वाशिंगटन | 30 जुलाई, 2026
मध्य पूर्व (West Asia) में एक बार फिर पूर्ण युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ईरान द्वारा किए गए बैलिस्टिक मिसाइल हमले के बाद अमेरिका ने आक्रामक रुख अपनाते हुए ईरान के भीतर भारी एयरस्ट्राइक (हवाई हमले) शुरू कर दी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के बाद चेतावनी देते हुए कहा है कि अब अमेरिका की तरफ से करारा जवाब देने की बारी है।
जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर ईरान का हमला
- मिसाइलें दागी गईं: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अडース (मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस) को निशाना बनाते हुए कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।
- डिफेंस सिस्टम ने रोका: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह अमेरिकी बलों पर एक ‘अचानक सरप्राइज अटैक’ की कोशिश थी, जिसे समय रहते एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नाकाम कर दिया और अधिकांश मिसाइलों को बीच में ही रोककर नष्ट कर दिया गया। जॉर्डन की सेना ने भी पुष्टि की कि उसने अपने क्षेत्र में पांच ईरानी मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया।
डोनाल्ड ट्रंप की दो टूक: “अब उन्हें तगड़ी सजा मिलेगी”
घटना के बाद एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बेहद आक्रामक नजर आए। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा:
“हम उन्हें बहुत बुरी तरह पछाड़ने जा रहे हैं। हम उन पर जोरदार प्रहार करेंगे, उन्हें इसका पूरा अहसास कराया जाएगा।”
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों के पास जवाबी कार्रवाई के लिए केवल कुछ ही मिनटों का समय था, जिसे उन्होंने बखूबी अंजाम दिया।
अमेरिका का भारी पलटवार: ईरान के कई ठिकाने तबाह
ईरान के हमले के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के अंदर “भारी हमलों की लहर” (Heavy wave of strikes) को अंजाम दिया।
- टार्गेट: अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इन एयरस्ट्राइक्स में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के दर्जनों ठिकानों—जैसे मिलिट्री कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन फैसिलिटी, और कोस्टल डिफेंस साइट्स—को नेस्तनाबूद कर दिया गया है।
- क्षेत्रीय तनाव: इस ताजा सैन्य टकराव ने दोनों देशों के बीच हाल ही में शुरू हुई कूटनीतिक बातचीत और शांति की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, जिससे एक बार फिर व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का खतरा पैदा हो गया है।
