नई दिल्ली | 20 जुलाई 2026
देशभर में लंबे इंतजार के बाद मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत से लेकर जापान तक फैला विशाल बादल तंत्र (Cloud Band) दक्षिण-पश्चिम मानसून को नई ऊर्जा दे रहा है। इसी कारण उत्तर भारत, मध्य भारत और पूर्वी भारत के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विशेषज्ञ इस स्थिति को मानसून के “राइट टिक” या सही ट्रैक पर लौटने का संकेत मान रहे हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र, अरब सागर से लगातार मिल रही नमी और पूर्वी एशिया तक फैली बादलों की लंबी पट्टी ने पूरे मानसूनी सिस्टम को मजबूत कर दिया है। उपग्रह तस्वीरों में भारत का बड़ा हिस्सा घने सफेद बादलों से ढका दिखाई दे रहा है, जो यह संकेत देता है कि मानसूनी गतिविधियां अब व्यापक स्तर पर सक्रिय हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का क्लाउड बैंड केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन, कोरिया और जापान तक फैला हुआ है, जिससे पूरे एशियाई मानसूनी क्षेत्र में नमी और वर्षा की गतिविधियां तेज हुई हैं।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया है कि 21 जुलाई से 25 जुलाई के बीच दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना है, जिससे जलभराव, बाढ़ जैसी स्थिति और भूस्खलन का खतरा भी बढ़ सकता है।
दिल्ली-एनसीआर में पिछले कई दिनों से बारिश की कमी के कारण उमस और गर्मी बढ़ गई थी। अब मौसम विभाग का अनुमान है कि लगातार कई दिनों तक रुक-रुक कर बारिश होगी, जिससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। वहीं उत्तर प्रदेश के कई जिलों—मेरठ, मथुरा, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी, बांदा और सोनभद्र—के लिए भी भारी बारिश और आकाशीय बिजली का अलर्ट जारी किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की सक्रियता का मुख्य कारण मानसून ट्रफ का सामान्य स्थिति में लौटना है। पिछले कुछ दिनों से यह ट्रफ उत्तर की ओर खिसक गई थी, जिससे बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ गई थीं। अब ट्रफ के दोबारा सक्रिय होने और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी मिलने के कारण व्यापक स्तर पर वर्षा की स्थिति बन रही है। यदि यह प्रणाली अगले कुछ दिनों तक बनी रहती है, तो जुलाई के अंतिम सप्ताह तक देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जा सकती है।
मौसम विभाग ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों के पास न जाने, बिजली गिरने के समय खुले स्थानों से दूर रहने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। पहाड़ी राज्यों में रहने वाले लोगों को भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की सलाह भी दी गई है।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि वर्तमान परिस्थितियां बनी रहती हैं, तो जुलाई के अंत तक देश के कई हिस्सों में मानसून सामान्य से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। इससे खरीफ फसलों की बुवाई को भी गति मिलेगी और जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ने की संभावना है। हालांकि जिन क्षेत्रों में पहले से ही भारी वर्षा हो चुकी है, वहां अगले कुछ दिनों तक बाढ़ और जलभराव की स्थिति पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता होगी।
