भोपाल/नई दिल्ली, 4 सितंबर 2026। मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। गुरुवार को नरोत्तम मिश्रा ने भोपाल में अपना निर्धारित कार्यक्रम अचानक रद्द किया और दिल्ली के लिए रवाना हो गए। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद मध्य प्रदेश भाजपा के राजनीतिक और संगठनात्मक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है।
भोपाल में था कार्यक्रम, अचानक बदला प्लान
जानकारी के मुताबिक नरोत्तम मिश्रा पिछले कुछ दिनों से भोपाल में थे। गुरुवार, 3 सितंबर को उन्हें भोपाल के नीलबड़ इलाके में भाजपा के एक पार्षद के यहां आयोजित दाल-बाटी कार्यक्रम में शामिल होना था। यह कार्यक्रम पहले से निर्धारित था, लेकिन अचानक इसे रद्द कर नरोत्तम मिश्रा दिल्ली के लिए रवाना हो गए। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की।
इस अचानक हुए कार्यक्रम परिवर्तन ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। हालांकि पार्टी की ओर से यह नहीं बताया गया है कि नरोत्तम मिश्रा और नितिन नवीन के बीच मुलाकात का एजेंडा क्या था, लेकिन इसे मध्य प्रदेश भाजपा में चल रही संगठनात्मक गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
नितिन नवीन से मुलाकात, नरोत्तम ने बताया सौजन्य भेंट
नरोत्तम मिश्रा ने खुद सोशल मीडिया पर भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ मुलाकात की तस्वीर साझा की। उन्होंने मुलाकात को सौजन्य भेंट बताते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष का मार्गदर्शन प्राप्त करने की बात कही।
हालांकि दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। यही वजह है कि इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
दिल्ली जाने से पहले भोपाल में भी बढ़ी थी सक्रियता
नरोत्तम मिश्रा के दिल्ली दौरे से पहले भोपाल में भी भाजपा के कई बड़े नेताओं की उनसे मुलाकात हो चुकी है। रिपोर्टों के मुताबिक भाजपा के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल ने नरोत्तम मिश्रा से उनके भोपाल स्थित आवास पर मुलाकात की थी। इसके बाद प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और विजय शाह भी उनसे मिले थे। इन मुलाकातों ने पहले ही मध्य प्रदेश भाजपा के भीतर नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक सक्रियता को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी थीं।
अब इन मुलाकातों के बाद दिल्ली में सीधे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से नरोत्तम मिश्रा की बैठक ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है।
दतिया उपचुनाव के बाद बदला सियासी माहौल
नरोत्तम मिश्रा की बढ़ती सक्रियता को दतिया विधानसभा उपचुनाव के राजनीतिक घटनाक्रम से भी जोड़कर देखा जा रहा है। दतिया को लंबे समय से नरोत्तम मिश्रा का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माना जाता रहा है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद दतिया उपचुनाव में भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया और पार्टी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया।
उपचुनाव में कांग्रेस के कुंवर घनश्याम सिंह ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों से हराया। इस परिणाम के बाद भाजपा के भीतर दतिया को लेकर संगठनात्मक स्तर पर भी चर्चा तेज हुई।
दतिया संगठन को लेकर भी चर्चा
रिपोर्टों के मुताबिक उपचुनाव के बाद दतिया जिले की भाजपा कार्यकारिणी को भंग किया गया था और नई कार्यकारिणी को लेकर प्रक्रिया अभी चर्चा का विषय बनी हुई है। ऐसे में नरोत्तम मिश्रा की दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष से मुलाकात को संगठनात्मक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि नितिन नवीन और नरोत्तम मिश्रा के बीच हुई बैठक में दतिया संगठन, मध्य प्रदेश भाजपा या किसी संभावित नई जिम्मेदारी को लेकर चर्चा हुई या नहीं।
क्या नरोत्तम मिश्रा को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी?
नरोत्तम मिश्रा की दिल्ली यात्रा के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या पार्टी उन्हें संगठन में कोई नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रही है।
पिछले कुछ समय से उनके नाम को लेकर अलग-अलग राजनीतिक चर्चाएं सामने आती रही हैं। कभी प्रदेश संगठन में भूमिका तो कभी राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी को लेकर कयास लगाए गए, लेकिन फिलहाल भाजपा की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इसलिए नितिन नवीन से हुई मुलाकात को नई जिम्मेदारी का सीधा संकेत मानना अभी जल्दबाजी होगी। इतना जरूर है कि लगातार बड़े नेताओं से मुलाकात और अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से बैठक ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नरोत्तम मिश्रा को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
राजनीति में नेताओं की अचानक होने वाली यात्राएं और बंद कमरे में होने वाली मुलाकातें अक्सर चर्चा का विषय बन जाती हैं। नरोत्तम मिश्रा के मामले में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। एक तरफ भोपाल में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का उनसे मिलना और दूसरी तरफ निर्धारित कार्यक्रम को रद्द कर दिल्ली पहुंचना तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात करना कई सवाल खड़े कर रहा है।
हालांकि भाजपा की ओर से फिलहाल इसे सामान्य राजनीतिक मुलाकात और संगठन से जुड़े विषयों पर बातचीत के रूप में ही बताया गया है। नरोत्तम मिश्रा ने भी सार्वजनिक रूप से इसे नितिन नवीन से सौजन्य भेंट और मार्गदर्शन प्राप्त करने की मुलाकात बताया है।
आगे क्या होगा, इस पर नजर
फिलहाल नरोत्तम मिश्रा को लेकर किसी नई जिम्मेदारी की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन दतिया उपचुनाव के बाद उनका दोबारा सक्रिय होना, भोपाल में भाजपा के बड़े नेताओं से मुलाकात और इसके तुरंत बाद दिल्ली जाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मिलना मध्य प्रदेश भाजपा की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि आने वाले दिनों में भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व मध्य प्रदेश संगठन में कोई बदलाव करता है या नरोत्तम मिश्रा को कोई नई भूमिका दी जाती है। फिलहाल इतना जरूर है कि उनकी दिल्ली यात्रा ने मध्य प्रदेश भाजपा के सियासी समीकरणों पर चर्चा को फिर से तेज कर दिया है।
