Dhanteras 2026: घर की उत्तर-उत्तर-पूर्व दिशा में रखें पानी से भरा गिलास, जानें भगवान धन्वंतरि से जुड़ी मान्यता

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर 2026। धनतेरस का पर्व नजदीक आते ही घरों में साफ-सफाई, पूजा-पाठ और खरीदारी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा के साथ भगवान धन्वंतरि की आराधना का भी विशेष महत्व माना जाता है। वास्तु शास्त्र से जुड़ी एक मान्यता के अनुसार, घर की उत्तर-उत्तर-पूर्व दिशा में स्वच्छ जल से भरा गिलास रखना शुभ माना जाता है। इसे स्वास्थ्य, शुद्धता और सकारात्मक वातावरण से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, यह एक पारंपरिक मान्यता है; पानी के गिलास को किसी खास दिशा में रखने से धन या स्वास्थ्य लाभ होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

कब है धनतेरस 2026?

हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाई जाएगी। यह पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर आता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ-साथ सोना, चांदी और बर्तन खरीदने की परंपरा भी प्रचलित है।

धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। इस पर्व का संबंध केवल धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना से भी जोड़ा जाता है।

वास्तु के अनुसार किस दिशा में रखना चाहिए पानी का गिलास?

वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, उत्तर और उत्तर-पूर्व के बीच आने वाली उत्तर-उत्तर-पूर्व (North-North-East) दिशा को स्वास्थ्य, स्वच्छता और शरीर की ऊर्जा से संबंधित माना जाता है। इस क्षेत्र को जल तत्व से जोड़कर देखा जाता है।

इसी मान्यता के आधार पर यहां स्वच्छ पानी से भरा गिलास रखने की सलाह दी जाती है। कुछ वास्तु मान्यताओं में इस दिशा को घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण बताया गया है।

ध्यान रहे कि वास्तु में दिशाओं और ऊर्जा से जुड़े ये विचार पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं। केवल इस दिशा में पानी रखने से किसी बीमारी का इलाज होने या आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित होने का दावा नहीं किया जा सकता।

भगवान धन्वंतरि से क्या है इस परंपरा का संबंध?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद का प्रवर्तक और देवताओं का वैद्य माना जाता है। धनतेरस पर उनकी पूजा अच्छे स्वास्थ्य, निरोगी जीवन और दीर्घायु की कामना से की जाती है।

इसलिए धनतेरस को स्वास्थ्य और समृद्धि दोनों से जोड़कर देखा जाता है। घर में स्वच्छ पानी रखना और नियमित रूप से पर्याप्त पानी पीना स्वास्थ्य के लिए व्यावहारिक रूप से उपयोगी आदतें हैं। हालांकि, भगवान धन्वंतरि की आराधना और वास्तु के उपाय धार्मिक आस्था का विषय हैं।

किस धातु या बर्तन में रखें जल?

वास्तु से जुड़ी इस मान्यता में पानी रखने के लिए स्टील, कांच, पीतल या चांदी के पात्र का उल्लेख किया गया है। कुछ वास्तु व्याख्याओं में तांबे को अग्नि तत्व से जोड़ते हुए उत्तर-उत्तर-पूर्व दिशा में तांबे के पात्र के बजाय कांच, स्टील या चांदी का पात्र रखने की सलाह दी जाती है।

व्यावहारिक रूप से बर्तन चुनते समय उसकी स्वच्छता और पानी को सुरक्षित रखने की क्षमता को प्राथमिकता देनी चाहिए। गिलास को नियमित रूप से धोएं, उसमें ताजा पीने योग्य पानी भरें और पानी को लंबे समय तक खुला न छोड़ें।

धनतेरस पर इन बातों का भी रखें ध्यान

धनतेरस पर घर की सजावट और पूजा की तैयारी के साथ स्वास्थ्य से जुड़ी अच्छी आदतें अपनाना भी उपयोगी है।

  • घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई रखें।
  • पीने के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करें।
  • भगवान धन्वंतरि की पूजा अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार करें।
  • संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और समय पर स्वास्थ्य जांच को महत्व दें।
  • वास्तु उपायों को आस्था के रूप में अपनाएं, लेकिन बीमारी के इलाज या आर्थिक फैसलों के लिए उन पर निर्भर न रहें।

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