‘मैं भी इंसान हूं, कई बार मानसिक रूप से थक जाता हूं’, गौतम गंभीर ने खोला दिल; बोले- दबाव झेलने को हूं तैयार

हैमिल्टन | 2 नवंबर 2026

भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने अपने व्यस्त कार्यक्रम और लगातार बढ़ते काम के दबाव को लेकर खुलकर बात की है। न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के आखिरी मुकाबले के बाद गंभीर ने स्वीकार किया कि तीनों फॉर्मेट में टीम इंडिया की जिम्मेदारी संभालते हुए कई बार वह मानसिक रूप से थक जाते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह इस दबाव का सामना करने के लिए तैयार हैं।

गंभीर ने कहा कि वह दबाव झेल सकते हैं और जरूरत पड़ने पर गोली भी खा सकते हैं। यहां उन्होंने ‘गोली’ यानी अंग्रेजी शब्द Bullet का जिक्र किया, न कि किसी दवा की गोली का। उन्होंने यह भी माना कि आखिरकार वह भी एक इंसान हैं और कभी-कभी मानसिक थकान महसूस होना स्वाभाविक है।

12 सीरीज में संभाली टीम इंडिया की जिम्मेदारी

गंभीर के लिए साल 2026 काफी व्यस्त रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह अब तक भारतीय टीम के साथ 12 सीरीज में मुख्य कोच की भूमिका निभा चुके हैं। खिलाड़ियों को अलग-अलग फॉर्मेट में रोटेशन और आराम के जरिए ब्रेक मिल जाता है, लेकिन तीनों फॉर्मेट की जिम्मेदारी संभालने के कारण गंभीर को लगातार टीम के साथ रहना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि भारत जैसी टीम को कोच करना आसान नहीं है। खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ पर हर मैच में बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव रहता है। प्रशंसकों को टीम से हर मुकाबले में जीत की उम्मीद होती है, जबकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में परिस्थितियां और चुनौतियां लगातार बदलती रहती हैं।

‘डर और बहाने के लिए मेरी सोच में जगह नहीं’

गंभीर ने अपने काम करने के तरीके पर बात करते हुए कहा कि उनके शब्दकोश और विचारधारा में डर के लिए कोई जगह नहीं है। उनका मानना है कि पेशेवर खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए और मुश्किल परिस्थितियों में बहाने नहीं बनाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि लगातार यात्रा करना, अलग-अलग परिस्थितियों में टीम को तैयार करना और हर मुकाबले के लिए रणनीति बनाना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन वह इस जिम्मेदारी का आनंद ले रहे हैं।

खिलाड़ियों को टीम से बाहर रखने का फैसला भी आसान नहीं

गंभीर ने कोचिंग की एक और चुनौती पर बात की। उनके मुताबिक, किसी प्रतिभाशाली खिलाड़ी को यह बताना कि उसे प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलेगी, कोच के लिए आसान काम नहीं होता।

उन्होंने कहा कि उनका काम लोकप्रिय फैसले लेना नहीं, बल्कि टीम के हित में सही निर्णय करना है। ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों को भरोसा और स्पष्टता देना जरूरी है। गंभीर के अनुसार, खिलाड़ियों से बातचीत में ईमानदारी और पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है।

भारत ने 3-2 से जीती टी20 सीरीज

न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में भारत ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बना ली थी। हालांकि, न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीतकर सीरीज का अंतर 3-2 कर दिया।

हैमिल्टन में खेले गए पांचवें टी20 मुकाबले में न्यूजीलैंड ने भारत को सात विकेट से हराया। इसके बावजूद गंभीर ने भारतीय खिलाड़ियों के शुरुआती प्रदर्शन की तारीफ की। उन्होंने बताया कि टीम को न्यूजीलैंड पहुंचने के बाद तैयारी के लिए केवल एक अभ्यास सत्र मिला था। लंबी यात्रा और नई परिस्थितियों के बावजूद शुरुआती तीन मैच जीतना खिलाड़ियों के प्रयास को दर्शाता है।

अभिषेक शर्मा की तकनीक सुधारने पर भी दिया ध्यान

गंभीर ने युवा बल्लेबाज अभिषेक शर्मा के खेल में सुधार को लेकर भी बात की। उन्होंने बताया कि न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में अभिषेक को ऑफ स्पिन गेंदबाजी के सामने कुछ परेशानी हुई थी। ऐसे में उन्होंने नेट्स में अभिषेक के साथ काम किया और उनकी तकनीक में सुधार के लिए सुझाव दिए।

गंभीर का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में विपक्षी टीमें लगातार खिलाड़ियों के खेल का विश्लेषण करती हैं। इसलिए हर बल्लेबाज को अपनी कमजोरियों पर काम करते हुए खेल के अलग-अलग पहलुओं में सुधार करते रहना चाहिए।

गंभीर के बयान से साफ है कि टीम इंडिया की कोचिंग में जीत की जिम्मेदारी के साथ-साथ लगातार मानसिक दबाव भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने थकान को स्वीकार किया, लेकिन फिलहाल इस चुनौती से पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया।

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