दिनांक: 16 जून, 2026
विशेष संवाददाता, झालावाड़:
मध्य प्रदेश पुलिस (MP Police) के लिए एक बेहद शर्मनाक और बड़ी फजीहत वाली खबर राजस्थान से सामने आई है। राजस्थान की झालावाड़ पुलिस ने मध्य प्रदेश के रतलाम और मंदसौर जिले के दो थाना प्रभारियों (TI) समेत कुल 100 पुलिसकर्मियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज की है। यह पूरी कार्रवाई झालावाड़ कोर्ट के उस सख्त आदेश के बाद हुई है, जिसमें एमपी पुलिस द्वारा घाटाखेड़ी गांव में की गई कथित ‘बड़ी ड्रग्स फैक्ट्री’ की रेड को पूरी तरह ‘फर्जी’ और ‘मनगढ़ंत’ करार दिया गया है।
इस घटना के बाद दोनों राज्यों की पुलिस और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। मध्य प्रदेश पुलिस के आला अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय जांच (Departmental Inquiry) के आदेश दे दिए हैं।
पूरा मामला: ‘करोड़ों की ड्रग्स’ से ‘फर्जी रेड’ तक का सफर
यह पूरा विवाद साल 2024 के अंत में शुरू हुआ था, जब मध्य प्रदेश की रतलाम और मंदसौर पुलिस की एक संयुक्त टीम ने राजस्थान की सीमा में घुसकर झालावाड़ जिले के पिड़ावा थाना क्षेत्र के घाटाखेड़ी गांव में एक कथित छापेमारी की थी।
- एमपी पुलिस का दावा: उस वक्त एमपी पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि उन्होंने घाटाखेड़ी में एक अवैध ड्रग्स फैक्ट्री (Drugs Factory) का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में नशीला पाउडर, कच्चा माल और करोड़ों रुपये मूल्य की एमडी (MD) ड्रग्स जब्त करने का दावा किया था। इस कार्रवाई को एमपी पुलिस की एक बड़ी कामयाबी बताया गया था।
- राजस्थान पुलिस का स्टैंड: चूंकि यह कार्रवाई राजस्थान की सीमा के भीतर हुई थी, इसलिए राजस्थान पुलिस ने इस पर आपत्ति जताई थी। स्थानीय पुलिस ने आरोप लगाया था कि एमपी पुलिस ने बिना किसी पूर्व सूचना या स्थानीय पुलिस को साथ लिए यह रेड की, जो प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।
कोर्ट ने खोली पोल: ‘न Drug, न Factory, सब फर्जी’
इस कथित रेड के खिलाफ घाटाखेड़ी के ग्रामीणों और कथित आरोपियों ने झालावाड़ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने लंबी सुनवाई और सबूतों के अभाव को देखते हुए मध्य प्रदेश पुलिस की इस पूरी थ्योरी को खारिज कर दिया।
- अवैध हिरासत और पिटाई: ग्रामीणों ने कोर्ट में आरोप लगाया कि एमपी पुलिस ने रेड के दौरान घर के ताले तोड़े, महिलाओं और बच्चों के साथ बदसलूकी की, और कई लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लेकर बेरहमी से पीटा।
- फर्जी जब्ती: कोर्ट ने पाया कि एमपी पुलिस ने जो नशीला पाउडर और कच्चा माल जब्त करने का दावा किया था, उसके फॉरेंसिक साक्ष्य कोर्ट में टिक नहीं सके। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि पूरी कार्रवाई किसी ‘पुरानी रंजिश’ या ‘वसूली’ के इरादे से की गई थी, और ड्रग्स फैक्ट्री का अस्तित्व पूरी तरह फर्जी था।
कोर्ट के आदेश पर FIR: इन पर गिरी गाज
झालावाड़ कोर्ट ने एमपी पुलिस की इस कथित अवैध कार्रवाई का संज्ञान लेते हुए स्थानीय पिड़ावा पुलिस को सख्त निर्देश दिए कि वे रेड में शामिल सभी अधिकारियों और कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज करें।
कोर्ट के आदेश पर राजस्थान पुलिस ने मंदसौर के टीआई अमित सोनी और रतलाम के टीआई राजेश चौहान समेत कुल 100 पुलिसकर्मियों (जिसमें कई एसआई, एएसआई और कांस्टेबल शामिल हैं) के खिलाफ आईपीसी की धारा 147 (बलवा), 323 (स्वैच्छिक चोट), 452 (घर में अनधिकार प्रवेश), 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना) और अन्य गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है।
आगे क्या? एमपी पुलिस में खलबली
राजस्थान में 100 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर की खबर लगते ही मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय में खलबली मच गई है।
डीजीपी का बयान: मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने इस मामले पर तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने उज्जैन आईजी और डीआईजी को निर्देश दिए हैं कि वे इस पूरी कथित फर्जी रेड की फाइल फिर से खोलें। डीजीपी ने कहा, “अगर हमारे अधिकारियों ने राजस्थान कोर्ट की अवमानना की है और कोई फर्जी कार्रवाई की है, तो उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। हम राजस्थान पुलिस के साथ जांच में पूरा सहयोग करेंगे।”
फिलहाल, इस मामले ने दो राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि राजस्थान पुलिस इन 100 एमपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या एक्शन लेती है।
