मप्र में ट्रांसफर एक्सप्रेस: मंत्री के सरकारी बंगले पर चल रही ‘तबादला डील’; ऑनकैमरा बाबू बोला- ‘मंत्री जी के साइन बगैर नहीं होगा कुछ, SDO का 15 और नर्स का 5 लाख फिक्स’

दिनांक: 20 जून, 2026

विशेष संवाददाता, भोपाल:

मध्य प्रदेश में प्रशासनिक तबादलों पर लगी रोक हटने के बाद राजधानी भोपाल के ‘चार इमली’ और ‘श्यामला हिल्स’ स्थित मंत्रियों के सरकारी बंगले भ्रष्टाचार के नए केंद्र बन चुके हैं। सूबे के एक कद्दावर मंत्री के शासकीय बंगले से ऑन-कैमरा (स्टिंग ऑपरेशन) एक बेहद चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है, जिसने मंत्रालय (वल्लभ भवन) से लेकर सियासी गलियारों तक हड़कंप मचा दिया है।

इस वीडियो में मंत्री का खास स्टाफ (बाबू/ओएसडी का सहयोगी) ट्रांसफर चाहने वाले कर्मचारियों से खुलेआम रुपयों की सौदेबाजी करता दिख रहा है। बाबू ने कैमरे पर साफ कहा कि जल संसाधन या लोक निर्माण विभाग के एसडीओ (SDO) के तबादले का रेट 15 लाख और स्वास्थ्य विभाग में नर्स के गृह जिला ट्रांसफर का रेट 5 लाख रुपये फिक्स है।

स्टिंग ऑपरेशन में हुआ खुलासा: ‘बिना नोट, नो पोस्टिंग’

सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस खुफिया वीडियो में एक पीड़ित कर्मचारी अपनी बीमार मां का हवाला देकर गृह जिले में ट्रांसफर की गुहार लगाता दिख रहा है। इस पर बंगले के केबिन में बैठा बाबू फाइलों को पलटते हुए बेहद बेरुखी से कहता है:

“देखो भाई, यहाँ भावुकता से काम नहीं चलता। फाइल सीधे मंत्री जी की टेबल पर जाती है। मंत्री जी के दस्तखत (साइन) के बगैर एक पत्ता भी नहीं हिलता। ऊपर भी हिस्सा भेजना पड़ता है। अगर एसडीओ (SDO) रैंक का मामला है, तो 15 लाख से एक रुपया कम नहीं होगा। और अगर तुम्हारी कोई जान-पहचान वाली नर्स है, तो उसका रेट 5 लाख फिक्स है। आधा एडवांस टेबल पर रखो, लिस्ट में नाम अगले मंगलवार को आ जाएगा।”

वीडियो में मेज के दराज में नोटों की गड्डियां और कुछ दलालों की मौजूदगी भी साफ नजर आ रही है, जो अधिकारियों के ट्रांसफर के लिए बकायदा ‘वेटिंग लिस्ट’ और ‘रेट कार्ड’ तैयार करके बैठे हैं।

कर्मचारी संगठनों में आक्रोश: “प्रतिभा नहीं, पैसों से मिल रही मनचाही पोस्टिंग”

यह वीडियो सामने आने के बाद मध्य प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि पूरे प्रदेश में इस वक्त तबादला उद्योग चल रहा है। जो ईमानदार कर्मचारी गंभीर रूप से बीमार हैं या पारिवारिक कारणों से परेशान हैं, उनकी अर्जियां रद्दी की टोकरी में फेंकी जा रही हैं। वहीं, जो अधिकारी मोटी रकम दे रहे हैं, उन्हें मलाईदार जिलों में मनचाही पोस्टिंग से नवाजा जा रहा है।

विपक्ष हमलावर, सीएम मोहन यादव ने दिए जांच के आदेश

इस मामले ने तूल पकड़ते ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष ने भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा:

  • मंत्रिमंडल बर्खास्त करने की मांग: कांग्रेस ने मांग की है कि जिस भी मंत्री के बंगले का यह वीडियो है, उसे तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाए और संबंधित कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PCA) के तहत एफआईआर दर्ज हो।
  • पैसे दो, मनचाहा जिला लो: विपक्ष ने आरोप लगाया कि सूबे में योग्यता की कोई कद्र नहीं है, मंत्रियों के बंगले पर खुलेआम बोलियां लग रही हैं।

मुख्यमंत्री सचिवालय की त्वरित कार्रवाई:

विवाद बढ़ता देख मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले का कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के सूत्रों के मुताबिक, मुख्य सचिव (Chief Secretary) को तत्काल इस वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराने और वीडियो में दिख रहे कर्मचारी को तुरंत सस्पेंड (निलंबित) करने के निर्देश दिए गए हैं। सीएम ने दोटूक कहा है कि ट्रांसफर प्रक्रिया में किसी भी तरह का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे दोषी कितना भी रसूखदार क्यों न हो।

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