किराए के लालच में कमजोर नींव पर खड़ी कर दी चार मंजिलें, सत्य निकेतन हादसे की FIR में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली, 8 सितंबर 2026। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत ढहने के मामले में दर्ज FIR ने हादसे से पहले हुए कथित निर्माण और लापरवाही को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के मुताबिक, पुरानी इमारत की नींव अतिरिक्त भार सहने की स्थिति में नहीं होने की जानकारी होने के बावजूद उस पर कथित तौर पर चार अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण कराया गया। पुलिस का आरोप है कि इसके पीछे मुख्य वजह अधिक किराया कमाने की लालच थी।

यह दर्दनाक हादसा 6 सितंबर 2026 को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुआ था। इमारत का इस्तेमाल छात्रों के लिए PG के तौर पर किया जा रहा था। हादसे के बाद करीब 27 घंटे तक चले राहत और बचाव अभियान में मलबे से लोगों को निकाला गया। बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर 7 हो गई, जिनमें दिल्ली विश्वविद्यालय के कई छात्र भी शामिल थे।

पुरानी इमारत पर खड़ी कर दी गईं चार मंजिलें

पुलिस की FIR के मुताबिक, आरोपी मकान मालिक हरिराम बंसल उर्फ गुप्ता और उसके भाई पर आरोप है कि उन्होंने कई साल पुरानी इमारत के ऊपर अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण कराया। जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि मालिकों को पता था कि पुरानी इमारत की नींव अतिरिक्त भार सहने की स्थिति में नहीं थी, फिर भी निर्माण कराया गया।

स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, जिस जगह यह इमारत बनी थी, वहां निर्माण की अनुमति सीमित थी, लेकिन बाद में इसका इस्तेमाल ग्राउंड प्लस चार मंजिल यानी G+4 संरचना के रूप में किया जा रहा था। TV9 की रिपोर्ट के अनुसार, MCD अधिकारी ने बताया था कि इमारत करीब 55 गज क्षेत्रफल में बनी थी और मूल अनुमति ग्राउंड प्लस एक मंजिल तक की थी।

छात्रों के रहने के लिए चल रहा था PG

इमारत में बड़ी संख्या में छात्र रह रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों के छात्र भी रहते थे। हर मंजिल पर कई कमरे थे और इमारत का इस्तेमाल छात्रावास/PG के तौर पर किया जा रहा था।

हादसे के बाद सामने आया कि आसपास भी कई ऐसी इमारतें मौजूद हैं जिनकी निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास की कुछ इमारतों को खाली कराने और उनकी स्थिति की जांच करने की कार्रवाई भी शुरू की।

बेसमेंट में चल रहे काम पर भी सवाल

इस हादसे में केवल अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण ही जांच के घेरे में नहीं है। रिपोर्टों में इमारत के बेसमेंट में चल रहे मरम्मत/निर्माण कार्य का भी जिक्र सामने आया है। हादसे से पहले बेसमेंट में पानी जमा होने और वहां काम चलने की बात स्थानीय स्तर पर सामने आई थी। हालांकि, हादसे की अंतिम तकनीकी वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

मालिक परिवार गिरफ्तार

हादसे के बाद पुलिस ने बिल्डिंग मालिक हरिराम बंसल/गुप्ता को गिरफ्तार किया। बाद में उनकी पत्नी और बेटे को भी गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई। दिल्ली पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की है।

FIR में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, FIR में लापरवाही और निर्माण से जुड़े गंभीर आरोप शामिल हैं।

MCD अधिकारियों पर भी कार्रवाई

हादसे के बाद केवल बिल्डिंग मालिक ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई हुई। दिल्ली सरकार ने दक्षिण जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत MCD के पांच अधिकारियों को निलंबित किया। इससे यह सवाल और गंभीर हो गया कि अवैध या नियमों के विपरीत निर्माण इतने लंबे समय तक निगरानी से कैसे बचा रहा।

हाई कोर्ट ने भी मांगा जवाब

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों से जवाब मांगा। रिपोर्टों के अनुसार, अदालत के स्तर पर इमारतों की अनुमति और PG हॉस्टलों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की जांच की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं।

हादसे ने राजधानी में PG सुरक्षा पर उठाए सवाल

सत्य निकेतन की घटना ने दिल्ली में छात्रों के लिए संचालित PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। खासकर उन इलाकों में जहां छोटी जमीन पर अधिक मंजिलें बनाकर बड़ी संख्या में छात्रों को किराए पर कमरे दिए जाते हैं, वहां भवन की संरचनात्मक मजबूती, फायर सेफ्टी, निर्माण अनुमति और नियमित निरीक्षण की जरूरत पर बहस तेज हो गई है।

इस मामले में पुलिस जांच और प्रशासनिक जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इमारत में अतिरिक्त निर्माण कब और कैसे हुआ, इसकी अनुमति किस स्तर तक थी और संबंधित विभागों की निगरानी में क्या चूक हुई।

सत्य निकेतन हादसा अब केवल एक इमारत गिरने की घटना नहीं रह गया है। FIR में सामने आए आरोपों ने अवैध निर्माण, किराए से होने वाली कमाई, भवन सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी—इन सभी मुद्दों को एक साथ जांच के केंद्र में ला दिया है। अंतिम जिम्मेदारी जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगी।

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