एमपी की सियासत में नया ड्रामा: बीजेपी की चेतावनी पर हाथ में फूल लेकर खड़े रहे कांग्रेसी; ‘धृतराष्ट्र’ वाले बयान पर विधायक बोले— “हाईकमान के कहने पर चुप हूं”

भोपाल/इंदौर | 23 जुलाई, 2026

मध्य प्रदेश की राजनीति में बयानों के तीर और अनूठे प्रदर्शनों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को लेकर दिए गए एक तीखे बयान के बाद उपजा विवाद गहराता जा रहा है। एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी, वहीं जवाब में कांग्रेसी कार्यकर्ता हाथों में फूल लेकर अनोखे अंदाज में खड़े नजर आए। इस बीच, जीतू पटवारी को ‘धृतराष्ट्र’ कहने वाले कांग्रेस विधायक के ताजा बयान ने राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ा दी है।

चेतावनी देने आई भाजपा, फूल लेकर खड़े रहे कांग्रेसी

राजधानी भोपाल और इंदौर समेत कुछ अन्य जिलों में राजनीतिक माहौल उस वक्त दिलचस्प हो गया जब बीजेपी ने कांग्रेस के विरोध में प्रदर्शन का ऐलान किया।

  • सड़कों पर राजनीतिक ड्रामा: बीजेपी कार्यकर्ताओं ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा निकालने की तैयारी की थी।
  • फूलों से स्वागत की रणनीति: स्थिति से निपटने और अनूठे तरीके से विरोध दर्ज कराने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गांधीवादी तरीका अपनाया। बीजेपी के तेवरों के जवाब में कांग्रेसी हाथ में गुलाब के फूल लेकर खड़े हो गए और कहा कि वे विरोध की राजनीति का जवाब प्रेम और फूलों से देंगे। इस वाकये की चर्चा अब पूरे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हो रही है।

“हाईकमान के कहने पर चुप हूं…”

पूरे विवाद के केंद्र में वह कांग्रेसी विधायक हैं, जिन्होंने हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को महाभारत के पात्र ‘धृतराष्ट्र’ की संज्ञा दी थी। इस बयान के बाद पार्टी के भीतर घमासान मच गया था और मामला दिल्ली दरबार तक जा पहुंचा था।

जब मीडिया ने उस विधायक से उनके उस चर्चित बयान और वर्तमान स्थिति पर सवाल किया, तो उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा:

“मैंने जो कहा था, वह परिस्थितियों और पार्टी के हित को ध्यान में रखकर कहा था। अब पार्टी हाईकमान (केंद्रीय नेतृत्व) का निर्देश आ चुका है, और हाईकमान के कहने पर ही मैं फिलहाल इस मुद्दे पर चुप हूं।”

विधायक के इस बयान से साफ है कि भले ही ऊपर से मामले को शांत करने की कोशिशें चल रही हों, लेकिन प्रदेश कांग्रेस के भीतर अंदरूनी कलह और गुटबाजी सतह पर बनी हुई है।

सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक तरफ जहां बीजेपी इस आंतरिक कलह को भुनाने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के लिए गुटबाजी पर लगाम लगाना आगामी चुनावों के लिहाज से सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। हाईकमान की दखलंदाजी के बाद फिलहाल बयानबाजी भले ही थमी हो, लेकिन नेताओं के तेवर बता रहे हैं कि मध्य प्रदेश कांग्रेस की यह अंतर्कलह अभी और रंग दिखाएगी।

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