पणजी, 2 सितंबर 2026: गोवा की जेलों में मोबाइल फोन और प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक संचार उपकरणों के इस्तेमाल पर अब सख्ती बढ़ने जा रही है। गोवा विधानसभा ने Goa Prisons and Correctional Services Bill, 2026 को पास कर दिया है। नए कानून के तहत जेल परिसर में मोबाइल फोन या अन्य प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन डिवाइस रखना या इस्तेमाल करना संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध होगा। इस अपराध के लिए तीन साल तक की जेल और ₹25,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने यह बिल विधानसभा में पेश किया था। सरकार का कहना है कि नए कानून का उद्देश्य जेलों के भीतर मोबाइल फोन और प्रतिबंधित सामान की तस्करी रोकना, संगठित अपराध पर लगाम लगाना और जेल प्रशासन को अधिक सुरक्षित बनाना है। विधानसभा ने इसे 1 सितंबर को वॉयस वोट से पारित किया।
📱 जेल में मोबाइल रखने पर अब नहीं चलेगी ढिलाई
नए कानून का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान जेलों में मोबाइल फोन को लेकर है।
इसके तहत केवल कैदी ही नहीं, बल्कि जेल कर्मचारी, आगंतुक या कोई अन्य व्यक्ति भी प्रतिबंधित संचार उपकरण को जेल के अंदर लाने, रखने, इस्तेमाल करने, किसी कैदी को उपलब्ध कराने या अनधिकृत संचार में मदद करने पर कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।
यानी जेल के भीतर मोबाइल फोन पहुंचाने वाले नेटवर्क पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है।
⚖️ अपराध होगा संज्ञेय और गैर-जमानती
नए प्रावधानों के तहत जेल के अंदर प्रतिबंधित मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन डिवाइस रखना अथवा इस्तेमाल करना cognisable और non-bailable offence होगा।
इसमें कम से कम दो साल की जेल, जिसे बढ़ाकर तीन साल तक किया जा सकता है, और ₹25,000 तक जुर्माने का प्रावधान है।
यह प्रावधान जेलों में मोबाइल के जरिए चलने वाली कथित अवैध गतिविधियों पर सीधा असर डालने के उद्देश्य से लाया गया है।
🚨 कैदी की पुरानी सजा खत्म होने के बाद शुरू होगी नई सजा
नए बिल में एक अहम प्रावधान यह भी है कि अगर कोई कैदी पहले से किसी मामले में सजा काट रहा है और जेल में मोबाइल रखने या इस्तेमाल करने के अपराध में उसे नई सजा मिलती है, तो नई सजा मौजूदा सजा पूरी होने के बाद शुरू होगी।
इसका मतलब है कि जेल के अंदर मोबाइल से जुड़े नए अपराध को मौजूदा सजा में महज जोड़कर खत्म नहीं किया जाएगा।
🔒 जेलों में बढ़ेगी निगरानी
बिल सिर्फ मोबाइल फोन पर रोक तक सीमित नहीं है।
सरकार ने जेलों में इंटेलिजेंस और सर्विलांस सिस्टम मजबूत करने का प्रावधान किया है। खासकर हाई-रिस्क, आदतन अपराधियों और गंभीर अपराधों में शामिल कैदियों पर ज्यादा निगरानी रखी जाएगी।
जेल प्रशासन राज्य पुलिस की इंटेलिजेंस विंग के साथ मिलकर जानकारी जुटाएगा और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेगा।
🔍 हाई-रिस्क बैरकों में होंगे अचानक तलाशी अभियान
बिल के तहत संवेदनशील बैरकों और सेल में नियमित तलाशी के साथ-साथ अचानक छापेमारी और सर्च ऑपरेशन किए जाएंगे।
इन तलाशी अभियानों का मकसद मोबाइल फोन, नशीले पदार्थों और अन्य प्रतिबंधित सामान की बरामदगी करना होगा।
इसके अलावा जेलों में एडवांस्ड मोबाइल जैमर और डिटेक्शन सिस्टम लगाने की भी व्यवस्था की गई है, ताकि जेल के अंदर अनधिकृत मोबाइल संचार को रोका जा सके।
👮 जेल कर्मचारियों की भी होगी निगरानी
सरकार ने जेलों में कैदी-कर्मचारी गठजोड़ यानी inmate-staff nexus को रोकने के लिए भी कदम उठाए हैं।
संवेदनशील बैरकों और सेल में तैनात कर्मचारियों को समय-समय पर बदलने का प्रावधान किया गया है।
सरकार का मानना है कि लंबे समय तक एक ही संवेदनशील स्थान पर तैनाती से कैदियों और कर्मचारियों के बीच ऐसा नेटवर्क बन सकता है, जिससे जेल में प्रतिबंधित सामान पहुंचने या अवैध गतिविधियां चलने का खतरा बढ़ सकता है।
📞 जेल से बाहर अपराध चलाने पर भी नजर
सरकार की चिंता केवल जेल के अंदर की गतिविधियों तक सीमित नहीं है।
बिल में हाई-रिस्क और आदतन अपराधियों की निगरानी का प्रावधान है, ताकि जेल से बाहर मौजूद गिरोहों के साथ संपर्क बनाकर संगठित अपराध, गवाहों को धमकाने या आपराधिक गतिविधियों को संचालित करने की संभावना को रोका जा सके।
🕵️ पैरोल और जमानत पर छूटने वालों की भी निगरानी
नए कानून में ऐसे कैदियों की निगरानी बढ़ाने का प्रावधान है जो:
- सजा पूरी करके जेल से बाहर निकलते हैं
- जमानत पर रिहा होते हैं
- पैरोल पर बाहर जाते हैं
- फरलो पर अस्थायी रूप से जेल से बाहर आते हैं
ऐसे हाई-रिस्क, आदतन या गंभीर अपराधियों की रिहाई की जानकारी संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक (SP) को दी जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी निगरानी की जा सके।
🏢 गोवा में बन सकेंगी Open और Semi-Open Prisons
नए कानून का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू जेल सुधार से जुड़ा है।
सरकार को Open और Semi-Open Correctional Institutions स्थापित करने का अधिकार दिया गया है।
इनका उद्देश्य केवल कैदियों को बंद रखना नहीं बल्कि उन्हें धीरे-धीरे समाज में वापस लौटने के लिए तैयार करना है। इनमें पुनर्वास, कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों पर जोर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा है कि ओपन जेल की आधारशिला इसी महीने रखे जाने की योजना है।
🧑🏭 कैदियों के Skill Development पर भी जोर
नए बिल में जेल प्रशासन और सुरक्षा के अलावा rehabilitation और skill development को भी शामिल किया गया है।
कैदियों के लिए:
- व्यावसायिक प्रशिक्षण
- कौशल विकास
- पुनर्वास
- समाज में पुनः एकीकरण
- मानवाधिकारों की सुरक्षा
जैसे पहलुओं को कानून में जगह दी गई है।
यानी सरकार की योजना जेल व्यवस्था को केवल दंडात्मक मॉडल से आगे ले जाकर correctional और rehabilitation-based system की ओर ले जाने की है।
🏛️ कानून किस पुराने सिस्टम को बदलेगा?
Goa Prisons and Correctional Services Bill, 2026 को मौजूदा जेल कानूनों को बदलकर एक व्यापक व्यवस्था बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।
यह बिल केंद्र सरकार द्वारा प्रसारित Model Prisons and Correctional Services Act, 2023 से भी प्रेरित है। इसका उद्देश्य जेल प्रबंधन, कैदी अनुशासन, सुरक्षा, प्रतिबंधित सामान पर नियंत्रण और पुनर्वास से जुड़े प्रावधानों को एक व्यापक कानूनी ढांचे में लाना है।
📍 गोवा में है सिर्फ एक Central Prison
गोवा में वर्तमान में एक केंद्रीय जेल है, जो कोलवाले (Colvale), नॉर्थ गोवा में स्थित है।
इसी जेल व्यवस्था को नए कानून के तहत ज्यादा आधुनिक निगरानी, मोबाइल जैमिंग, तलाशी और इंटेलिजेंस सिस्टम से मजबूत करने की योजना है।
🗣️ विपक्ष ने भी उठाए सवाल
बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से इसके कार्यान्वयन और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए।
विपक्ष के नेता यूरी अलेमाओ ने नियमों के ड्राफ्ट, “हाई-रिस्क” या “हार्डकोर” अपराधियों की परिभाषा और शिकायतों की स्वतंत्र जांच जैसी बातों पर स्पष्टता की मांग की।
वहीं विधायक विजय सरदेसाई ने जेल सुधारों के लिए स्वतंत्र निगरानी, कैदियों के अधिकार, हिरासत में मौत की जांच और डेटा प्राइवेसी जैसे मुद्दे उठाए।
🔐 आखिर सरकार ने इतनी सख्ती क्यों की?
सरकार का तर्क है कि जेलों में मोबाइल फोन का इस्तेमाल केवल नियम तोड़ने का मामला नहीं है।
अगर कोई गंभीर अपराधी जेल के अंदर से बाहर मौजूद लोगों से लगातार संपर्क कर सके, तो वह:
- गैंग गतिविधियों को निर्देश दे सकता है
- गवाहों को धमका सकता है
- आपराधिक नेटवर्क से संपर्क बनाए रख सकता है
- अवैध गतिविधियों को संचालित कर सकता है
इसी वजह से नए कानून में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन डिवाइस पर विशेष ध्यान दिया गया है।
