मुंबई/ठाणे, महाराष्ट्र | 10 सितंबर 2026। करीब आठ साल से फरार चल रहे कथित क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड के मुख्य आरोपी अमित मदनलाल लखनपाल को UAE में गिरफ्तार कर लिया गया है। उस पर Money Trade Coin (MTC) के नाम पर निवेशकों से करीब ₹113.10 करोड़ की कथित ठगी करने का आरोप है। भारतीय एजेंसियों द्वारा उसकी लोकेशन ट्रेस किए जाने के बाद UAE अधिकारियों ने उसे 1 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया। अब भारत सरकार उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।
2018 में सामने आया था पूरा मामला
यह मामला साल 2018 में सामने आया था, जब अमित लखनपाल और उसके सहयोगियों पर एक ऐसी क्रिप्टोकरेंसी योजना चलाने का आरोप लगा जिसमें निवेशकों को असाधारण मुनाफे का लालच दिया गया था।
जांच के मुताबिक निवेशकों को MTC में पैसा लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उन्हें बताया जाता था कि यह डिजिटल करेंसी भविष्य में सरकारी मान्यता हासिल कर सकती है और इसमें निवेश करने वालों को भारी रिटर्न मिलेगा।
इस मामले के सामने आने के बाद जून 2018 में ठाणे पुलिस ने अमित लखनपाल और उसके सहयोगियों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। हालांकि तब तक लखनपाल भारत छोड़ चुका था।
113 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश और कथित नुकसान
प्रवर्तन निदेशालय की जांच के अनुसार, अगस्त 2017 से अप्रैल 2018 के बीच निवेशकों को कथित तौर पर एक अनियमित क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के लिए प्रेरित किया गया।
जांच एजेंसी के मुताबिक इस पूरी गतिविधि के कारण निवेशकों को लगभग ₹113.10 करोड़ का नुकसान हुआ।
लखनपाल पर आरोप है कि उसने निवेशकों के बीच MTC को एक बड़े और भरोसेमंद वित्तीय अवसर के तौर पर पेश किया। निवेशकों को बड़े रिटर्न का भरोसा दिलाया गया और क्रिप्टोकरेंसी को भविष्य में सरकारी मान्यता मिलने की बात कही गई।
खुद को वित्त मंत्रालय का अधिकारी बताने का आरोप
जांच में यह भी आरोप सामने आया कि लखनपाल ने दिल्ली, पुणे और नासिक में सेमिनार आयोजित किए और खुद को कथित तौर पर वित्त मंत्रालय से जुड़ा अधिकारी बताकर निवेशकों का भरोसा जीतने की कोशिश की।
इन आयोजनों में निवेशकों को MTC में पैसा लगाने और भविष्य में बड़े लाभ मिलने का भरोसा दिलाया गया।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इन दावों का इस्तेमाल लोगों को निवेश के लिए आकर्षित करने के उद्देश्य से किया गया था।
कई कंपनियों और प्लेटफॉर्म का नेटवर्क
जांच के दौरान इस कथित नेटवर्क से जुड़े कई अन्य प्लेटफॉर्म और एक्सचेंज भी सामने आए। इनमें Coin Deposit Ratio, MTC Banque, MTCX India और Cryptozaniya जैसे नाम शामिल हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, MTC की कीमतों में कथित तौर पर हेरफेर किया गया। बाद में ट्रेडिंग और पैसे निकालने की सुविधाएं बंद होने लगीं, जिसके कारण कई निवेशक अपना मूल निवेश और वादा किया गया रिटर्न वापस नहीं निकाल सके।
भारत से फरार होकर UAE पहुंचा था आरोपी
मामला सामने आने और पुलिस कार्रवाई शुरू होने के बाद अमित लखनपाल भारत से फरार हो गया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, लखनपाल और उसके कुछ सहयोगियों ने Antigua and Barbuda के पासपोर्ट हासिल किए थे और बाद में विदेश में रहने लगे। जांच में उसके UAE में कथित तौर पर अलग पहचान के साथ रहने की बात भी सामने आई थी।
भारतीय एजेंसियों ने ट्रेस की लोकेशन
मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ भारतीय एजेंसियों ने विदेश में मौजूद आरोपी की गतिविधियों और लोकेशन पर नजर रखी। उसकी जानकारी UAE अधिकारियों के साथ साझा किए जाने के बाद कार्रवाई हुई।
अमित लखनपाल को 1 सितंबर 2026 को UAE में गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ कार्रवाई के बाद अब भारत की ओर से उसे वापस लाने यानी प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
ED की कार्रवाई में करीब 1 करोड़ रुपये जब्त
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने अगस्त 2026 में मुंबई और ठाणे से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान भी चलाया था।
इन तलाशी कार्रवाइयों के दौरान जांच एजेंसी ने करीब ₹1 करोड़ नकद, डिजिटल उपकरण और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए थे। एजेंसी का कहना था कि ये सामान कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से संबंधित हो सकते हैं।
पत्नी के खिलाफ भी विदेश जाने की कोशिश का मामला
जांच के दौरान लखनपाल की पत्नी से जुड़ी जानकारी भी सामने आई। जांच एजेंसी के अनुसार, उसने 2023-24 के दौरान तीन बार भारत से बाहर जाने की कोशिश की थी, लेकिन एयरपोर्ट पर जारी अलर्ट के कारण उसे रोका गया।
बाद में जांच में यह भी सामने आया कि उसे कथित तौर पर Antigua का पासपोर्ट उपलब्ध कराया गया था और वह पिछले वर्ष उस पासपोर्ट के जरिए देश से बाहर चली गई।
आठ साल बाद बड़ी कार्रवाई
2018 में FIR दर्ज होने के बाद से अमित लखनपाल इस मामले में फरार था। करीब आठ साल बाद UAE में उसकी गिरफ्तारी को जांच की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अब भारतीय एजेंसियों के सामने अगली बड़ी चुनौती आरोपी को UAE से भारत लाना और मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई पूरी करना है। प्रत्यर्पण प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारत में उसके खिलाफ दर्ज मामले में आगे की जांच और न्यायिक कार्रवाई हो सकेगी।
मामले में जांच अभी जारी है और कथित क्रिप्टो फ्रॉड से जुड़े अन्य लोगों तथा पैसों के पूरे नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।
