भारत ने सभी प्रकार की ‘धर्म-विरोधी मानसिकता’ की निंदा की, संयुक्त राष्ट्र को धार्मिक खेमों में बांटने से किया आगाह

16 मार्च 2026

भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में सभी प्रकार की धर्म-विरोधी मानसिकता (रिलिजियोफोबिया) की कड़ी निंदा करते हुए चेतावनी दी है कि संयुक्त राष्ट्र को किसी विशेष धर्म के आधार पर अलग-अलग खेमों में नहीं बांटा जाना चाहिए। यह बयान संयुक्त राष्ट्र महासभा के 78वें सत्र के दौरान दिया गया।

संयुक्त राष्ट्र में भारत का बयान

संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने ‘इस्लामोफोबिया से निपटने के उपाय’ संबंधी प्रस्ताव को अपनाने के दौरान महासभा को संबोधित करते हुए यह बात कही।

उन्होंने कहा कि किसी एक धर्म से जुड़े फोबिया पर अलग से प्रस्ताव लाने की प्रवृत्ति भविष्य में कई ऐसे प्रस्तावों का रास्ता खोल सकती है, जो विभिन्न धर्मों के आधार पर विभाजन पैदा कर सकते हैं।

धार्मिक आधार पर विभाजन के खिलाफ भारत

रुचिरा कंबोज ने कहा कि आज पारित किया गया प्रस्ताव ऐसा उदाहरण नहीं बनना चाहिए, जिससे आगे चलकर अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग प्रस्ताव लाए जाएं और संयुक्त राष्ट्र के भीतर धार्मिक आधार पर खेमेबंदी शुरू हो जाए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र का उद्देश्य सभी देशों और समाजों के बीच एकता और सहयोग को बढ़ावा देना है, न कि धार्मिक आधार पर विभाजन पैदा करना।

सभी धर्मों के सम्मान की नीति

भारत ने स्पष्ट किया कि वह बहुलवाद (प्लुरलिज्म) का समर्थक है और सभी धर्मों तथा आस्थाओं के लिए समान सम्मान और सुरक्षा के सिद्धांत को मानता है।

रुचिरा कंबोज ने कहा कि भारत का मानना है कि सभी धर्मों के अनुयायियों को समान अधिकार और संरक्षण मिलना चाहिए।

विशेष दूत की नियुक्ति पर भी आपत्ति

इस्लामोफोबिया से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र में विशेष दूत नियुक्त करने के प्रस्ताव पर भी भारत ने आपत्ति जताई।

भारत ने कहा कि किसी एक विशेष धर्म के आधार पर विशेष दूत की नियुक्ति के सिद्धांत का वह समर्थन नहीं करता।

निष्कर्ष: संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने सभी प्रकार की धार्मिक घृणा और भेदभाव की निंदा करते हुए कहा कि वैश्विक मंच को किसी एक धर्म के आधार पर विभाजित नहीं किया जाना चाहिए और सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान और संरक्षण सुनिश्चित होना चाहिए।