स्थान: उज्जैन (महाकाल नगरी)
日付: 7 जुलाई, 2026
धार्मिक संवाददाता, उज्जैन:
सनातन धर्मावलंबियों और ज्योतिष प्रेमियों के लिए जुलाई का यह महीना आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद असाधारण और महत्वपूर्ण होने जा रहा है। पंचांगीय गणनाओं के अनुसार, आगामी 25 जुलाई, 2026 (देवशयनी एकादशी) से भगवान श्रीहरि विष्णु चार महीनों के लिए योगनिद्रा में चले जाएंगे, जिसके साथ ही चातुर्मास का प्रारंभ होगा और विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत तथा गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह रोक लग जाएगी।
हालांकि, मांगलिक कार्यों पर विराम लगने से ठीक पहले साधना और खरीदारी के लिए एक बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस बार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि (15 जुलाई से 23 जुलाई) पूरे 12 वर्षों के बाद गुरु और चंद्रमा की युति से बनने वाले ‘गजकेसरी योग’ में आ रही है। इसके साथ ही, तंत्र-मंत्र साधना के इस महापर्व के दौरान ‘बुध-पुष्य नक्षत्र’ का महासंयोग भी रहेगा, जो निवेश और खरीदारी के लिए सर्वसिद्धिदायक माना जा रहा है।
25 जुलाई से देवशयन: 21 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर जागेंगे हरि
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी 25 जुलाई से चार महीने के व्रत-नियम और साधना का काल ‘चातुर्मास’ शुरू हो जाएगा।
- योगनिद्रा का काल: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों में सृष्टि के पालनकर्ता क्षीर सागर में शयन करते हैं और ब्रह्मांड का संचालन भगवान शिव के हाथों में आ जाता है। शुभ शक्तियों के शयन के कारण इस अवधि में विवाह जैसे संस्कार वर्जित माने जाते हैं।
- बृहस्पति वार्धक्य का प्रभाव: काशी के ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यद्यपि चातुर्मास 25 जुलाई से लग रहा है, लेकिन विवाह के अंतिम मुहूर्त केवल 12 जुलाई तक ही हैं। इसके बाद गुरु (बृहस्पति) के वार्धक्य दोष (वृद्धावस्था) के प्रभाव के कारण मुहूर्त उपलब्ध नहीं हैं। अब शहनाइयों की गूंज सीधे 21 नवंबर, 2026 को देवउठनी एकादशी के बाद ही सुनाई देगी।
12 साल बाद गुप्त नवरात्रि में ‘गजकेसरी’ और ‘बुध-पुष्य’ का महायोग
मांगलिक कार्य बंद होने से पहले का समय तंत्र-मंत्र, आध्यात्मिक चेतना को जाग्रत करने और भौतिक समृद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
साधना और समृद्धि का अनोखा तालमेल:
इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 15 जुलाई को घटस्थापना के साथ होगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस दौरान देवगुरु बृहस्पति और चंद्रमा की विशेष स्थिति से ‘गजकेसरी राजयोग’ का निर्माण हो रहा है, जो 12 वर्षों बाद इस नवरात्रि में दिखाई देगा। यह योग मान-सम्मान, ज्ञान और आर्थिक सुदृढ़ता देने वाला है। इसके अतिरिक्त, इसी अवधि में बुध ग्रह का पुष्य नक्षत्र में गोचर होने से ‘बुध-पुष्य संयोग’ बनेगा। व्यापार, नए निवेश, सोना-चांदी, जमीन या वाहन की खरीदारी के लिए यह समय अक्षय फल देने वाला साबित होगा।
चातुर्मास 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां और धार्मिक नियम
| प्रमुख पर्व और तिथि | दिनांक (वर्ष 2026) | धार्मिक महत्व और नियम |
| आषाढ़ गुप्त नवरात्रि | 15 जुलाई से 23 जुलाई | 10 महाविद्याओं की गुप्त तंत्र साधना, आंतरिक शुद्धिकरण का समय। |
| देवशयनी एकादशी (चातुर्मास आरंभ) | 25 जुलाई (शुक्रवार) | भगवान विष्णु का शयन, मांगलिक कार्यों पर पूर्ण विराम। संतों का चातुर्मास व्रत शुरू। |
| देवउठनी एकादशी (चातुर्मास समाप्त) | 21 नवंबर (शनिवार) | श्रीहरि का जागरण, तुलसी विवाह और पुनः शुभ कार्यों की शुरुआत। |
धर्माचार्यों के अनुसार, चातुर्मास की यह चार महीने की अवधि भौतिक विलासिता से दूर रहकर सात्विक जीवन शैली अपनाने, मौन रहने, दान करने और आध्यात्मिक ग्रंथों (जैसे श्रीमद्भागवत, विष्णु सहस्रनाम) के पठन-पाठन के लिए सर्वश्रेष्ठ है। इस दौरान किए गए जप और तप का फल अनंत गुना होकर प्राप्त होता है।
गुप्त नवरात्रि के घटस्थापना के शुभ मुहूर्त की विस्तृत सारणी, राशि अनुसार किए जाने वाले मंत्र अनुष्ठान और चातुर्मास व्रत के नियमों की विस्तृत रिपोर्ट के लिए हमारी वेबसाइट के ‘अध्यात्म & ज्योतिष दर्शन’ पेज को लगातार फॉलो करते रहें।
