छात्राओं के विरोध के आगे बदला प्रशासन का फैसला, CM मोहन यादव के हस्तक्षेप से उज्जैन का सराफा स्कूल पुराने भवन में रहेगा

उज्जैन | 19 अगस्त 2026

मध्य प्रदेश के उज्जैन में छात्राओं के विरोध के बाद प्रशासन को शासकीय सराफा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का फैसला वापस लेना पड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हस्तक्षेप के बाद अब यह तय किया गया है कि वैकल्पिक व्यवस्था होने तक स्कूल अपने मौजूदा भवन में ही संचालित होगा। इससे स्कूल की छात्राओं और उनके अभिभावकों ने राहत की सांस ली है।

यह पूरा मामला तब चर्चा में आया जब स्कूल को उज्जैन के दाऊदखेड़ी स्थित सांदीपनि विद्यालय में मर्ज करने की योजना सामने आई। छात्राओं ने इस फैसले का जोरदार विरोध किया और अपनी पढ़ाई, आने-जाने तथा सुरक्षा से जुड़ी परेशानियां प्रशासन के सामने रखीं।

14 अगस्त को छात्राओं ने किया था जोरदार प्रदर्शन

स्कूल शिफ्टिंग के फैसले के खिलाफ छात्राओं ने 14 अगस्त 2026 को विरोध प्रदर्शन किया था। Gen-Z और Gen-Alpha की छात्राओं ने अपनी मांग को लेकर उज्जैन कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया।

प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने साफ तौर पर कहा कि उनका स्कूल मौजूदा स्थान पर ही संचालित किया जाना चाहिए। छात्राओं की सबसे बड़ी चिंता नए स्थान की दूरी और वहां आने-जाने को लेकर थी। इसके अलावा उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए।

प्रदर्शन के दौरान कई छात्राएं भावुक भी हो गईं। छात्राओं की मांग थी कि प्रशासन केवल मौखिक आश्वासन न दे, बल्कि स्कूल को मौजूदा स्थान पर बनाए रखने को लेकर स्पष्ट निर्णय लिया जाए।

महाकाल मंदिर के पीछे है सराफा स्कूल

शासकीय सराफा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उज्जैन के पुराने और महत्वपूर्ण स्कूलों में माना जाता है। यह स्कूल महाकाल मंदिर के पीछे संचालित होता है।

प्रशासन की ओर से स्कूल को दाऊदखेड़ी स्थित सांदीपनि विद्यालय में मर्ज करने का प्रस्ताव सामने आया था। इसी प्रस्ताव को लेकर छात्राओं और उनके अभिभावकों में नाराजगी पैदा हुई।

छात्राओं का तर्क था कि नए स्थान पर स्कूल जाने के लिए उन्हें अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे खासकर छात्राओं के लिए रोजाना आवागमन मुश्किल हो सकता है।

दूरी और सुरक्षा बनी सबसे बड़ी वजह

छात्राओं ने प्रशासन के सामने केवल स्कूल की दूरी का मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि सुरक्षा को भी अपनी प्रमुख चिंता बताया।

उनका कहना था कि मौजूदा स्कूल उनके लिए सुविधाजनक स्थान पर है, जबकि दाऊदखेड़ी जाने पर उन्हें लंबा सफर करना पड़ेगा। इससे रोज स्कूल पहुंचने में समय और परिवहन दोनों की समस्या बढ़ सकती है।

छात्राओं ने यह भी चिंता जताई कि आने-जाने की व्यवस्था उनके परिवारों के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकती है।

यही वजह रही कि छात्राओं ने स्कूल शिफ्टिंग के फैसले का विरोध करने का फैसला किया।

CM मोहन यादव तक पहुंचा मामला

छात्राओं के प्रदर्शन के बाद यह मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचा।

मुख्यमंत्री ने छात्राओं की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि जब तक कोई उचित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होती, तब तक छात्राओं की पढ़ाई सराफा स्कूल के वर्तमान भवन में ही जारी रखी जाए।

मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन की ओर से छात्राओं को स्पष्ट आश्वासन दिया गया कि फिलहाल उन्हें पुराने भवन से हटाया नहीं जाएगा।

सांसद, विधायक और कलेक्टर स्कूल पहुंचे

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद मंगलवार को उज्जैन के जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्कूल पहुंचकर छात्राओं से सीधे बातचीत की।

इस दौरान उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया, नगर निगम अध्यक्ष कलावती यादव, स्थानीय विधायक अनिल जैन और उज्जैन के कलेक्टर रौशन कुमार सिंह छात्राओं के बीच पहुंचे।

अधिकारियों ने छात्राओं की समस्याएं सुनीं और उनके सवालों का जवाब दिया।

यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि इससे छात्राओं को सीधे प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखने का मौका मिला।

कलेक्टर ने दिया स्पष्ट आश्वासन

कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि वैकल्पिक व्यवस्था होने तक उन्हें वर्तमान सराफा विद्यालय भवन में ही पढ़ाई करने दी जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार छात्राओं की शिक्षा, सुरक्षा और सुविधाजनक आवागमन को लेकर प्रतिबद्ध है।

प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि छात्राओं की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

छात्राओं में खुशी की लहर

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मिले आश्वासन के बाद छात्राओं के बीच खुशी का माहौल देखने को मिला।

जिन छात्राओं ने कुछ दिन पहले स्कूल शिफ्टिंग के खिलाफ प्रदर्शन किया था, उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताया।

छात्राओं का कहना था कि उनकी व्यावहारिक परेशानियों को समझते हुए लिया गया यह फैसला उनके साथ-साथ उनके अभिभावकों के लिए भी बड़ी राहत है।

Gen-Z और Gen-Alpha छात्राओं का प्रदर्शन बना चर्चा का विषय

इस पूरे मामले में सबसे खास बात छात्राओं का संगठित विरोध रहा।

नई पीढ़ी की छात्राओं ने सोशल मीडिया और अपने स्तर पर मुद्दे को उठाने के साथ-साथ सीधे प्रशासन के सामने अपनी बात रखी। उनका विरोध केवल भावनात्मक नहीं था, बल्कि उन्होंने स्कूल की दूरी, परिवहन और सुरक्षा जैसे व्यावहारिक मुद्दों को सामने रखा।

इसी वजह से इस घटना को नई पीढ़ी के छात्रों की बढ़ती जागरूकता और अपनी शिक्षा से जुड़े फैसलों में भागीदारी के उदाहरण के तौर पर भी देखा जा रहा है।

आखिर स्कूल शिफ्ट करने की जरूरत क्यों पड़ी थी?

स्कूल को दूसरी जगह स्थानांतरित करने या सांदीपनि विद्यालय में मर्ज करने की योजना प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी थी। हालांकि उपलब्ध रिपोर्ट में स्कूल को शिफ्ट करने की विस्तृत प्रशासनिक वजहों का पूरा ब्योरा सामने नहीं आया है।

लेकिन छात्राओं की आपत्ति का मुख्य आधार यह था कि प्रस्तावित नया स्थान उनके लिए सुविधाजनक नहीं था।

छात्राओं ने प्रशासन से आग्रह किया कि कोई भी फैसला लेते समय स्कूल आने वाली छात्राओं की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए।

फिलहाल पुरानी जगह पर ही जारी रहेगी पढ़ाई

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद फिलहाल स्थिति साफ है कि छात्राओं को तुरंत पुराने स्कूल भवन से हटाया नहीं जाएगा।

जब तक कोई उचित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनती, सराफा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अपने वर्तमान भवन में ही संचालित होगा।

इससे छात्राओं को तत्काल राहत मिली है।

हालांकि भविष्य में स्कूल के लिए क्या स्थायी व्यवस्था होगी, इस पर प्रशासन को आगे फैसला लेना होगा।

अभिभावकों के लिए भी राहत

स्कूल शिफ्टिंग का मुद्दा केवल छात्राओं तक सीमित नहीं था। अभिभावकों के लिए भी नए स्थान तक बच्चों को भेजना चिंता का विषय था।

दूरी बढ़ने पर परिवहन की व्यवस्था, आने-जाने का खर्च और छात्राओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे परिवारों के लिए महत्वपूर्ण हो जाते।

ऐसे में मौजूदा स्कूल भवन में पढ़ाई जारी रखने के फैसले से अभिभावकों को भी तत्काल राहत मिली है।

प्रशासन और छात्रों के बीच संवाद का उदाहरण

उज्जैन का यह मामला इस बात का उदाहरण भी बन गया कि छात्र अगर अपनी समस्याओं को संगठित और शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन के सामने रखते हैं तो उनसे सीधे संवाद करके समाधान निकाला जा सकता है।

इस मामले में छात्राओं ने पहले विरोध दर्ज कराया, उसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने उनके बीच पहुंचकर उनकी बात सुनी।

मुख्यमंत्री के स्तर पर हस्तक्षेप के बाद तत्काल राहत देने वाला फैसला लिया गया।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल छात्राओं की पढ़ाई पुराने भवन में जारी रहेगी। लेकिन स्कूल की स्थायी व्यवस्था को लेकर आगे प्रशासन को निर्णय लेना होगा।

यदि स्कूल को भविष्य में किसी दूसरी जगह स्थानांतरित करने की योजना बनाई जाती है तो छात्राओं और अभिभावकों की सुरक्षा, दूरी, परिवहन और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा।

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