स्थान: इंफाल / कोहिमा
दिनांक: 9 जुलाई, 2026
विशेष संवाददाता, इंफाल:
मेइतेई-कुकी हिंसा की आग से अभी मणिपुर पूरी तरह उबरा भी नहीं था कि पूर्वोत्तर के इस सीमावर्ती राज्य में एक और खतरनाक आंतरिक मोर्चा खुल गया है। राज्य के पहाड़ी जिलों में पिछले पांच महीनों से जारी नगा और कुकी समुदायों (Naga-Kuki Conflict) के बीच का जमीन और वर्चस्व का विवाद अब हिंसक सशस्त्र संघर्ष में तब्दील हो चुका है। इस नए जातीय त्रिकोण में अब तक 25 से अधिक नागरिक और सुरक्षाकर्मी अपनी जान गंवा चुके हैं।
इस बीच, बुधवार को उग्रवादियों द्वारा शांति व्यवस्था में तैनात देश के सबसे पुराने अर्धसैनिक बल असम राइफल्स (Assam Rifles) के एक काफिले को निशाना बनाकर किए गए आईईडी (IED) धमाके और घात लगाकर किए गए हमले (Ambush) में दो जांबाज जवान शहीद हो गए। आज सुबह इंफाल एयरपोर्ट पर दोनों शहीद जवानों को पूर्ण सैन्य और राजकीय सम्मान (State Honours) के साथ भावभीनी विदाई दी गई, जिसके बाद उनके पार्थिव शरीरों को विशेष सैन्य विमान से उनके पैतृक गांवों के लिए रवाना कर दिया गया है।
ताजा हमला: उखरुल-सेनापति सीमा पर असम राइफल्स की पेट्रोलिंग टीम पर एम्बुश
असम राइफल्स के महानिरीक्षक (IGAR-South) कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कायराना हमला नगा बहुल उखरुल (Ukhrul) और सेनापति जिलों की सीमा के समीप एक घने जंगली इलाके में हुआ।
- आईईडी और भारी गोलाबारी: असम राइफल्स की 10वीं बटालियन की टीम जब कानून-व्यवस्था की बहाली के लिए गश्त (Patrol) पर थी, तभी सड़क किनारे छिपाकर रखे गए एक शक्तिशाली रिमोट-कंट्रोल आईईडी में विस्फोट किया गया। इसके तुरंत बाद पहाड़ी की चोटी पर छिपे उग्रवादियों ने स्वचालित हथियारों (Automatic Weapons) से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
- अदम्य साहस और शहादत: सुरक्षा बलों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की और करीब 45 मिनट तक चली इस मुठभेड़ में दो उग्रवादियों को मार गिराया। हालांकि, इस क्रॉस-फायरिंग में असम राइफल्स के हवलदार राम बाबू राय (बिहार) और राइफलमैन थंगजाम सिंह (मणिपुर) गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया।
मैतई के बाद अब ‘नगा-कुकी’ जंग: क्यों सुलग उठा यह नया मोर्चा?
केंद्रीय खुफिया एजेंसियों (IB) की रिपोर्ट के मुताबिक, मणिपुर के पहाड़ी जिलों में चल रहा यह नया संघर्ष 1993 के कुख्यात नगा-कुकी नरसंहार की पुरानी कड़वी यादों और जमीन के सीमांकन को लेकर दोबारा भड़का है।
5 महीने की हिंसा का मुख्य कारण:
इस साल फरवरी से थौबाल, उखरुल और तामेंगलोंग जिलों के सीमावर्ती गांवों में कुकी समुदाय के विस्थापित लोगों द्वारा नए बस्तियां बसाने की कोशिशों का स्थानीय नगा संगठनों (विशेषकर NSCN-IM समर्थित समूहों) ने कड़ा विरोध किया है। दोनों पक्षों का मानना है कि इस संवेदनशील बफर ज़ोन पर कब्जा करने से उनके पारंपरिक अधिकार खत्म हो जाएंगे। पिछले 5 महीनों में हुए सिलसिलेवार छिटपुट हमलों, आगजनी और अपहरण की घटनाओं में अब तक 25 स्थानीय आदिवासियों की मौत हो चुकी है, जिसके चलते 8,000 से अधिक लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं।
मणिपुर जातीय संघर्ष का बदला हुआ और बेहद जटिल त्रिकोण
| संघर्ष का स्वरूप | प्रभावित मुख्य जिले | वर्तमान स्थिति और आंतरिक चुनौतियां |
| मेइतेई बनाम कुकी (पुरानी हिंसा) | चूराचांदपुर, बिष्णुपुर, इंफाल घाटी | बफर जोन में सेना की तैनाती से स्थिति नियंत्रण में, लेकिन कूटनीतिक तनाव बरकरार। |
| नगा बनाम कुकी (नया संकट) | उखरुल, सेनापति, तामेंगलोंग | पिछले 5 महीनों में 25 मौतें; असम राइफल्स पर हमले के बाद जंगलों में भारी घेराबंदी। |
इंफाल में दी गई राजकीय विदाई; मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने जताया दुख
आज सुबह इंफाल के ‘तुलिहाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे’ पर एक विशेष शोक सभा का आयोजन किया गया, जहां मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, सेना के कोर कमांडर और असम राइफल्स के शीर्ष अधिकारियों ने शहीदों के ताबूतों पर पुष्पचक्र अर्पित किए।
मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने भावुक होते हुए कहा, “हमारे इन जवानों ने मणिपुर में शांति बनाए रखने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। पूर्वोत्तर की धरती को लहूलुहान करने वाले उग्रवादी तत्वों को ढूंढ-ढूंढ कर नेस्तनाबूद किया जाएगा।” केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के निर्देश पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 5 अतिरिक्त कंपनियों को संवेदनशील नगा-कुकी बफर जिलों में एयरलिफ्ट कर तैनात कर दिया गया है और पूरे इलाके में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू है।
