धीरेंद्र शास्त्री का बयान चर्चा में, बोले— “बहन-बेटियां दुर्गा और काली जैसी सशक्त बनें”

छतरपुर | 16 अक्टूबर 2026

मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का महिलाओं और बेटियों को लेकर दिया गया बयान चर्चा में है। अपनी सनातन हिंदू एकता यात्रा के दौरान उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनने और जीवन में आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बेटियों को मां दुर्गा और काली की तरह साहसी और मजबूत बनना चाहिए तथा उन्हें आईपीएस और आईएएस जैसे उच्च पदों तक पहुंचने का लक्ष्य रखना चाहिए।

बुंदेलखंड में निकाली गई 500 किलोमीटर लंबी यात्रा

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता यात्रा बुंदेलखंड के पांच जिलों से होकर गुजरी और बागेश्वर धाम पहुंचकर संपन्न हुई। यात्रा के दौरान कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। यात्रा के समापन पर शास्त्री ने इसके उद्देश्यों के बारे में बताते हुए महिला सशक्तीकरण, हिंदू समाज की एकता और बुंदेलखंड को नशामुक्त बनाने पर जोर दिया।

महिलाओं की शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर दिया जोर

शास्त्री ने अपने संबोधन में महिलाओं और बेटियों को मजबूत बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि लड़कियों को अपनी क्षमताओं को पहचानना चाहिए और शिक्षा, प्रशासन तथा दूसरे क्षेत्रों में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। उनके बयान में आईपीएस और आईएएस जैसे पदों का उल्लेख भी किया गया।

उनके संदेश का एक प्रमुख हिस्सा महिलाओं को आत्मविश्वासी और सशक्त बनाने की अपील थी। हालांकि, बुर्के को लेकर की गई टिप्पणी के कारण बयान पर चर्चा भी शुरू हुई।

हिंदू एकता और नशामुक्ति भी यात्रा के प्रमुख उद्देश्य

धीरेंद्र शास्त्री ने यात्रा के दौरान समाज में एकता और सामाजिक समरसता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होने तथा नशे से दूर रहने का संदेश दिया।

उनके मुताबिक, समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पहले अपने घर, गांव और क्षेत्र में जागरूकता फैलाना जरूरी है। यात्रा के जरिए इन संदेशों को बुंदेलखंड के लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

बयान को लेकर चर्चा

बुर्के और महिलाओं के सशक्तीकरण को जोड़कर दिए गए बयान पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां उनके समर्थक इसे महिलाओं को साहसी बनाने और सामाजिक जागरूकता का संदेश मान रहे हैं, वहीं टिप्पणी के धार्मिक संदर्भ को लेकर भी चर्चा हो रही है।

इस पूरे घटनाक्रम में महिला सशक्तीकरण, धार्मिक पहचान और सामाजिक संवाद जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए हैं।

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