दिनांक: 16 जून, 2026
विशेष संवाददाता, हरिद्वार: जेठ माह के अधिकमास में सोमवार को पड़े सोमवती अमावस्या के पावन पर्व पर धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का एक ऐसा अभूतपूर्व सैलाब उमड़ा, जिसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए। जिला प्रशासन और खुफिया तंत्र के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भोर के ब्रह्ममुहूर्त से लेकर देर शाम तक करीब 76.5 लाख श्रद्धालुओं ने मां गंगा की पावन लहरों में पुण्य की डुबकी लगाई।
धार्मिक दृष्टि से करीब 300 साल बाद बने इस दुर्लभ महासंयोग के कारण देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचे थे। लेकिन इस शाही स्नान को केवल धार्मिक चश्मे से नहीं देखा जा रहा है; प्रशासन के लिए यह भीड़ प्रबंधन आगामी ‘महाकुंभ 2027’ की तैयारियों का पहला और सबसे बड़ा ‘एसिड टेस्ट’ (अग्निपरीक्षा) साबित हुआ है।
300 साल बाद बना महासंयोग: हर की पैड़ी पर पैर रखने की जगह नहीं
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार लगभग 300 वर्षों के बाद जेठ मास, अधिकमास और सोमवती अमावस्या का ऐसा दुर्लभ महासंयोग बना है। इस विशेष दिन पर पितरों के निमित्त तर्पण, गंगा स्नान और दान का अनंत गुना फल मिलता है।
इसी आस्था के वश रविवार रात से ही हजारों श्रद्धालु हर की पैड़ी मालवीय घाट, सुभाष घाट, कुशावर्त घाट और बिरला घाट पर डट गए थे। सोमवार सुबह 4 बजे जैसे ही कपाट खुले, पूरा घाट ‘हर हर गंगे’ और ‘जय मां गंगे’ के उद्घोष से गूंज उठा। उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश के वाहनों और यात्रियों से पूरा शहर पैक नजर आया।
महाकुंभ 2027 का ‘ट्रायल रन’: कहाँ पास हुआ प्रशासन, कहाँ छूटे पसीने?
चूंकि अगले साल के अंत और 2027 की शुरुआत में हरिद्वार में महाकुंभ का आयोजन होना है, इसलिए शासन ने इस सोमवती अमावस्या को कुंभ के ‘ट्रायल रन’ के तौर पर लिया था। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने खुद चौबीसों घंटे ग्राउंड जीरो पर रहकर कमान संभाली:
- भीड़ नियंत्रण (क्राउड मैनेजमेंट) में पास: हर की पैड़ी को होल्डिंग एरिया में बांटकर और वन-वे रूट लागू कर पुलिस ने घाटों पर भगदड़ जैसी स्थिति नहीं बनने दी। एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और जल पुलिस की मुस्तैदी के कारण गहरे पानी में जाने वाले कई यात्रियों को सुरक्षित बचाया गया।
- हाईवे और ट्रैफिक सिस्टम हुआ फेल: प्रशासन की सबसे बड़ी नाकामी ट्रैफिक और डायवर्जन प्लान में दिखी। चारधाम यात्रा के पीक सीजन और वीकेंड का मेल होने के कारण दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों का ऐसा दबाव बढ़ा कि मंगलौर क्षेत्र, गुड़मंडी और गंगनहर पुल पर गाड़ियां घंटों रेंगती रहीं। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बीच बच्चे और बुजुर्ग हाईवे पर पानी के लिए तरसते नजर आए।
- ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर मारामारी: मेला स्पेशल ट्रेनें (जैसे बठिंडा-हरिद्वार स्पेशल) चलाने के बावजूद रेलवे स्टेशन पर पैर रखने की जगह नहीं थी। यात्रियों ने शिकायत की कि कुंभ की तैयारी का दम भरने वाले रेलवे के पास उमड़ने वाली भीड़ के अनुपात में बोगियां और ट्रेनें बेहद कम थीं।
मंदिरों में लगीं लंबी कतारें, दान-पुण्य का दौर जारी
गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं का रुख धर्मनगरी के सिद्धपीठों की ओर हुआ। मनसा देवी, चंडी देवी और माया देवी मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों को रोपवे और पैदल रास्तों पर 2 से 3 घंटे का इंतजार करना पड़ा। घाटों पर पुरोहितों द्वारा पितृ तर्पण कराने और पीपल के वृक्ष की परिक्रमा कर रक्षासूत्र बांधने वाली महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई।
एसएसपी का आधिकारिक बयान: हरिद्वार एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने मेला समाप्ति के बाद कहा, “76 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्नान कराना हमारी प्राथमिकता थी, जिसमें हम सफल रहे। हालांकि, हाईवे पर निर्माण कार्यों (फ्लाईओवर) और चारधाम के वीआईपी ट्रैफिक के कारण कुछ क्षेत्रों में जाम की स्थिति बनी। इस मेले की कमियों का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है, और कुंभ-2027 से पहले पार्किंग, रूट डायवर्जन और शटल सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।”
शाम की भव्य गंगा आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं की वापसी शुरू हुई, शहर के बाहरी इलाकों में एक बार फिर वाहनों का दबाव देखा गया, जिसे सामान्य करने में पुलिस बल को आधी रात तक मशक्कत करनी पड़ी।
