सहारनपुर, 9 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब इस मामले में जमीयत उलेमा-ए-हिंद भी सक्रिय हो गई है। संगठन के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को सहारनपुर पहुंचा और मामले से जुड़े राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी पक्षकारों से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान, सांसद इमरान मसूद, मामले से जुड़े अन्य लोगों और अधिवक्ताओं से बातचीत कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। जमीयत का कहना है कि अभी मामले से जुड़े दस्तावेजों और साक्ष्यों का अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद संगठन की केंद्रीय कमेटी और कानूनी विशेषज्ञों के साथ चर्चा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा मामला सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर है। प्रशासन और मस्जिद प्रबंधन के बीच जमीन और निर्माण की वैधता को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था।
रिपोर्टों के मुताबिक, सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को मस्जिद को अवैध करार देते हुए उसे हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही मस्जिद प्रबंधन पर करीब 6.41 करोड़ रुपये का अर्थदंड लगाए जाने की बात भी सामने आई। मस्जिद पक्ष ने इस आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी थी।
इसके बाद जिला अदालत ने 2 सितंबर को सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। इसके कुछ ही दिन बाद 5 सितंबर को प्रशासन ने मस्जिद को ध्वस्त कर दिया।
अब जमीयत ने संभाला मोर्चा
मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने मामले की कानूनी और सामाजिक स्थिति को समझने के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर भेजा।
राष्ट्रीय महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले मामले से जुड़े स्थानीय लोगों और वकीलों से जानकारी जुटाई। टीम ने राजस्व रिकॉर्ड, मस्जिद से जुड़े दस्तावेज और अदालत में हुई अब तक की कार्रवाई के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
जमीयत ने कहा कि मामले को लेकर जल्दबाजी में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जाएगा। पहले सभी दस्तावेज और तथ्य जुटाए जाएंगे और फिर कानूनी विशेषज्ञों की राय के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फजलुर्रहमान से हुई अहम मुलाकात
प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान के आवास पर भी मुलाकात की। वहां मस्जिद विवाद से जुड़े घटनाक्रम और मौजूदा कानूनी स्थिति पर चर्चा हुई।
इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने सांसद इमरान मसूद, जमीन से जुड़े लोगों और मामले में पक्ष रख रहे अधिवक्ताओं से भी बातचीत की। अधिवक्ताओं ने प्रतिनिधिमंडल को मुकदमे की कानूनी स्थिति और अब तक सामने आए दस्तावेजों के बारे में जानकारी दी।
हाईकोर्ट जाने की तैयारी
जमीयत के प्रतिनिधिमंडल ने संकेत दिया है कि मामले में उपलब्ध कानूनी विकल्पों की समीक्षा की जा रही है। इनमें इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख करना भी शामिल है।
जमीयत का कहना है कि सहारनपुर से जुटाई गई पूरी जानकारी और दस्तावेज दिल्ली ले जाए जाएंगे। इसके बाद संगठन की कमेटी और कानूनी विशेषज्ञ इनका अध्ययन करेंगे और तय करेंगे कि आगे किस कानूनी मंच पर मामला उठाया जाए।
इसी बीच मस्जिद प्रबंधन की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने की खबर भी सामने आई है। याचिका में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई और उस प्रक्रिया को चुनौती दी गई है, जिसके आधार पर प्रशासन ने कार्रवाई की।
जमीयत ने कानूनी लड़ाई में साथ देने की बात कही
जमीयत की ओर से कहा गया है कि सहारनपुर के लोगों को इस मामले में जहां भी कानूनी सहायता की आवश्यकता होगी, संगठन उनके साथ खड़ा रहेगा।
संगठन के मुताबिक, वकीलों की टीम मामले से जुड़े दस्तावेजों और कानूनी पहलुओं का अध्ययन करेगी। इसके बाद उपलब्ध विकल्पों के आधार पर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
इमरान मसूद ने भी दी प्रतिक्रिया
मामले को लेकर सांसद इमरान मसूद ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह मामला राजनीति से ज्यादा न्याय और कानूनी प्रक्रिया का है। उन्होंने संकेत दिया कि मस्जिद प्रकरण की लड़ाई अदालत में आगे भी जारी रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि अदालत में दस्तावेज और कानूनी तथ्य महत्वपूर्ण होंगे।
विवाद की शुरुआत से अब तक क्या हुआ?
सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद को लेकर शिकायत जनवरी 2025 में सामने आई थी। इसके बाद प्रशासनिक जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी।
16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को अवैध बताते हुए उसे हटाने और अर्थदंड का आदेश दिया। मस्जिद पक्ष ने जिला अदालत में अपील की। 2 सितंबर को जिला अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद 5 सितंबर को प्रशासन ने मस्जिद को ध्वस्त कर दिया।
ध्वस्तीकरण के बाद मामला और संवेदनशील हो गया और राजनीतिक दलों तथा सामाजिक संगठनों की सक्रियता बढ़ गई।
अब आगे क्या होगा?
अब इस मामले की नजरें इलाहाबाद हाईकोर्ट की कानूनी प्रक्रिया और जमीयत की आगे की रणनीति पर हैं। मस्जिद प्रबंधन पहले ही हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा चुका है, जबकि जमीयत भी दस्तावेजों और कानूनी पहलुओं की समीक्षा कर रही है।
फिलहाल मामला अदालत में पहुंच चुका है, इसलिए आगे की स्थिति न्यायिक कार्यवाही और संबंधित पक्षों की दलीलों पर निर्भर करेगी।
सहारनपुर का यह विवाद अब केवल स्थानीय प्रशासन और मस्जिद प्रबंधन के बीच का मामला नहीं रह गया है। जमीयत की एंट्री, राजनीतिक नेताओं की सक्रियता और हाईकोर्ट में पहुंची याचिका ने इसे एक बड़े कानूनी और राजनीतिक मुद्दे में बदल दिया है। आने वाले दिनों में अदालत में होने वाली सुनवाई और दस्तावेजों के आधार पर इस मामले की दिशा और स्पष्ट होगी।
