स्थान: तेहरान
दिनांक: 6 जुलाई, 2026
अंतरराष्ट्रीय डेस्क:
ईरान में इस समय 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद का सबसे बड़ा और अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा हुआ है। फरवरी 2026 में अमेरिकी-इजराइली हवाई हमले में मारे गए ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की छह दिवसीय राजकीय शवयात्रा (State Funeral) सोमवार को अपने चरम पर पहुंच गई। तेहरान की सड़कों पर काले कपड़ों में उमड़े जनसैलाब को नियंत्रित करने के लिए इस बार प्रशासन ने कंक्रीट की विशाल दीवारें खड़ी की हैं।
इस महा-शोकसभा के बीच दुनिया भर के इतिहासकारों और सुरक्षा एजेंसियों को साल 1989 का वह खौफनाक और अकल्पनीय दृश्य याद आ गया है, जब ईरान ने अपने पहले सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह रूहोल्लाह खुमैनी को विदाई दी थी। उस समय बेकाबू भीड़ के चलते खुमैनी का शव ताबूत से नीचे गिर गया था और कफन के चीथड़े उड़ गए थे।
साल 1989 का वो खौफनाक मंजर: जब हेलिकॉप्टर से उठाना पड़ा था शव
3 जून 1989 को जब आधुनिक ईरान के निर्माता इमाम रूहोल्लाह खुमैनी का निधन हुआ, तो तेहरान की सड़कों पर 1 करोड़ से अधिक लोग (उस समय की ईरान की कुल आबादी का छठा हिस्सा) उतर आए थे। वह गिनीज बुक में दर्ज इतिहास के सबसे बड़े जनाजों में से एक था।
- कांच का केबिन तोड़ दिया: खुमैनी के पार्थिव शरीर को पहले एक वातानुकूलित कांच के केबिन में रखा गया था, लेकिन भावुक और उन्मादित भीड़ ने सुरक्षा घेरा तोड़कर कांच को चकनाचूर कर दिया।
- कफन फाड़ने लगी भीड़: जब शव को लकड़ी के ताबूत में रखकर दफनाने के लिए ले जाया जा रहा था, तब लाखों लोगों ने ताबूत को घेर लिया। शिया मान्यता के अनुसार पवित्र संत के कफन के टुकड़े को ‘तबर्रुक’ (Holy Relic या दिव्य प्रसाद) माना जाता है। भीड़ कफन के कपड़े को नोचने और फाड़ने लगी।
- नीचे गिरा पार्थिव शरीर: इसी छीना-झपटी में संतुलन बिगड़ गया और खुमैनी का पार्थिव शरीर ताबूत से बाहर धूल भरी जमीन पर गिर गया। उनके पैर खुले रह गए और उनके बेटे अहमद खुमैनी भीड़ के रेले में गिरकर बेहोश हो गए। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को हवा में गोलियां चलानी पड़ीं। आखिरकार, एक सैन्य हेलीकॉप्टर को जमीन पर उतारकर शव को हवा में लिफ्ट किया गया और कई घंटों बाद लोहे के मजबूत बक्से में बंद करके दोबारा दफनाने की रस्म पूरी की गई।
वर्तमान स्थिति (2026): खामेनेई के जनाजे के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम
1989 की उस ऐतिहासिक भूल और अव्यवस्था से सबक लेते हुए, इस बार तेहरान के ग्रैंड मुसल्ला (Mosalla Complex) में कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू हैं:
कंक्रीट बैरिकेडिंग और नो-गो ज़ोन:
इस बार जनता और खामेनेई के ध्वज से लिपटे ताबूत के बीच कई फीट ऊंची और चौड़ी कंक्रीट की दीवारें (Barriers) खड़ी की गई हैं, ताकि कोई भी श्रद्धालु भावुक होकर मंच की तरफ न कूद सके। इस बार खामेनेई के साथ उनके परिवार के चार अन्य सदस्यों के ताबूत भी रखे हैं, जो उसी हमले में मारे गए थे। खुफिया अनुमानों के अनुसार, पूरे 6 दिनों के भीतर इस आयोजन में लगभग 3 करोड़ (30 Million) शिया मुसलमानों के जुटने की संभावना है।
इनसाइड एनालिसिस: शिया मुसलमानों में मातम और सामूहिक विलाप इतना अहम क्यों?
इस्लाम के दो प्रमुख संप्रदायों (शिया और सुन्नी) में से शिया समुदाय में मृत्यु, शहादत और शोक प्रकट करने की एक बेहद अनूठी और गहरी ऐतिहासिक परंपरा है। इसके पीछे मुख्य रूप से तीन कारण हैं:
- कर्बला की विरासत और इमाम हुसैन की शहादत: शिया धर्मशास्त्र के केंद्र में सन 680 ईस्वी में इराक के कर्बला में पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की दर्दनाक शहादत है। शिया समुदाय सदियों से मुहर्रम के दौरान छाती पीटकर (मातम), जंजीरों से खुद को लहुलुहान करके उस ऐतिहासिक अन्याय का शोक मनाता है। उनके लिए सामूहिक विलाप केवल दुख का प्रदर्शन नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ एक धार्मिक कर्तव्य है।
- धार्मिक सर्वोच्चता (विलायत-ए-फकीह): शिया मान्यताओं में सर्वोच्च धार्मिक नेता (जैसे खुमैनी या खामेनेई) को धरती पर ‘इमाम’ का प्रतिनिधि माना जाता है। इसलिए उनकी मृत्यु पर होने वाला शोक किसी राजनीतिक नेता की मौत जैसा नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक के खोने का महा-शोक होता है।
- गिल्ट (पछतावा) और प्रतिशोध की भावना: शिया इतिहास में यह माना जाता है कि इतिहास में जब भी उनके इमामों पर जुल्म हुआ, तब तत्कालीन समाज उनकी रक्षा नहीं कर सका। यह सामूहिक पछतावा (Guilt) आज के दौर में नेताओं की विदाई के समय ‘अटूट निष्ठा’ और ‘दुश्मन से बदला लेने’ के आक्रामक संकल्प के रूप में बाहर आता है।
4 जुलाई से 9 जुलाई तक का महा-शेड्यूल और वर्तमान स्थिति
| तारीख और दिन | पड़ाव और स्थान | सुरक्षा और कूटनीतिक हलचल |
| 4-5 जुलाई | ग्रैंड मुसल्ला, तेहरान | लाखों लोगों ने कड़े सुरक्षा घेरे में अंतिम दर्शन किए; ‘डेथ टू अमेरिका-इजराइल’ के नारे गूंजे। |
| 6 जुलाई (आज) | तेहरान से मेहराबाद एयरपोर्ट | आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश। ताबूत को ट्रक पर रखकर पूरे तेहरान शहर में घुमाया जा रहा है। |
| 7 जुलाई (मंगलवार) | पवित्र शहर कुम (Qom) | शिया धर्मशास्त्र के सबसे बड़े केंद्र (मदरसों) में विशेष प्रार्थना सभा होगी। |
| 8-9 जुलाई | इराक (नजफ-कर्बला) और मशहद | शव को विशेष विमान से इराक के पवित्र तीर्थस्थलों के दर्शन कराकर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। |
इधर वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ‘एक सप्ताह की छुट्टी’ बताते हुए तंज कसा है, तो वहीं तेहरान की सड़कों पर प्रदर्शनकारी हाथों में ‘#KillTrump’ के बैनर लेकर घूम रहे हैं। ईरान के नए कार्यवाहक नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि 9 जुलाई को दफन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, देश का सुरक्षा तंत्र अपने सर्वोच्च नेता की शहादत का बदला लेने के लिए एक नई सैन्य रणनीति की घोषणा करेगा।
तेहरान के मेहराबाद एयरपोर्ट से आ रही लाइव फुटेज, इराक के नजफ शहर में शिया सुरक्षा बलों की तैनाती और मध्य पूर्व में चल रहे इस सबसे बड़े कूटनीतिक घटनाक्रम
