वैश्विक कूटनीति का महामंच: G7 समिट के लिए फ्रांस पहुंचे ट्रम्प और मेलोनी; पीएम मोदी आज ब्रातिस्लावा से होंगे रवाना; अमेरिका-ईरान समझौते पर मैक्रों का बड़ा बयान

दिनांक: 16 जून, 2026

एवियन-ले-बाँ (फ्रांस): दुनिया के सबसे ताकतवर और विकसित देशों के संगठन G7 (ग्रुप ऑफ सेवन) शिखर सम्मेलन का औपचारिक शंखनाद फ्रांस के खूबसूरत रिसॉर्ट शहर एवियन-ले-बाँ में हो चुका है। तीन दिवसीय (15-17 जून) इस महामंच में हिस्सा लेने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी सोमवार को ही फ्रांस पहुंच चुके हैं।

वहीं, स्लोवाकिया के अपने ऐतिहासिक द्विपक्षीय दौरे को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आज (16 जून) फ्रांस के एवियन पहुंच रहे हैं। भारत इस संगठन का आधिकारिक सदस्य नहीं है, लेकिन मेजबान देश फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के विशेष आमंत्रण पर पीएम मोदी आउटरीच सत्रों (Outreach Sessions) में विशेष अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

राष्ट्रपति मैक्रों का बड़ा बयान: “अमेरिका-ईरान शांति समझौता विश्व शांति की दिशा में ऐतिहासिक कदम”

समिट के शुरुआती सत्रों के बीच मेजबान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हाल ही में घोषित हुए अमेरिका-ईरान शांति समझौते का पुरजोर स्वागत किया। दोनों देशों के बीच महीनों से जारी सैन्य तनाव और होर्मुझ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी संकट के बीच हुए इस समझौते को मैक्रों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘संजीवनी’ बताया।

राष्ट्रपति मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर लिखा और प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोहराया:

“मैं अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस ऐतिहासिक शांति समझौते का स्वागत करता हूँ, जो कई अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के कड़े राजनयिक प्रयासों का नतीजा है। यह समझौता वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए एक बड़ा कदम साबित होगा। अब बिना किसी शर्त के होर्मुझ जलमार्ग को व्यापारिक जहाजों के लिए तुरंत खोला जाना चाहिए।”

मैक्रों ने यह भी साफ किया कि फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय मिशन पूरी तरह तैयार है, जो समझौता लागू होते ही खाड़ी क्षेत्र में समुद्री यातायात की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैनात किया जाएगा।

G7 समिट के मुख्य आकर्षण और बड़े मुद्दे

इस साल फ्रांस की अध्यक्षता में हो रहे इस शिखर सम्मेलन में वैश्विक राजनीति और सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही है:

  1. अमेरिका-ईरान और मध्य पूर्व (Middle East): युद्धविराम और शांति समझौते के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम पर दीर्घकालिक प्रतिबंधों और खाड़ी क्षेत्र से तेल की निर्बाध आपूर्ति बहाल करने पर G7 देश एक साझा रोडमैप तैयार कर रहे हैं।
  2. क्रिटिकल मिनरल्स (रणनीतिक खनिज): रिन्यूएबल एनर्जी और सेमीकंडक्टर चिप्स के लिए जरूरी दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) की सप्लाई चेन को किसी एक देश (चीन) के प्रभुत्व से मुक्त कर बहुध्रुवीय बनाने पर सहमति बनाने की कोशिश है।
  3. कैंसर के खिलाफ वैश्विक जंग: G7 के इतिहास में पहली बार, फ्रांस की पहल पर दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने और चिकित्सा अनुसंधान डेटा साझा करने को प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया है।

पीएम मोदी की यात्रा का शेड्यूल: ट्रम्प से मुलाकात पर टिकी दुनिया की नजरें

राजनयिक सूत्रों के अनुसार, आज फ्रांस पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी G7 के मंच पर ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) की आवाज बुलंद करेंगे। वे मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सुरक्षित उपयोग, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर विषयों पर भारत का रुख रखेंगे।

सबसे बड़ी मुलाकात: समिट की साइडलाइंस (इतर) पर आज शाम या कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक होने की उम्मीद है। दोनों नेताओं के बीच साल 2026 की यह पहली सीधी आमने-सामने की मुलाकात होगी, जिसमें भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और खाड़ी क्षेत्र के जलमार्गों में भारतीय क्रू और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा पर गहन चर्चा हो सकती है। इसके अलावा पीएम मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों और ब्रिटिश पीएम के साथ भी वन-टू-वन बैठकें करेंगे।

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