नई दिल्ली/लखनऊ, 2 सितंबर 2026: राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली से जुड़े कथित बड़े फर्जीवाड़े की जांच में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई शुरू की है। एजेंसी ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI के विभिन्न टोल प्लाजा से जुड़े मामले में 7 राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में कुल 14 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया।
ED की लखनऊ जोनल ऑफिस की टीम ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत की है। तलाशी का मकसद कथित फर्जी टोल वसूली, अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल, सरकारी लेखा प्रणाली से बाहर रकम डायवर्ट करने और इस पैसे के अंतिम लाभार्थियों का पता लगाना है।
🚨 किन-किन जगहों पर हुई छापेमारी?
ED की यह कार्रवाई किसी एक शहर तक सीमित नहीं है। एजेंसी ने अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में संदिग्ध परिसरों को निशाना बनाया है।
तलाशी अभियान इन जगहों पर चल रहा है:
- उत्तर प्रदेश
- राजस्थान
- महाराष्ट्र
- जम्मू
- मध्य प्रदेश
- NCR
- कोलकाता, पश्चिम बंगाल
इन जगहों पर कुल 14 परिसरों में तलाशी की जा रही है।
💻 फर्जी सॉफ्टवेयर से बनाई जा रही थीं टोल रसीदें?
जांच में सबसे चौंकाने वाला आरोप अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल का है।
ED के मुताबिक, NHAI के कुछ टोल प्लाजा पर कथित तौर पर ऐसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा था, जो आधिकारिक टोल सिस्टम के बाहर अनधिकृत या फर्जी टोल रसीदें तैयार करने में सक्षम था।
आरोप है कि इस तरीके से वास्तविक टोल कलेक्शन और सिस्टम में दर्ज रकम के बीच अंतर पैदा किया जाता था। इसके बाद टोल से प्राप्त रकम का एक हिस्सा कथित तौर पर NHAI की आधिकारिक अकाउंटिंग व्यवस्था से बाहर डायवर्ट कर दिया जाता था।
🔍 NHAI के रिकॉर्ड और फॉरेंसिक जांच से क्या सामने आया?
ED के अनुसार इस मामले में केवल शिकायत के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।
जांच के दौरान फॉरेंसिक जांच और NHAI के रिकॉर्ड में ऐसे अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि होने की बात सामने आई है।
यही वजह है कि एजेंसी अब डिजिटल रिकॉर्ड, कंप्यूटर सिस्टम, दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।
ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि:
- सॉफ्टवेयर किसने बनाया या उपलब्ध कराया?
- इसे किन टोल प्लाजा पर इस्तेमाल किया गया?
- फर्जी रसीदों से कितनी रकम प्रभावित हुई?
- पैसा किन बैंक खातों में गया?
- रकम के अंतिम लाभार्थी कौन हैं?
- इस पूरे नेटवर्क में टोल ऑपरेटरों और अन्य लोगों की क्या भूमिका थी?
💰 टोल की रकम कहां जा रही थी?
जांच एजेंसी को संदेह है कि टोल से मिलने वाली रकम का कुछ हिस्सा NHAI की आधिकारिक लेखा प्रणाली में दर्ज होने से पहले ही दूसरी जगह भेजा जा रहा था।
यानी वाहन चालक से टोल वसूला जाता था, लेकिन कथित तौर पर उस लेनदेन का पूरा हिस्सा सरकारी सिस्टम में नहीं पहुंचता था।
ED अब इसी कथित मनी ट्रेल को खंगाल रही है।
तलाशी के दौरान बैंक खातों, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय दस्तावेजों की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित तौर पर डायवर्ट की गई रकम आखिर कहां पहुंची।
📱 डिजिटल सबूतों पर ED की खास नजर
क्योंकि कथित फर्जीवाड़े में सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हुआ है, इसलिए इस जांच में डिजिटल सबूत बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
ED की टीमें कंप्यूटर, डिजिटल स्टोरेज, सॉफ्टवेयर रिकॉर्ड, टोल कलेक्शन डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक जानकारी को खंगाल रही हैं।
एजेंसी का लक्ष्य सिर्फ फर्जी रसीद बनाने वाले सिस्टम तक पहुंचना नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क और रकम के अंतिम लाभार्थियों का पता लगाना है।
📂 मामला कब शुरू हुआ?
यह जांच एक FIR नंबर 17, दिनांक 22 जनवरी 2025 और बाद में दर्ज ECIR/ASZO/04/2025, दिनांक 19 मई 2025 से जुड़ी है।
इसी जांच के आधार पर ED ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच शुरू की और अब इसका दायरा कई राज्यों तक पहुंच गया है।
🔎 पिछले महीने भी हुई थी ED की कार्रवाई
इस मामले में यह पहली बार नहीं है जब ED ने तलाशी अभियान चलाया है।
रिपोर्टों के मुताबिक पिछले महीने भी 14 ठिकानों पर तलाशी ली गई थी। अब बुधवार को एक बार फिर 14 परिसरों पर कार्रवाई शुरू की गई है।
इससे संकेत मिलता है कि जांच एजेंसी मामले को गंभीरता से लेते हुए कथित नेटवर्क की अलग-अलग कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
🛣️ 200 से ज्यादा टोल प्लाजा जांच के दायरे में?
कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि कथित टोल फर्जीवाड़े की जांच का दायरा देशभर के 200 से अधिक टोल प्लाजा तक पहुंच गया है। इनमें करीब 100 टोल प्लाजा उत्तर प्रदेश में होने की बात रिपोर्ट की गई है।
हालांकि, यह संख्या व्यापक जांच के दायरे से संबंधित रिपोर्टेड जानकारी है और सभी टोल प्लाजा पर फर्जीवाड़ा साबित होने का मतलब नहीं है।
⚖️ PMLA के तहत क्यों हो रही है जांच?
ED ने मामले में Prevention of Money Laundering Act यानी PMLA का इस्तेमाल किया है।
PMLA के तहत एजेंसी कथित अपराध से हासिल रकम और उसके लेनदेन की जांच कर सकती है।
इस मामले में ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि टोल कलेक्शन में कथित हेरफेर से अगर कोई अपराध की रकम बनी, तो उसे किस तरह इस्तेमाल या ट्रांसफर किया गया।
🧾 फर्जी टोल रसीदों से कैसे हो सकता था खेल?
जांच के आरोपों को आसान भाषा में समझें तो कथित तरीका कुछ इस तरह हो सकता था:
वाहन टोल प्लाजा पर पहुंचा → टोल वसूला गया → अनधिकृत सॉफ्टवेयर से रसीद तैयार हुई → वास्तविक कलेक्शन और आधिकारिक रिकॉर्ड में अंतर पैदा हुआ → रकम का हिस्सा सिस्टम से बाहर डायवर्ट किया गया।
हालांकि यह जांच एजेंसी के आरोपों/प्रारंभिक जांच का हिस्सा है, और अंतिम जिम्मेदारी अदालत में साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।
🚔 ED को अब किन चीजों की तलाश?
मौजूदा छापेमारी में एजेंसी मुख्य रूप से तीन चीजों पर ध्यान दे रही है:
1. डिजिटल सबूत
कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड।
2. वित्तीय दस्तावेज
बैंक खाते, लेनदेन और पैसों के ट्रांसफर से जुड़े रिकॉर्ड।
3. मनी ट्रेल
कथित तौर पर डायवर्ट रकम आखिर किन लोगों या संस्थाओं तक पहुंची।
ED का कहना है कि तलाशी का उद्देश्य डिजिटल और दस्तावेजी सबूत जुटाना, लाभार्थियों की पहचान करना और अपराध से जुड़ी रकम का पता लगाना है।
🏛️ NHAI के लिए क्यों अहम है मामला?
NHAI देश के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के विकास और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
टोल प्लाजा से आने वाला राजस्व सड़क बुनियादी ढांचे और संबंधित व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होता है।
ऐसे में यदि किसी टोल सिस्टम में वास्तव में आधिकारिक रिकॉर्ड से बाहर रकम डायवर्ट की जाती है, तो इससे सरकारी राजस्व को नुकसान होने के साथ-साथ टोल कलेक्शन सिस्टम की पारदर्शिता और डिजिटल सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
⚠️ अभी जांच जारी, अंतिम निष्कर्ष बाकी
ED की छापेमारी अभी जारी है। इसलिए इस समय कथित फर्जीवाड़े की कुल रकम, आरोपियों की अंतिम संख्या और अंतिम लाभार्थियों के बारे में कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
एजेंसी डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने के बाद आगे की कार्रवाई कर सकती है।
