चेन्नई, 8 सितंबर 2026। दलीप ट्रॉफी के इतिहास में 35 साल बाद एक बार फिर फाइनल मुकाबले के दौरान मैदान का माहौल गरमाता नजर आया। चेन्नई के एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम में खेले गए 2026 के फाइनल में ईस्ट जोन के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी और साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा के बीच मैदान पर तीखी बातचीत ने क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान खींचा। इस घटना ने 1991 के उस चर्चित दलीप ट्रॉफी फाइनल की याद दिला दी, जब राशिद पटेल और रमण लांबा के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि स्टंप तक हथियार बन गया था।
चेपॉक में पहले बल्ले से बोला वैभव का जलवा
6 सितंबर को चेन्नई के चेपॉक में ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच दलीप ट्रॉफी का फाइनल शुरू हुआ। मुकाबले में सबसे ज्यादा निगाहें 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी पर थीं। कम उम्र के बावजूद वैभव ने बड़े मंच पर बेखौफ अंदाज दिखाया।
ईस्ट जोन की पारी के दौरान उनका सामना भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज से हुआ। वैभव ने सिराज के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए एक ओवर में चौका, छक्का और चौका जड़ दिया। उनकी बल्लेबाजी ने शुरुआत में ही मुकाबले का रोमांच बढ़ा दिया।
वैभव ने इस पारी में 37 गेंदों पर 44 रन बनाए। उनकी पारी में पांच चौके और एक छक्का शामिल रहा।
फिर तिलक वर्मा से हुआ आमना-सामना
वैभव की आक्रामक बल्लेबाजी के बीच साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा उनके करीब पहुंचे। दोनों के बीच बातचीत हुई और कैमरों ने इस पूरे घटनाक्रम को कैद कर लिया।
शुरुआत में इस बातचीत को मैदान की सामान्य स्लेजिंग या हल्की-फुल्की नोकझोंक के तौर पर देखा गया। हालांकि कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि बातचीत आगे बढ़ने पर माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया।
कुछ वीडियो रिपोर्टों के मुताबिक, तिलक वैभव की ओर बढ़े और ऐसा इशारा किया जिसे मुक्का मारने की मुद्रा के तौर पर देखा गया। इसके बाद दोनों खिलाड़ियों के बीच दूरी कम हुई और अंपायर को हस्तक्षेप कर दोनों को अलग करना पड़ा।
हालांकि, इस घटना को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग व्याख्या सामने आई है। स्टार स्पोर्ट्स की ओर से साझा किए गए वीडियो को हल्की-फुल्की मैदान की बातचीत/बैंटर के रूप में भी पेश किया गया था। इसलिए इसे किसी गंभीर मारपीट की घटना के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा।
35 साल पहले दलीप ट्रॉफी फाइनल में हुआ था बड़ा विवाद
इस पूरे घटनाक्रम ने 1991 के दलीप ट्रॉफी फाइनल की याद ताजा कर दी। 25 से 29 जनवरी 1991 के बीच जमशेदपुर के कीनन स्टेडियम में नॉर्थ जोन और वेस्ट जोन के बीच फाइनल खेला गया था।
उस मुकाबले में नॉर्थ जोन की कप्तानी कपिल देव कर रहे थे, जबकि वेस्ट जोन की कमान रवि शास्त्री के हाथों में थी। नॉर्थ जोन ने पहली पारी में 729/9 रन बनाकर पारी घोषित की थी, जबकि वेस्ट जोन की टीम 561 रन पर ऑलआउट हो गई थी।
बीमर के बाद बिगड़ा था मामला
फाइनल के आखिरी दिन नॉर्थ जोन की दूसरी पारी चल रही थी। रमण लांबा और अजय जडेजा बल्लेबाजी कर रहे थे। उस समय वेस्ट जोन के तेज गेंदबाज राशिद पटेल और रमण लांबा के बीच तनाव बढ़ गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, पटेल ने लांबा की ओर बीमर गेंद फेंकी, जिससे उनका सिर बाल-बाल बचा। इसके बाद मामला इतना बिगड़ा कि राशिद पटेल ने स्टंप उखाड़ लिया और लांबा की ओर दौड़ पड़े।
घटना के बाद दर्शकों में भी तनाव फैल गया और पत्थरबाजी की स्थिति बन गई। बाउंड्री के पास फील्डिंग कर रहे विनोद कांबली को भी चोट लगी। खिलाड़ियों को पवेलियन में जाना पड़ा और विजेता कप्तान को वहीं ट्रॉफी प्रदान की गई।
दोनों खिलाड़ियों पर लगा था प्रतिबंध
1991 के उस विवाद के बाद राशिद पटेल पर 13 महीने का प्रतिबंध लगाया गया था। रमण लांबा को भी 10 महीने के लिए प्रतिबंधित किया गया था। इस घटना को भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे चर्चित विवादों में गिना जाता है।
2026 में बदला दौर, लेकिन मुकाबले की गर्मी कायम
2026 के चेन्नई फाइनल की घटना 1991 के विवाद जितनी गंभीर नहीं थी। यहां मामला कुछ देर की मैदान पर हुई नोकझोंक और बैंटर तक सीमित रहा तथा अंपायर ने समय रहते दोनों खिलाड़ियों को अलग कर दिया।
फिर भी, दोनों घटनाओं के बीच एक समानता जरूर नजर आई—दलीप ट्रॉफी फाइनल जैसे बड़े घरेलू मुकाबले में जीत की तीव्र प्रतिस्पर्धा के बीच खिलाड़ियों का भावनात्मक रूप से प्रतिक्रिया देना।
एक ओर 1991 में मामला बेहद गंभीर रूप ले गया था, वहीं 2026 में वैभव सूर्यवंशी और तिलक वर्मा की बातचीत कुछ ही देर में शांत हो गई। यही वजह है कि 35 साल बाद दलीप ट्रॉफी के फाइनल में मैदान पर हुई इस गरमागरमी ने पुराने विवाद की याद जरूर दिलाई, लेकिन दोनों घटनाओं को समान स्तर का विवाद मानना उचित नहीं होगा।
वैभव के लिए बड़ा अनुभव
महज 15 साल की उम्र में दलीप ट्रॉफी के फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में खेलना वैभव सूर्यवंशी के करियर के लिए महत्वपूर्ण अनुभव है। उन्होंने शुरुआत में सिराज जैसे अनुभवी गेंदबाज के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी की और अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
अब उनके लिए चुनौती केवल रन बनाने तक सीमित नहीं है। जैसे-जैसे उनका नाम और लोकप्रियता बढ़ रही है, वैसे-वैसे बड़े मुकाबलों का दबाव भी बढ़ेगा। ऐसे में मैदान पर प्रदर्शन के साथ संयम बनाए रखना भी उनके क्रिकेट सफर का अहम हिस्सा होगा।
दलीप ट्रॉफी के 2026 फाइनल की यह घटना इसलिए चर्चा में है क्योंकि इसने क्रिकेट के दो अलग-अलग दौरों को एक साथ जोड़ दिया—1991 का वह फाइनल, जिसमें स्टंप हथियार बन गया था, और 2026 का चेन्नई फाइनल, जहां युवा वैभव और तिलक के बीच कुछ पल की गर्मागर्मी ने 35 साल पुरानी कहानी फिर याद दिला दी।
