गांधीनगर, गुजरात | 2 नवंबर 2026
दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही गुजरात सरकार ने जेलों में सजा काट रहे कैदियों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य सरकार ने विभिन्न जेलों में बंद 143 पात्र कैदियों को 15 दिनों की विशेष दिवाली पैरोल देने की मंजूरी दी है। इस फैसले के तहत कैदी धनतेरस यानी 6 नवंबर 2026 से पैरोल पर जेल से बाहर आ सकेंगे और अपने परिवार के साथ दीपावली का त्योहार मना सकेंगे।
सरकार की इस पहल को कैदी कल्याण और जेल सुधार कार्यक्रम का हिस्सा बताया गया है। इस बार पैरोल पाने वाले कैदियों में 103 पुरुष और 40 महिलाएं शामिल हैं। यह सुविधा राज्य की पात्र महिला कैदियों और 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पुरुष कैदियों को दी जाएगी।
6 नवंबर से शुरू होगी 15 दिन की पैरोल
गुजरात सरकार की मंजूरी के बाद 143 कैदियों को धनतेरस के दिन यानी 6 नवंबर से 15 दिनों के लिए अस्थायी रूप से जेल से बाहर रहने की अनुमति दी जाएगी। इस दौरान वे अपने परिवार के सदस्यों के साथ समय बिता सकेंगे और दिवाली का त्योहार मना सकेंगे।
राज्य सरकार के मुताबिक, यह व्यवस्था उन पात्र कैदियों के लिए है, जो लंबे समय से जेल में सजा काट रहे हैं और त्योहार के अवसर पर अपने परिवार से मिलना चाहते हैं।
103 बुजुर्ग पुरुष और 40 महिला कैदियों को मिलेगा लाभ
इस बार पैरोल के लिए कुल 143 कैदियों को पात्र माना गया है। इनमें 103 पुरुष कैदी ऐसे हैं, जिनकी उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक है। इसके अलावा 40 महिला कैदियों को भी इस सुविधा के तहत पैरोल दी जाएगी।
सरकार का मानना है कि त्योहार के दौरान परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलने से कैदियों के सामाजिक और पारिवारिक संबंध बनाए रखने में मदद मिलेगी।
साल 2003 से चली आ रही है यह परंपरा
गुजरात में दिवाली के अवसर पर पात्र कैदियों को 15 दिनों की पैरोल देने की परंपरा नई नहीं है। राज्य सरकार वर्ष 2003 से हर साल दीपावली के दौरान यह सुविधा प्रदान करती आ रही है।
इस नीति के तहत पात्र महिला कैदियों और 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के पुरुष कैदियों को अपने परिवार के साथ त्योहार मनाने का अवसर दिया जाता है। इस साल भी इसी व्यवस्था के तहत 143 कैदियों को लाभ देने का निर्णय लिया गया है।
किन कैदियों को नहीं मिलेगी पैरोल?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि दिवाली पर मिलने वाली यह विशेष पैरोल सभी कैदियों के लिए नहीं है। गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए और निर्धारित श्रेणियों में आने वाले कैदियों को इस सुविधा से बाहर रखा गया है।
गुजरात जेल एवं सुधारात्मक प्रशासन विभाग के पुलिस महानिदेशक डॉ. केएलएन राव के अनुसार, निम्नलिखित श्रेणियों के कैदी इस पैरोल के पात्र नहीं होंगे:
- जिन कैदियों की अपील हाईकोर्ट में लंबित है।
- एनआरआई और दूसरे राज्यों के निवासी कैदी।
- NDPS एक्ट, TADA और POTA के तहत सजा काट रहे कैदी।
- आतंकवादी गतिविधियों में शामिल या राज्य की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले अपराधों में दोषी कैदी।
- एक से अधिक अपराधों में दोषी ठहराए गए कैदी।
- दुष्कर्म, अपहरण, लूट, डकैती, चोरी और जबरन वसूली जैसे गंभीर अपराधों में शामिल कैदी।
- जिन कैदियों के खिलाफ निवारक हिरासत (Preventive Detention) के आदेश लागू हैं।
कैदी कल्याण और जेल सुधार की दिशा में पहल
गुजरात सरकार का यह फैसला कैदियों के पुनर्वास और पारिवारिक संबंधों को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जेल में लंबे समय तक रहने वाले कैदियों के लिए परिवार से संपर्क और सामाजिक जुड़ाव बनाए रखना पुनर्वास प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।
सरकार की ओर से दी जा रही यह विशेष पैरोल पात्र कैदियों को त्योहार के दौरान अपने परिजनों के साथ रहने का अवसर प्रदान करेगी। हालांकि, सभी कैदियों को निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करना होगा।
इस तरह गुजरात में इस साल 143 कैदी अपने परिवार के साथ दीपावली मना सकेंगे। धनतेरस से शुरू होने वाली यह 15 दिवसीय पैरोल सुविधा राज्य की वर्ष 2003 से चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाएगी।
