भोपाल, 7 सितंबर 2026: मध्य प्रदेश में IAS अधिकारी नेहा मारव्या सिंह का एक साल के भीतर चौथी बार तबादला चर्चा का विषय बन गया है। 5 सितंबर को जारी हुई मध्य प्रदेश सरकार की तबादला सूची में उनकी जिम्मेदारी एक बार फिर बदल दी गई। इसके बाद नेहा मारव्या ने IAS अधिकारियों के ग्रुप में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लगातार हो रहे तबादलों और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल उठाए।
नेहा का कहना है कि मौजूदा पद पर जिम्मेदारी संभालने के करीब 50 दिन के भीतर ही उनका तबादला कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसी अधिकारी को नई जिम्मेदारी और विभाग की कार्यप्रणाली समझने के लिए पर्याप्त समय दिए बिना बार-बार पद क्यों बदला जा रहा है।
एक साल में चौथी बार बदली जिम्मेदारी
मध्य प्रदेश सरकार की 5 सितंबर की तबादला सूची में 2011 बैच की IAS अधिकारी नेहा मारव्या सिंह का नाम भी शामिल था। सरकार ने उन्हें संचालक, आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाएं और MAPCET के प्रबंध संचालक पद से हटाकर मध्य प्रदेश अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी दी है।
यह बदलाव ऐसे समय हुआ जब उन्हें वर्तमान जिम्मेदारी संभाले हुए ज्यादा समय नहीं हुआ था। इसी वजह से उनका तबादला प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।
50 दिन में तबादले पर नेहा ने जताई नाराजगी
तबादला सूची में नाम आने के बाद नेहा मारव्या ने IAS अधिकारियों के ग्रुप में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह समझती हैं कि IAS अधिकारी के तौर पर सरकार को उन्हें जहां जरूरत हो वहां पदस्थ करने का अधिकार है और उन्होंने हमेशा सरकारी आदेशों का सम्मान किया है।
हालांकि, इस बार का तबादला उन्हें बेहद निराशाजनक लगा। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर सवाल उठाया कि नई जिम्मेदारी संभालने के करीब 50 दिन बाद ही उन्हें वहां से हटा दिया गया।
‘शिकायत मैंने की, कार्रवाई मुझ पर क्यों?’
नेहा मारव्या ने अपने संदेश में अपने साथ काम करने वाले कुछ कर्मचारियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनके मुताबिक, कुछ कर्मचारियों ने उनके खिलाफ विरोध का माहौल बनाया और उन्हें तबादला कराने की धमकी तक दी।
नेहा का दावा है कि उन्होंने कर्मचारियों की कथित अनुशासनहीनता, फाइलें रोकने और उनके साथ कथित दुर्व्यवहार की शिकायत उचित माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई थी। उन्हें उम्मीद थी कि शिकायत के आधार पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
लेकिन उनके मुताबिक, कार्रवाई कर्मचारियों के खिलाफ होने के बजाय उनका ही तबादला कर दिया गया।
‘क्या अधीनस्थ अधिकारी का ट्रांसफर करा सकते हैं?’
नेहा ने अपने संदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि अगर किसी अधिकारी के अधीन काम करने वाले कर्मचारी उसके खिलाफ संगठित होकर उसका तबादला कराने में सफल हो जाएं, तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था में क्या संदेश जाएगा।
उनका कहना था कि एक IAS अधिकारी को अपने विभाग में काम करने और निर्णय लेने के लिए पर्याप्त प्रशासनिक समर्थन मिलना चाहिए। अगर अधिकारी को लगातार दबाव में काम करना पड़े और छोटी अवधि में ही उसकी पोस्टिंग बदल जाए, तो इससे काम की निरंतरता प्रभावित हो सकती है।
‘एक महीने में कोई अधिकारी काम कैसे समझेगा?’
नेहा ने अपने छोटे कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि किसी नए विभाग में पहुंचने के बाद वहां की कार्यप्रणाली, फाइलों, कर्मचारियों और योजनाओं को समझने में समय लगता है।
उन्होंने कहा कि जब तक वह किसी जिम्मेदारी को ठीक से समझ पाती हैं, तब तक उनकी पोस्टिंग बदल जाती है। ऐसे में किसी अधिकारी के लिए लंबे समय की योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना मुश्किल हो सकता है।
लंबे समय तक चुप रहने का दावा
अपने संदेश में नेहा ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक चुप्पी और धैर्य बनाए रखा। उन्होंने दावा किया कि उन्हें कई बार पर्याप्त काम नहीं दिया गया और उन्हें किनारे रखे जाने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
उनके अनुसार, उन्हें उम्मीद थी कि समय के साथ परिस्थितियां बेहतर होंगी, लेकिन उनके मुताबिक स्थिति और कठिन होती चली गई। अब उनके अधीन काम करने वाले कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर तबादले की धमकी दिए जाने तक की स्थिति बन गई।
‘हर बार साजिश करने वाले जीतते हैं’
नेहा मारव्या के संदेश का सबसे चर्चित हिस्सा उनका यह कथन रहा कि “Always conspirators win and I fail”। उन्होंने इस टिप्पणी के जरिए अपनी निराशा और व्यवस्था के प्रति असंतोष जाहिर किया।
उन्होंने यह भी कहा कि आज अगर वह इस स्थिति का सामना कर रही हैं तो भविष्य में कोई दूसरा IAS अधिकारी भी ऐसी परिस्थिति का सामना कर सकता है।
IAS एसोसिएशन की भूमिका पर भी सवाल
नेहा ने अपने संदेश में IAS अधिकारियों के संगठन की भूमिका को लेकर भी अपनी अपेक्षाएं जाहिर कीं। उन्होंने संकेत दिया कि संगठन केवल बधाई और शुभकामनाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि अधिकारियों के सामने आने वाली वास्तविक समस्याओं पर भी चर्चा होनी चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, उनकी पोस्ट के बाद कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों ने उन्हें अपने कामकाज और व्यवहार को लेकर आत्ममंथन करने की सलाह भी दी।
पहले भी रही हैं चर्चा में
IAS नेहा मारव्या सिंह पहले भी अपनी पोस्टिंग को लेकर चर्चा में रही हैं। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, डिंडोरी कलेक्टर के रूप में उनकी पोस्टिंग भी ज्यादा लंबी नहीं चली थी। रिपोर्ट में उनके पुराने पदस्थापनों और काम से जुड़ी शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि, वर्तमान मामले में कर्मचारियों द्वारा लगाए गए या नेहा द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि को अलग से स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं माना जा सकता। यह बातें मुख्य रूप से नेहा द्वारा IAS ग्रुप में साझा किए गए उनके पक्ष पर आधारित हैं।
सरकार ने 11 IAS अधिकारियों का किया तबादला
5 सितंबर को मध्य प्रदेश सरकार ने कुल 11 IAS अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया था। इस फेरबदल में नेहा मारव्या के अलावा कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की पोस्टिंग भी बदली गई।
नेहा को नई जिम्मेदारी के तौर पर मध्य प्रदेश अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम के प्रबंध संचालक का दायित्व सौंपा गया है।
लगातार तबादलों ने खड़े किए सवाल
IAS अधिकारियों का तबादला प्रशासनिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है और सरकार अपनी जरूरत के अनुसार अधिकारियों की जिम्मेदारी बदल सकती है। लेकिन नेहा मारव्या के मामले में लगातार कम अवधि में पोस्टिंग बदलने और फिर उनके द्वारा सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताने के कारण मामला चर्चा में आ गया है।
एक साल में चौथी बार तबादला और इस बार करीब 50 दिन में जिम्मेदारी बदलने की बात ने प्रशासनिक हलकों में बहस छेड़ दी है।
