मप्र भाजपा में अंतर्कलह तेज: मुख्यमंत्री ने चलते भाषण में टोका तो रूठ गए वरिष्ठ विधायक; वीआईपी कल्चर पर मोदी की नसीहत भूले बड़े नेता, सिंधिया से भी बनाई दूरी

स्थान: भोपाल/ग्वालियर

दिनांक: 30 जून, 2026

विशेष ब्यूरो, भोपाल:

मध्य प्रदेश भाजपा के भीतर सुलग रही अंदरूनी गुटबाजी और असंतोष की आग अब सार्वजनिक मंचों पर खुलकर सामने आने लगी है। ग्वालियर-चंबल संभाग से लेकर राजधानी भोपाल के सियासी गलियारों में बीते दो दिनों से एक हाई-प्रोफाइल सांगठनिक टकराव चर्चा का विषय बना हुआ है।

एक विकास कार्य के मुख्य मंच पर भाषण देने के दौरान खुद मुख्यमंत्री द्वारा बीच में ही टोके जाने से नाराज भाजपा के एक बेहद वरिष्ठ और रसूखदार विधायक बीच कार्यक्रम से रूठकर चले गए। वहीं, इस घटनाक्रम के बाद से स्थानीय स्तर पर नाराज गुट के विधायकों ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के दौरों और महत्वपूर्ण बैठकों से भी पूरी तरह दूरी बना ली है, जिससे संगठन की चिंताएं बढ़ गई हैं।

“आप बैठ जाइए, समय कम है”— जब सीएम की बात सुन मंच छोड़ गए विधायक

प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के अनुसार, यह पूरा वाकया एक संभागीय समीक्षा बैठक और विकास कार्यों के शिलान्यास समारोह के दौरान घटित हुआ।

  • क्या था पूरा मामला?: मंच पर भाजपा के क्षेत्रीय वरिष्ठ विधायक अपने क्षेत्र की समस्याओं और प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी को लेकर अपनी ही सरकार के सामने आक्रामक रूप से बात रख रहे थे। वे भाषण में थोड़े लंबे खिंच गए, जिससे मुख्य एजेंडा प्रभावित हो रहा था।
  • सीएम का सार्वजनिक हस्तक्षेप: मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री ने स्थिति को भांपते हुए विधायक को चलते भाषण के बीच में ही माइक के पास आकर टोक दिया। मुख्यमंत्री ने सहज लहजे में लेकिन दोटूक शब्दों में कहा, “माननीय विधायक जी, आपकी बातें नोट कर ली गई हैं। अब आप बैठ जाइए, हमारे पास समय की थोड़ी कमी है और आगे अन्य कार्यक्रम भी हैं।”
  • रूठकर बाहर निकले नेता जी: भरे मंच पर मुख्यमंत्री द्वारा इस तरह अचानक टोके जाने को वरिष्ठ विधायक बर्दाश्त नहीं कर पाए। उन्होंने तुरंत भाषण बंद किया और नाराजगी में मुख्यमंत्री की तरफ देखे बिना मंच से नीचे उतर गए। उनके समर्थक भी उनके पीछे-पीछे पंडाल से बाहर चले गए। हालांकि, बाद में संगठन के मंत्रियों ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन वे दोबारा कार्यक्रम में नहीं लौटे।

पीएम मोदी की नसीहत भूले नेता, वीआईपी कल्चर और ‘लंबे काफिले’ फिर लौटे

इस घटना ने भाजपा के भीतर चल रहे ‘अहंकार बनाम कार्यकर्ता’ के विवाद को फिर हवा दे दी है। हाल ही में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और विधायकों को सख्त हिदायत देते हुए ‘वीआईपी कल्चर’ (VIP Culture) से पूरी तरह दूर रहने की अपील की थी। पीएम मोदी ने साफ कहा था कि नेता जमीन पर आम जनता के बीच साधारण तरीके से जाएं, न कि हूटरों और भारी सुरक्षा के तामझाम के साथ।

दिखावे की सियासत:

मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री की इस नसीहत का असर हवा हवाई साबित हो रहा है। सूबे के बड़े नेताओं, मंत्रियों और यहां तक कि कुछ रसूखदार विधायकों के दौरों में फिर से 20 से 25 गाड़ियों के लंबे-लंबे काफिले, हूटरों का शोर और सड़कों पर आम जनता को रोककर बनाया जाने वाला ‘ग्रीन कॉरिडोर’ देखने को मिल रहा है। भोपाल से लेकर ग्वालियर तक वीआईपी कल्चर की यह वापसी स्थानीय कार्यकर्ताओं और जनता के बीच नाराजगी की वजह बन रही है, जिसे लेकर खुद पार्टी के ही कुछ निष्ठावान विधायक अंदरूनी रूप से आवाज उठा रहे हैं।

सिंधिया के कार्यक्रमों से बनाई दूरी; महाराज बनाम नाराज गुट की जंग?

इस पूरे सियासी ड्रामे का दूसरा सिरा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के क्षेत्रीय दौरों से जुड़ा है। सूत्रों की मानें तो जिस विधायक को मुख्यमंत्री ने मंच पर टोका था, वे और उनके साथी विधायक लंबे समय से ग्वालियर-चंबल संभाग में सिंधिया और उनके खेमे के मंत्रियों की अत्यधिक दखलअंदाजी से परेशान हैं।

  • बैठकों का बहिष्कार: पिछले तीन दिनों के दौरान केंद्रीय मंत्री सिंधिया के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सांगठनिक कार्यक्रम और विभागीय बैठकें हुईं। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि स्थानीय भाजपा विधायक और उनके समर्थक नेता इन सभी कार्यक्रमों से पूरी तरह गायब (नदारद) रहे।
  • बहाने और हकीकत: जब मीडिया ने नाराज विधायक से सिंधिया के कार्यक्रमों से दूरी बनाने पर सवाल किया, तो उन्होंने पारिवारिक कारणों और निजी व्यस्तता का हवाला देकर बात टाल दी। लेकिन उनके सोशल मीडिया हैंडल्स और करीबियों की मानें तो यह ‘महाराज’ के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ ‘नाराज’ पुराने भाजपाई गुट की सोची-समझी बगावत है।

भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट दिल्ली आलाकमान को भेज दी है। आगामी मानसून सत्र और संगठनात्मक फेरबदल से ठीक पहले मध्य प्रदेश भाजपा का यह आंतरिक असंतोष पार्टी के अनुशासन पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर रहा है।

मध्य प्रदेश भाजपा की इस अंतर्कलह पर दिल्ली आलाकमान के एक्शन, नाराज विधायक के अगले कदम और सूबे की हर राजनीतिक

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