दिनांक: 19 जून, 2026
वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित हुए ऐतिहासिक शांति समझौते (MoU) को लेकर इजराइल के भीतर मचे घमासान और तीखी प्रतिक्रियाओं पर अमेरिका ने बेहद कड़ा और अप्रत्याशित रुख अपनाया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने इजराइली नेताओं और नेतन्याहू कैबिनेट के मंत्रियों को नसीहत देते हुए कहा है कि वे वास्तविकता को समझें और दुनिया में बचे अपने इकलौते सबसे शक्तिशाली दोस्त (अमेरिका) को खुद से अलग-थलग करने की भूल न करें।
‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ को दिए एक इंटरव्यू में उपराष्ट्रपति वेंस ने इजराइल की सैन्य रणनीति पर तीखा प्रहार किया और उसकी कम आबादी का हवाला देते हुए कड़ा संदेश दिया।
“सिर्फ हत्या या हमले से सुरक्षा समस्याओं का समाधान नहीं होता”
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान डील की आलोचना कर रहे इजराइल के दक्षिणपंथी मंत्रियों—राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर और वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच—का सीधे नाम लेते हुए उनसे पूछा कि उनके पास इस समस्या का आखिर क्या विकल्प है?
वेंस ने दोटूक लहजे में कहा:
“ईरान के साथ हुई इस डील को लेकर इजराइली व्यवस्था के भीतर एक अजीब सा डर और घबराहट (Freakout) है。 जो लोग इस समझौते को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं, उनसे मेरा एक सीधा सवाल है—आपके पास इस समस्या का सटीक प्रस्ताव (Proposal) क्या है? आप कुल 90 लाख (9 मिलियन) की आबादी वाले एक छोटे से देश हैं। आप केवल हत्याएं या हमले करके अपनी हर एक राष्ट्रीय सुरक्षा समस्या का समाधान नहीं खोज सकते। आपको कूटनीति का रास्ता अपनाना ही होगा।”
‘इजराइल की 66% सुरक्षा अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसों से’
व्हाइट हाउस में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान वेंस ने इजराइल को याद दिलाया कि वह अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह से वाशिंगटन पर निर्भर है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा:
- अमेरिकी हथियारों का पहरा: पिछले तीन महीनों के भीतर इजराइल की रक्षा करने वाले कुल हथियारों और डिफेंस सिस्टम में से दो-तिहाई (करीब 66 प्रतिशत) हिस्से का निर्माण अमेरिकी हाथों से हुआ है और इसका पूरा भुगतान अमेरिकी करदाताओं (Taxpayers) के पैसों से किया गया है।
- गलतफहमी से बाहर आएं: वेंस ने कहा कि इजराइल में जो कोई भी यह सोचता है कि उनकी सबसे बड़ी समस्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं, उन्हें नींद से जागना चाहिए और जमीनी हकीकत को सूंघना (पहचानना) चाहिए।
ईरान और लेबनान पर ट्रंप प्रशासन का बढ़ता दबाव
दरअसल, अमेरिका और इजराइल के रिश्तों में यह दरार तब से और गहरी हो गई है जब से 28 फरवरी को दोनों देशों ने मिलकर ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस जंग को लंबा खींचने के बजाय जल्द से जल्द खत्म करना चाहते थे और इसीलिए उन्होंने ईरान के साथ शांति समझौते को तरजीह दी।
हालांकि, बेंजामिन नेतन्याहू के कैबिनेट मंत्रियों ने इस डील को अमेरिका का ‘धोखा’ करार दिया था। ट्रंप ने भी हाल ही में लेबनान और बेरुत में इजराइल द्वारा किए जा रहे हवाई हमलों और आम नागरिकों की मौतों की कड़ी आलोचना की थी, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। उपराष्ट्रपति के इस ताजा बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका अब इजराइल की हर सैन्य जिद के आगे झुकने को तैयार नहीं है।
