सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी: मतदाता सूची से नाम कटने का मतलब नागरिकता खत्म होना नहीं

नई दिल्ली | 17 जुलाई, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया है कि ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से नाम कटने भर से किसी व्यक्ति की नागरिकता स्वतः समाप्त नहीं हो जाती है [1.3.1]। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने पश्चिम बंगाल में SIR के कारण लोगों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किए जाने के मामले पर यह टिप्पणी की है [1.1.1, 1.2.2, 1.2.4]।

मामले की मुख्य बातें:

  • बंगाल सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस: कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है [1.1.1, 1.2.4]। यह नोटिस एक याचिका पर जारी किया गया है जिसमें मांग की गई है कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनकी अपीलों का निपटारा समयबद्ध तरीके से किया जाए [1.2.1, 1.2.2]।
  • योजनाओं के लाभ से जुड़ा विवाद: याचिकाकर्ता का आरोप है कि बंगाल सरकार SIR प्रक्रिया में नाम डिलीट होने के आधार पर लोगों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), अन्नपूर्णा योजना और अन्य कल्याणकारी लाभों से वंचित कर रही है [1.2.4, 1.3.1]। यह भी कहा गया कि इससे लोगों को जाति प्रमाण पत्र बनवाने में भी कठिनाई हो रही है [1.3.1]।
  • चुनाव आयोग की सीमा: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग नागरिकता का निर्धारण नहीं कर सकता [1.3.1]। जस्टिस बागची ने कहा कि चुनाव आयोग का यह कर्तव्य है कि वह नागरिकता से संबंधित मामलों को अधिनिर्णयन (adjudication) के लिए संबंधित मंत्रालय को भेजे [1.1.1, 1.2.2, 1.2.4]।
  • बिहार SIR जजमेंट का हवाला: पीठ ने अपने ‘बिहार SIR जजमेंट’ (27 मई, 2026) का हवाला देते हुए कहा कि SIR डेटा का उपयोग केवल चुनावी उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए [1.1.1, 1.2.4]। इसे अन्य कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने या लाभ रोकने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए [1.1.1, 1.3.1]।

याचिका में क्या है दावा?

याचिकाकर्ता प्रसेनजीत बोस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कोर्ट को बताया कि राज्य में SIR के बाद लाखों लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जबकि विशेष न्यायाधिकरणों (Special Tribunals) में लाखों अपीलें लंबित हैं [1.2.1, 1.2.4]। याचिका में आग्रह किया गया है कि जब तक नागरिकता की स्थिति स्पष्ट न हो जाए, तब तक किसी को भी कल्याणकारी योजनाओं से वंचित न किया जाए [1.2.4]।

कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 जुलाई के आसपास की तारीख का संकेत दिया है [1.2.2, 1.2.4]। यह फैसला उन लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है जो मतदाता सूची से नाम हटने के बाद अपनी नागरिकता और सरकारी लाभों को लेकर आशंकित थे [1.1.1, 1.3.3]।

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