में कई अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा प्रतिभाओं को भी मौका दिया गया है, जो नए रिकॉर्ड बनाने का प्रयास करेंगे।
भारतीय ओलंपिक संघ द्वारा घोषित दल में लगभग 125 खिलाड़ी शामिल हैं, जो 13 स्पर्धाओं (पैरा स्पोर्ट्स सहित) में हिस्सा लेंगे। एथलेटिक्स में सबसे बड़ा दल भेजा गया है, जबकि बॉक्सिंग, जूडो और वेटलिफ्टिंग में भी मजबूत भारतीय चुनौती देखने को मिलेगी। हालांकि खेलों की संख्या कम होने के कारण भारत के कुल पदकों की संख्या पर असर पड़ना लगभग तय माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कॉमनवेल्थ गेम्स के इस सीमित स्वरूप को लेकर खिलाड़ियों और प्रशंसकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। एक ओर आयोजन को बचाने के लिए ग्लासगो की सराहना की जा रही है, वहीं दूसरी ओर लोकप्रिय खेलों के बाहर होने से प्रतियोगिता की चमक कुछ फीकी पड़ने की भी चर्चा है। हॉकी, बैडमिंटन और कुश्ती जैसे खेलों के प्रशंसकों में निराशा देखी जा रही है, क्योंकि इन खेलों का कॉमनवेल्थ इतिहास काफी समृद्ध रहा है।
इसके बावजूद आयोजकों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बीच भी खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और प्रतियोगिता का सफल आयोजन उनकी प्राथमिकता है। उनका उद्देश्य यह भी है कि भविष्य में कॉमनवेल्थ गेम्स आर्थिक रूप से अधिक टिकाऊ मॉडल के साथ आयोजित किए जाएं, ताकि मेजबान देशों पर अत्यधिक वित्तीय बोझ न पड़े। ग्लासगो इससे पहले भी 2014 में सफलतापूर्वक कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी कर चुका है और एक बार फिर वैश्विक खेल आयोजन की जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार है।
