नई दिल्ली | 6 अगस्त, 2026
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने टीम इंडिया के खिलाड़ियों की बढ़ती इंजरी, मैदान पर घटती चुस्ती और गिरते फिटनेस स्तर पर सख्त रुख अपनाते हुए फिटनेस के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) और बोर्ड की मेडिकल टीम ने फिटनेस के नए और कड़े मानक तय किए हैं। इसके तहत अब खिलाड़ियों को फिटनेस टेस्ट पूरा करने के लिए पहले से 40 सेकंड कम यानी महज 5 मिनट 20 सेकंड का समय दिया गया है।
1. ब्रोन्को टेस्ट बना नया पैमाना, यो-यो टेस्ट पीछे छूटा
भारतीय क्रिकेट में लंबे समय तक खिलाड़ियों की फिटनेस मापने के लिए ‘यो-यो टेस्ट’ का इस्तेमाल किया जाता था, जिसके लिए 16.5 का स्कोर पार करना अनिवार्य होता था। लेकिन अब बोर्ड ने आधुनिक और अधिक चुनौतीपूर्ण ‘ब्रोन्को टेस्ट’ (Bronco Test) को प्राथमिक फिटनेस टेस्ट के रूप में अनिवार्य कर दिया है।
- इस नए कड़े नियम के तहत खिलाड़ियों को बिना रुके तय टफ ड्रिल्स और दौड़ की प्रक्रिया को 5 मिनट 15 सेकंड से लेकर 5 मिनट 20 सेकंड (यानी अधिकतम 320 सेकंड) के भीतर पूरी करनी होगी।
- इसके अलावा, खिलाड़ियों के लिए 2 किलोमीटर की दौड़ (2K रन) का दायरा भी 9 से 10 मिनट के बीच तय किया गया है।
2. खिलाड़ियों की लगातार चोटों और फिटनेस से समझौता न करने की चेतावनी
हाल के महीनों में कई प्रमुख खिलाड़ियों के बार-बार चोटिल होने और विदेशी दौरों के दौरान मांसपेशियों में खिंचाव (क्रैम्प्स) की समस्याओं ने टीम मैनेजमेंट की चिंता बढ़ा दी थी।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ समय से कुछ मामलों में फिटनेस के तय मानकों में नरमी बरते जाने और खिलाड़ियों को आसान छूट मिलने की शिकायतें सामने आई थीं।
- इसे गंभीरता से लेते हुए बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियों और टीम प्रबंधन ने मेडिकल स्टाफ और फिजियो से कड़ा जवाब-तलब किया है। बोर्ड ने साफ निर्देश दिए हैं कि खिलाड़ी के कद या उसके ‘स्टार स्टेटस’ की परवाह किए बिना केवल पूरी तरह फिट खिलाड़ियों को ही अंतिम ग्यारह या दौरे के लिए हरी झंडी दी जाएगी।
3. खिलाड़ियों की घटी मोबिलिटी और मैदान पर संघर्ष बना वजह
बीसीसीआई और टीम मैनेजमेंट का मानना है कि आधुनिक क्रिकेट के व्यस्त शेड्यूल के बीच कई सीनियर खिलाड़ियों की मैदान पर मूवमेंट और रनिंग के दौरान फुर्ती में गिरावट आई है। लंबे समय तक क्रीज पर टिकने के बाद सिंगल्स-डबल्स तेजी से चुराने में आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए ही फिटनेस के इन पैमानों को अत्यधिक सख्त किया गया है।
नए और कड़े फिटनेस प्रोटोकॉल लागू होने से अब भारतीय क्रिकेटरों के लिए टीम में अपनी जगह बरकरार रखना और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है, जिससे आने वाले समय में खिलाड़ियों के अनुशासन और शारीरिक दक्षता में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।
