इंदौर | 2 नवंबर 2026
दीपावली के बाद मनाया जाने वाला गोवर्धन पूजा का पर्व इस साल तारीख को लेकर चर्चा में है। कुछ पंचांगों में गोवर्धन पूजा की तारीख 9 नवंबर बताई गई है, जबकि कई कैलेंडर में यह पर्व 10 नवंबर को मनाने का उल्लेख है। इसकी मुख्य वजह कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का दोनों दिनों में होना है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, गोवर्धन पूजा कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की जाती है। साल 2026 में प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर शुरू होकर 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे तक रहेगी।
इंदौर में 9 नवंबर को शाम का पूजा मुहूर्त
इंदौर के लिए उपलब्ध पंचांग के अनुसार, गोवर्धन पूजा सोमवार, 9 नवंबर 2026 को की जा सकती है। इस दिन शाम का पूजा मुहूर्त दोपहर 3 बजकर 31 मिनट से शाम 5 बजकर 45 मिनट तक बताया गया है। यह मुहूर्त 2 घंटे 14 मिनट का रहेगा।
वहीं, उदया तिथि के आधार पर कई पंचांगों में गोवर्धन पूजा 10 नवंबर, मंगलवार को मनाने की सलाह दी गई है। नई दिल्ली के पंचांग में 10 नवंबर को सुबह 6 बजकर 40 मिनट से 8 बजकर 50 मिनट तक प्रातःकालीन पूजा मुहूर्त दिया गया है।
गोवर्धन पूजा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
| विवरण | तारीख और समय |
|---|---|
| प्रतिपदा तिथि प्रारंभ | 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे |
| प्रतिपदा तिथि समाप्त | 10 नवंबर, दोपहर 2:00 बजे |
| इंदौर में शाम का पूजा मुहूर्त | 9 नवंबर, दोपहर 3:31 से शाम 5:45 बजे |
| नई दिल्ली में प्रातःकालीन मुहूर्त | 10 नवंबर, सुबह 6:40 से 8:50 बजे |
| गोवर्धन पूजा का पर्व | स्थानीय पंचांग और पूजा परंपरा के अनुसार 9 या 10 नवंबर |
क्यों मनाई जाती है गोवर्धन पूजा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को देवराज इंद्र के स्थान पर गोवर्धन पर्वत और प्रकृति की पूजा करने का संदेश दिया था। इससे नाराज होकर इंद्र ने ब्रज में तेज बारिश शुरू कर दी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों और उनके पशुओं को वर्षा से बचाया था।
इसी घटना की याद में हर साल गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। यह पर्व प्रकृति, पशुधन और जीवन में अन्न के महत्व का भी प्रतीक माना जाता है।
अन्नकूट और गौ पूजा का विशेष महत्व
गोवर्धन पूजा के दिन घरों और मंदिरों में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है। उसे फूलों और रंगों से सजाकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। कई स्थानों पर गायों की पूजा कर उन्हें चारा खिलाने की परंपरा भी है।
इस अवसर पर अन्नकूट तैयार किया जाता है। इसमें विभिन्न प्रकार के अनाज, सब्जियां, मिठाइयां और पकवान शामिल होते हैं। इन्हें भगवान श्रीकृष्ण को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है। कई मंदिरों में छप्पन भोग लगाने की परंपरा भी निभाई जाती है।
ध्यान दें: 9 और 10 नवंबर की तारीख का अंतर पूजा की गणना और स्थानीय पंचांग परंपरा के कारण है। इंदौर में पूजा करने वाले श्रद्धालु स्थानीय पंचांग या अपने मंदिर की परंपरा के अनुसार समय तय करें।
