9 साल की शादी का हुआ अंत: शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी का आपसी सहमति से तलाक, बेटी की जिम्मेदारी मां के पास

अनूपपुर/शहडोल, मध्य प्रदेश | 15 सितंबर 2026

मध्य प्रदेश की शहडोल लोकसभा सीट से भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और भाजपा नेता नरेंद्र सिंह मरावी का वैवाहिक रिश्ता अब आधिकारिक रूप से खत्म हो गया है। दोनों ने आपसी सहमति से तलाक लिया है। अनूपपुर जिले के राजेंद्रग्राम न्यायालय ने 3 सितंबर 2026 को हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी के तहत दोनों के विवाह विच्छेद की डिक्री पारित की। इस फैसले के साथ करीब नौ साल पुराना उनका वैवाहिक रिश्ता कानूनी रूप से समाप्त हो गया।

इस मामले की जानकारी अब सामने आने के बाद मध्य प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इसकी चर्चा तेज हो गई है। हिमाद्री सिंह शहडोल से भाजपा सांसद हैं, जबकि नरेंद्र सिंह मरावी भी भाजपा से जुड़े नेता हैं। दोनों का राजनीतिक और पारिवारिक संबंध पहले से ही चर्चा में रहा है।

23 नवंबर 2017 को हुई थी शादी

हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी का विवाह 23 नवंबर 2017 को हुआ था। शादी के बाद दोनों का एक बेटी भी हुई, जिसका जन्म 20 जून 2019 को हुआ।

शुरुआती वर्षों के बाद पति-पत्नी के बीच मतभेद बढ़ने लगे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक दोनों 5 मई 2021 से अलग रह रहे थे। यानी तलाक की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही दोनों लंबे समय से अलग-अलग रह रहे थे।

पांच साल से अलग रह रहा था दंपती

कोर्ट में दायर मामले के दौरान दोनों पक्षों ने स्वीकार किया कि उनके बीच वैवाहिक संबंध सामान्य नहीं रह गए थे और अब उनके लिए पति-पत्नी के रूप में साथ रहना संभव नहीं है।

रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने दोनों को सुलह का अवसर भी दिया था। लेकिन निर्धारित अवधि में दोनों के बीच ऐसा कोई समझौता नहीं हो सका, जिससे वे दोबारा साथ रह सकें।

इसके बाद दोनों ने आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने पर सहमति जताई और अदालत ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए तलाक की डिक्री जारी कर दी।

हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत तलाक

यह तलाक हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से हुआ है। इस प्रावधान के तहत पति और पत्नी दोनों विवाह को समाप्त करने के लिए संयुक्त रूप से सहमत हो सकते हैं और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत तलाक की डिक्री पारित कर सकती है।

इस मामले में भी दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ विवादित तरीके से मुकदमा लड़ने के बजाय आपसी सहमति से वैवाहिक संबंध खत्म करने का रास्ता अपनाया।

बेटी की जिम्मेदारी हिमाद्री सिंह के पास

तलाक के बाद दोनों की बेटी की जिम्मेदारी हिमाद्री सिंह के पास रहेगी। रिपोर्ट के अनुसार बेटी के पालन-पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़े खर्चों की जिम्मेदारी हिमाद्री सिंह उठाएंगी।

वहीं हिमाद्री सिंह ने नरेंद्र मरावी से गुजारा भत्ता या भरण-पोषण की मांग नहीं की है। यह व्यवस्था दोनों के बीच सहमति का हिस्सा बताई गई है।

कोर्ट ने दोनों को दिया था सुलह का मौका

आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया में अदालत ने दोनों को अपने रिश्ते पर दोबारा विचार करने और सुलह का अवसर दिया था। लेकिन दोनों की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि उनके लिए अब पति-पत्नी के रूप में एक साथ रहना संभव नहीं है।

इसके बाद अदालत ने दोनों की सहमति और प्रस्तुत परिस्थितियों को देखते हुए तलाक की डिक्री पारित कर दी।

हिमाद्री सिंह कौन हैं?

हिमाद्री सिंह मध्य प्रदेश की शहडोल लोकसभा सीट से भाजपा सांसद हैं। वह 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में शहडोल से निर्वाचित हुईं। इससे पहले वह कांग्रेस से भी जुड़ी रही थीं और 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुई थीं।

हिमाद्री सिंह का परिवार भी लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके पिता दलवीर सिंह और मां राजेश नंदिनी सिंह दोनों शहडोल क्षेत्र की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।

नरेंद्र मरावी का भी राजनीतिक संबंध

नरेंद्र सिंह मरावी भी भाजपा से जुड़े नेता हैं। हिमाद्री सिंह से उनका विवाह होने के कारण दोनों का राजनीतिक परिवारों से जुड़ा संबंध भी चर्चा में रहा।

उनके विवाह की कहानी इसलिए भी चर्चा में रही थी क्योंकि दोनों परिवार पहले से ही क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय थे। हालांकि अब करीब नौ साल के वैवाहिक जीवन के बाद दोनों कानूनी रूप से अलग हो चुके हैं।

राजनीतिक परिवारों से जुड़ा रहा है रिश्ता

हिमाद्री सिंह का परिवार शहडोल की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहा है। उनके पिता दलवीर सिंह परस्ते शहडोल लोकसभा सीट से कई बार सांसद रहे और केंद्र में मंत्री भी रहे। उनकी मां राजेश नंदिनी सिंह भी विधायक और सांसद रह चुकी हैं।

नरेंद्र सिंह मरावी का भी इसी क्षेत्र की राजनीति से पुराना संबंध रहा है। इसी वजह से हिमाद्री और नरेंद्र की शादी शुरुआत से ही राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी रही थी।

रिश्ते में मतभेद कब बढ़े?

उपलब्ध रिपोर्टों में कहा गया है कि शादी के कुछ समय बाद पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर मतभेद बढ़ने लगे। इसके बाद दोनों के बीच दूरी बढ़ती गई और अंततः वे अलग रहने लगे।

हालांकि दोनों के बीच निजी मतभेदों के विस्तृत कारणों को लेकर कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। इसलिए तलाक की वजह को लेकर किसी तरह की अटकल को तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी में इतना स्पष्ट है कि दोनों ने आपसी सहमति से वैवाहिक संबंध समाप्त करने का फैसला किया।

अब कानूनी रूप से अलग हैं दोनों

3 सितंबर 2026 को राजेंद्रग्राम न्यायालय की ओर से तलाक की डिक्री जारी होने के बाद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी अब कानूनी रूप से अलग हो चुके हैं।

इससे पहले दोनों करीब पांच वर्षों से अलग रह रहे थे। अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब उनके वैवाहिक रिश्ते का औपचारिक अंत हो गया है।

बेटी की परवरिश पर बनी सहमति

तलाक की प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक उनकी बेटी की जिम्मेदारी थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों इस बात पर सहमत हुए कि बेटी की देखभाल और उसके भविष्य से संबंधित प्रमुख जिम्मेदारी हिमाद्री सिंह के पास रहेगी।

पालन-पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े खर्चों की जिम्मेदारी भी हिमाद्री सिंह द्वारा उठाने की बात सामने आई है। वहीं उन्होंने नरेंद्र मरावी से गुजारा भत्ता नहीं मांगा है।

नौ साल बाद खत्म हुआ रिश्ता

2017 में विवाह के बाद दोनों करीब नौ साल तक वैवाहिक रिश्ते में रहे। हालांकि 2021 से दोनों अलग-अलग रह रहे थे, लेकिन कानूनी रूप से उनका विवाह सितंबर 2026 में अदालत की डिक्री के बाद ही समाप्त हुआ।

इस तरह शादी के करीब नौ साल बाद दोनों के रास्ते आधिकारिक तौर पर अलग हो गए हैं।

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