नई दिल्ली, 17 जून 2026।
भारत में हाल के वर्षों में बढ़ती हीटवेव, अनियमित बारिश, अचानक बाढ़ और चरम मौसम की घटनाओं के पीछे मानव गतिविधियों की बड़ी भूमिका सामने आई है। आईआईटी-दिल्ली से जुड़े शोधकर्ताओं के अध्ययन में पाया गया है कि जीवाश्म ईंधनों का बढ़ता उपयोग, ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन, शहरीकरण और भूमि उपयोग में बदलाव देश के मौसम पैटर्न को तेजी से प्रभावित कर रहे हैं।
अध्ययन के अनुसार, भारत में देखने को मिल रहे ‘वाइल्ड वेदर’ यानी अप्रत्याशित और चरम मौसम की घटनाएं केवल प्राकृतिक कारणों का परिणाम नहीं हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि मानव-जनित जलवायु परिवर्तन ने तापमान में वृद्धि को तेज किया है, जिससे हीटवेव अधिक तीव्र और लंबी होती जा रही हैं। साथ ही वर्षा का वितरण भी असामान्य होता जा रहा है, जहां कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश तो कुछ इलाकों में सूखे जैसी स्थिति बन रही है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि स्थानीय स्तर पर भूमि और वायुमंडल के बीच होने वाली प्रक्रियाएं भी मौसम को प्रभावित कर रही हैं। बड़े पैमाने पर कंक्रीटीकरण, हरित क्षेत्रों में कमी और बढ़ते प्रदूषण के कारण कई शहरों में ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव बढ़ रहा है, जिससे गर्मी और अधिक महसूस होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित नहीं किया गया और टिकाऊ विकास की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में भारत को और अधिक चरम मौसम घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है। अध्ययन ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा, हरित बुनियादी ढांचे और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया है।
