नई दिल्ली | 20 जुलाई 2026
सनातन धर्म में भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्ची श्रद्धा और विधि-विधान से की गई शिव उपासना जीवन की अनेक मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली मानी जाती है। इन्हीं मान्यताओं में संतान सुख की प्राप्ति के लिए भगवान शिव की विशेष पूजा का भी उल्लेख मिलता है। ज्योतिष एवं धर्माचार्यों का कहना है कि संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपति यदि नियमित रूप से भगवान शिव की आराधना करें और सोमवार के दिन विशेष अभिषेक करें, तो उन्हें सकारात्मक फल मिलने की मान्यता है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, प्रत्येक सोमवार प्रातः स्नान कर स्वच्छ एवं सात्विक वस्त्र धारण करने के बाद शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का अभिषेक करना शुभ माना गया है। अभिषेक के लिए सबसे पहले गंगाजल अर्पित किया जाता है, जिसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत तैयार कर शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि यह पूजा भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने में सहायक होती है।
शिव पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिवलिंग पर 21 बेलपत्र श्रद्धापूर्वक अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। प्रत्येक बेलपत्र चढ़ाते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त धतूरा, भांग, सफेद पुष्प तथा अक्षत भी अर्पित किए जा सकते हैं।
पूजा के दौरान भगवान शिव को सफेद वस्त्र अर्पित करने की भी परंपरा है। सफेद रंग को पवित्रता, शांति और सात्विकता का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु पूजा के पश्चात घी का दीपक जलाकर शिव आरती करते हैं तथा संतान सुख, परिवार की समृद्धि और सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं।
धर्माचार्यों का कहना है कि पूजा केवल विधि-विधान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि श्रद्धा, संयम और सकारात्मक आचरण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। नियमित रूप से सोमवार का व्रत रखने, जरूरतमंदों को दान देने, गौ सेवा करने तथा सात्विक जीवनशैली अपनाने को भी शुभ माना गया है। इन सभी कार्यों को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का माध्यम बताया गया है।
हालांकि विद्वानों का यह भी कहना है कि संतान प्राप्ति से जुड़ी किसी भी शारीरिक या चिकित्सीय समस्या की स्थिति में केवल धार्मिक उपायों पर निर्भर न रहें। उचित चिकित्सा परामर्श लेना भी उतना ही आवश्यक है। धार्मिक आस्था और आधुनिक चिकित्सा, दोनों अपने-अपने स्थान पर महत्वपूर्ण हैं।
श्रावण मास, सोमवार और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर देशभर के शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसी भावना के साथ भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई उपासना व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति प्रदान करती है।
