धार में बारिश का लंबा ब्रेक, खेतों की नमी घटी; मुरझाने लगी सोयाबीन, किसानों को आसमान से आस

धार, मध्य प्रदेश। धार जिले में बारिश का लंबा अंतर किसानों के लिए चिंता का कारण बन गया। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं रहने से सोयाबीन की फसल पर इसका असर दिखाई देने लगा। कई क्षेत्रों में किसान फसल की स्थिति को लेकर चिंतित हैं और अब अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

सोयाबीन इस समय फसल के महत्वपूर्ण विकास चरण में है। ऐसे समय पर खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। बारिश में लंबा अंतर आने से मिट्टी की ऊपरी परत में नमी कम होने लगी और कुछ क्षेत्रों में सोयाबीन के पौधों के मुरझाने की स्थिति सामने आई।

बारिश की कमी ने बढ़ाई किसानों की चिंता

किसानों के मुताबिक लगातार बारिश नहीं होने से खेतों में नमी तेजी से घट रही थी। बारिश के भरोसे खेती करने वाले किसानों के लिए यह स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि हर खेत में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

मध्य प्रदेश में इस मानसून के दौरान बारिश का वितरण भी असमान रहा है। सितंबर की कम बारिश को लेकर कृषि क्षेत्र में पहले से चिंता जताई जा रही है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में सामान्य से कम बारिश रहने पर सोयाबीन जैसी खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित होने का जोखिम बढ़ सकता है।

सोयाबीन के लिए नमी क्यों जरूरी?

सोयाबीन की फसल के विकास के दौरान पर्याप्त नमी नहीं मिलने पर पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। फूल और फलियों के विकास पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।

कृषि विशेषज्ञों ने भी कमजोर मानसून वाले क्षेत्रों में सोयाबीन और अन्य वर्षा आधारित फसलों पर विशेष निगरानी की जरूरत बताई है। राष्ट्रीय स्तर पर भी 2026 के असमान मानसून को लेकर कृषि विशेषज्ञों ने सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों को लेकर चिंता जताई है।

धार में बारिश का इंतजार

धार पश्चिमी मध्य प्रदेश के उन क्षेत्रों में शामिल है जहां इस मानसून में बारिश की कमी दर्ज की गई है। 8 सितंबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, धार में अब तक करीब 412 मिमी बारिश दर्ज हुई थी, जबकि सामान्य आंकड़ा करीब 695 मिमी बताया गया, यानी लगभग 41 प्रतिशत की कमी

हालांकि, 4 सितंबर को धार में करीब 20 दिन बाद बारिश होने की खबर भी सामने आई थी, जिससे सूख रही सोयाबीन को कुछ राहत मिली और खेतों में दोबारा नमी लौटने की बात कही गई।

किसानों की उम्मीद अब बारिश पर टिकी

बारिश की कमी से परेशान किसान अब सितंबर में होने वाली बारिश पर नजर लगाए हुए हैं। अच्छी और पर्याप्त बारिश होने पर खेतों में नमी बढ़ सकती है और सोयाबीन की फसल को आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।

वहीं यदि बारिश का अंतर फिर लंबा होता है, तो वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों में फसल उत्पादन पर दबाव बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।

मौसम और खेती का सीधा असर

इस साल मध्य प्रदेश में बारिश का वितरण एक समान नहीं रहा है। कुछ क्षेत्रों में कम समय में तेज बारिश हुई, जबकि दूसरे क्षेत्रों में लंबे समय तक बारिश का अंतर बना रहा। विशेषज्ञों के अनुसार सिर्फ पूरे सीजन की बारिश का आंकड़ा देखना पर्याप्त नहीं है; बारिश कब और किस अंतराल पर हुई, यह भी फसल के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है।

फिलहाल धार के किसानों की नजर आसमान पर है। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होगी, खेतों में पर्याप्त नमी लौटेगी और सोयाबीन की फसल को समय पर राहत मिलेगी।

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