इस्लामाबाद | 17 जुलाई, 2026
पाकिस्तान ने कश्मीर और पीओके (PoK) के मुद्दों के बीच एक बड़ा कदम उठाते हुए गिलगित-बाल्टिस्तान को देश का पांचवां प्रांत बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। क्षेत्र की तथाकथित विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर पाकिस्तान की संघीय सरकार से इसे ‘अस्थाई प्रांतीय दर्जा’ (Provisional Provincial Status) देने और संविधान में आवश्यक संशोधन करने की मांग की है।
प्रस्ताव की मुख्य बातें:
- विधानसभा में सर्वसम्मति: गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा के सत्र के दौरान विधायक जलाल अली शाह द्वारा यह प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का समर्थन मिला।
- संसद से संविधान संशोधन की मांग: प्रस्ताव में मांग की गई है कि पाकिस्तान की संसद संविधान में संशोधन करे ताकि इस पहाड़ी क्षेत्र को आधिकारिक तौर पर देश का पांचवां सूबा (प्रांत) बनाया जा सके। वर्तमान में पाकिस्तान में चार प्रांत—पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा हैं।
- राष्ट्रीय संसद में प्रतिनिधित्व: इस कदम का उद्देश्य गिलगित-बाल्टिस्तान के नागरिकों को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली (लोकसभा) और सीनेट (राज्यसभा) समेत अन्य संघीय संस्थानों में पूर्ण राजनीतिक और लोकतांत्रिक अधिकार व प्रतिनिधित्व दिलाना है।
- कमेटी की सिफारिशों का हवाला: प्रस्ताव में दिवंगत नेता सरताज अजीज की अध्यक्षता वाली सुधार समिति की पुरानी सिफारिशों को लागू करने पर जोर दिया गया है।
पीओके के विरोध प्रदर्शनों से ध्यान भटकाने की चाल?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब गुलाम कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान के इलाकों में स्थानीय जनता के बीच भारी असंतोष और विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। जनता लगातार बुनियादी अधिकारों और पाकिस्तान के दमनकारी रवैये के खिलाफ आवाज उठा रही है। ऐसे में इस नए सियासी शिगूफे को जनता के गुस्से को शांत करने और अंतरराष्ट्रीय ध्यान भटकाने की एक चाल के रूप में देखा जा रहा है।
भारत का रुख
भारत ने हमेशा की तरह इस तरह के कदमों का कड़ा विरोध किया है। भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश—जिनमें गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) भी शामिल है—भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं। नई दिल्ली ने पहले भी पाकिस्तान द्वारा इस क्षेत्र की यथास्थिति को बदलने के किसी भी एकतरफा प्रयास को खारिज किया है और इसे पूरी तरह अवैध बताया है।
अब देखना यह होगा कि क्या पाकिस्तानी संसद इस प्रस्ताव पर मुहर लगाती है या यह महज राजनीतिक दस्तावेजों तक ही सीमित रह जाता है।
