स्थान: नई दिल्ली
दिनांक: 1 जुलाई, 2026
विशेष संवाददाता, नई दिल्ली:
वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति के मोर्चे पर एक बहुत बड़ा और युगांतरकारी बदलाव होने जा रहा है। भारत और जापान अब अपने द्विपक्षीय व्यापार से अमेरिकी डॉलर ($) की निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने की ऐतिहासिक तैयारी में हैं। नई दिल्ली में आज (1 जुलाई) से शुरू हो रहे 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन (16th India-Japan Annual Summit) के दौरान दोनों देशों के बीच सीधे स्थानीय मुद्राओं यानी ‘रुपए और येन’ (Rupee-Yen Trade Framework) में लेनदेन को लेकर अंतिम सहमति बनने के आसार हैं।
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अपनी पहली आधिकारिक भारत यात्रा पर बुधवार शाम दिल्ली पहुंच रहीं जापान की नवनिर्वाचित महिला प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची (Sanae Takaichi) के बीच हैदराबाद हाउस में होने वाली द्विपक्षीय बैठक के बाद जारी होने वाले ‘संयुक्त बयान’ (Joint Statement) में इस क्रांतिकारी फैसले की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।
तीसरे मध्यस्थ की छुट्टी: जानिए कैसे काम करेगा नया रुपया-येन फ्रेमवर्क?
वर्तमान में यदि कोई जापानी ऑटोमोबाइल कंपनी भारतीय निर्माता को कलपुर्जे बेचती है, तो दोनों देशों की कंपनियों को दोहरे ‘करेंसी कन्वर्जन’ (मुद्रा परिवर्तन) के दौर से गुजरना पड़ता है। जापानी कंपनी पहले येन को डॉलर में बदलती है और फिर भारतीय कंपनी उस डॉलर को रुपए में कन्वर्ट करती है। इसमें भारी कन्वर्जन फीस लगती है और डॉलर के उतार-चढ़ाव (volatility) का जोखिम भी बना रहता है।
- खुलेंगे स्पेशल वोस्ट्रो अकाउंट: इस नए फ्रेमवर्क के तहत जापान की गैर-निवासी वित्तीय संस्थाओं और कंपनियों को सीधे भारतीय बैंकों में विशेष खाते खोलने की अनुमति होगी।
- बचेगा करोड़ों का रेमिटेंस चार्ज: मध्यस्थ के रूप में डॉलर के हट जाने से दोनों देशों के व्यापारियों को विदेशी मुद्रा विनिमय शुल्क (Remittance & Conversion Charges) नहीं देना होगा, जिससे व्यापार की लागत में भारी कमी आएगी और ट्रांजैक्शन बेहद तेज गति से हो सकेंगे।
- मजबूत वित्तीय बैकअप: दोनों देशों के पास पहले से ही 75 अरब डॉलर (75 Billion USD) का एक द्विपक्षीय ‘करेंसी स्वैप समझौता’ मौजूद है, जो इस नए लोकल-करेंसी फ्रेमवर्क को एक मजबूत वित्तीय सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।
27 अरब डॉलर के व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार; निवेश का लक्ष्य भी बढ़ा
वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड 27.47 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है, जिसमें अकेले जापान ने भारत को 21.43 अरब डॉलर के सामान का निर्यात किया है।
10 ट्रिलियन येन का नया महा-लक्ष्य:
‘जापान-इंडिया जॉइंट विज़न फॉर द नेक्स्ट डिकेड’ के तहत जापानी सरकार ने भारत में अपने निवेश के पुराने लक्ष्य (5 ट्रिलियन येन) को संशोधित कर अगले एक दशक के लिए 10 ट्रिलियन येन (लगभग 5.8 लाख करोड़ रुपए) कर दिया है। रुपया-येन में सीधे व्यापार शुरू होने से भारत के एमएसएमई (MSME) और मध्यम वर्गीय जापानी निवेशकों के लिए निवेश के रास्ते पूरी तरह सुगम हो जाएंगे।
ग्लोबल साउथ और डी-डॉलरइजेशन की दिशा में भारत का बढ़ता दबदबा
यह कदम वैश्विक स्तर पर डॉलर के एकाधिकार को चुनौती देने की भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। भारत इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इंडोनेशिया और रूस के साथ स्थानीय मुद्रा (लोकल करेंसी) में व्यापार शुरू करने के सफल समझौतों पर हस्ताक्षर कर चुका है।
जापान जैसे दुनिया के सबसे विकसित और ‘जी-7’ (G-7) के प्रमुख सदस्य देश के साथ ऐसा वित्तीय तंत्र स्थापित करना भारत के बढ़ते कूटनीतिक रसूख को दर्शाता है। जापान का वित्त मंत्रालय चालू वित्त वर्ष 2026 के भीतर ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ इस संबंध में एक विस्तृत ‘मेमोरैंडम ऑफ कोऑपरेशन’ (MoC) पर हस्ताक्षर करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
सुरक्षा, सेमीकंडक्टर और ग्रीन अमोनिया पर भी होंगे 10 बड़े समझौते
3 जुलाई तक चलने वाले इस तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ताकाइची और पीएम मोदी के बीच आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ कई रणनीतिक क्षेत्रों पर भी गहन चर्चा होगी:
- सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स: दोनों देश सेमीकंडक्टर चिप्स की सप्लाई चेन को चीनी प्रभाव से मुक्त और लचीला (Resilient Supply Chain) बनाने के लिए बड़े तकनीकी आदान-प्रदान करेंगे।
- ओडिशा में ग्रीन अमोनिया प्रोजेक्ट: पर्यावरण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते हुए ओडिशा में एक मेगा ग्रीन अमोनिया प्लांट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा एडवांस्ड फार्मास्यूटिकल्स को लेकर करीब 10 महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) को अंतिम रूप दिया जाएगा।
