परिवर्तिनी एकादशी पर श्रीहरि की विशेष पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, व्रत विधि और पारण का समय

नई दिल्ली, 22 सितंबर 2026। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इसे पद्मा एकादशी, पार्श्व एकादशी और वामन एकादशी भी कहा जाता है। इस वर्ष परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर, मंगलवार को रखा जा रहा है। एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात करीब 8 बजे शुरू हुई और 22 सितंबर की रात करीब 9:43 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर आज व्रत रखा जा रहा है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में रहते हैं और परिवर्तिनी एकादशी के दिन करवट बदलते हैं। इसी कारण इस एकादशी को परिवर्तिनी यानी करवट बदलने वाली एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

आज किस समय करें भगवान विष्णु की पूजा?

22 सितंबर को भगवान विष्णु की पूजा के लिए सुबह 6:10 बजे से 9:12 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक रहेगा। दोपहर में भी करीब 11:30 बजे से 1:30 बजे के बीच पूजा की जा सकती है।

कुछ पंचांग गणनाओं में अभिजीत पूजा का समय थोड़ा अलग दिया गया है। इसलिए पूजा करते समय अपने स्थानीय शहर के पंचांग को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।

परिवर्तिनी एकादशी की पूजा विधि

परिवर्तिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान की सफाई कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं।

पूजा में भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, चंदन, पीले वस्त्र, पंचामृत, फल और मिठाई अर्पित किए जा सकते हैं। भगवान के वामन स्वरूप का ध्यान करते हुए पूजा और व्रत का संकल्प लें।

पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इसके साथ विष्णु सहस्रनाम का पाठ और परिवर्तिनी एकादशी की व्रत कथा का श्रवण या पाठ भी किया जा सकता है। शाम के समय भगवान विष्णु की आरती करें और तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं।

व्रत में किन बातों का रखें ध्यान?

एकादशी व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार निर्जल, जलाहार या फलाहार व्रत रख सकते हैं। भोजन करने वाले लोग सामान्यतः सात्विक और फलाहारी आहार को प्राथमिकता देते हैं।

इस दिन भगवान विष्णु की आराधना, नाम-जप और धार्मिक पाठ पर विशेष ध्यान देने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में इस व्रत को सुख-समृद्धि, शांति और आध्यात्मिक कल्याण से जोड़ा गया है।

23 सितंबर को होगा व्रत का पारण

परिवर्तिनी एकादशी का व्रत अगले दिन यानी 23 सितंबर 2026, बुधवार को खोला जाएगा। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार पारण का समय सुबह 6:10 बजे से 8:35 बजे तक बताया गया है। पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है।

व्रत खोलते समय पहले भगवान विष्णु का स्मरण और पूजा करके फिर भोजन या निर्धारित आहार ग्रहण करने की परंपरा है। जिन लोगों के लिए स्वास्थ्य या अन्य कारणों से कठोर उपवास संभव नहीं है, वे अपनी स्थिति के अनुसार व्रत की विधि अपनाएं।

भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की होती है आराधना

परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु से सुख, शांति, समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं।

इस वर्ष यह एकादशी गणेश उत्सव के दौरान पड़ रही है। धार्मिक परंपराओं में इस अवसर पर भगवान विष्णु के साथ भगवान गणेश की पूजा को भी शुभ माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियम के साथ करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। हालांकि पूजा-व्रत से जुड़े फल और धार्मिक मान्यताएं आस्था एवं परंपरा पर आधारित हैं।

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