जबलपुर/इटारसी, मध्य प्रदेश | 10 अक्टूबर 2026
दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे युवाओं को मध्य प्रदेश में ट्रेन से उतारकर हिरासत में लेने का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस कार्रवाई पर गंभीरता दिखाते हुए पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया कि हिरासत में लिए गए 18 लोगों को रिहा किया जाए या अदालत के सामने पेश किया जाए। ये युवा गोवा से दिल्ली जा रहे थे और उन्हें इटारसी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतारे जाने की जानकारी सामने आई है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी मांगें उठाना चाहते हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, गोवा से दिल्ली जा रहे 18 लोगों को मध्य प्रदेश के इटारसी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतारकर हिरासत में लिया गया। पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था संबंधी आशंकाओं का हवाला दिया गया।
इसके बाद हिरासत में लिए गए लोगों के परिजनों ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। इस याचिका में आरोप लगाया गया कि युवाओं को पर्याप्त कानूनी प्रक्रिया के बिना हिरासत में रखा गया है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से उनकी रिहाई या उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश कराने की मांग की।
हाई कोर्ट ने पुलिस को क्या निर्देश दिया?
मुख्य न्यायाधीश अल्पेश कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस को नोटिस जारी किए और नर्मदापुरम के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा किया जाए या अदालत के सामने पेश किया जाए।
मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। इस आदेश के बाद हिरासत की वैधता और पुलिस की कार्रवाई पर न्यायिक समीक्षा का रास्ता खुला है।
भोपाल, इटारसी और ग्वालियर में भी रोके गए प्रदर्शनकारी
दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले मध्य प्रदेश के भोपाल, इटारसी और ग्वालियर रेलवे स्टेशनों पर भी दिल्ली जाने वाले कुछ प्रदर्शनकारियों को रोके जाने की खबरें सामने आई हैं। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, कम से कम 30 लोगों को ट्रेनों से उतारा गया और उन्हें अपने गृह राज्यों में लौटने के लिए समझाया गया।
इन लोगों में गोवा, कर्नाटक और महाराष्ट्र से यात्रा कर रहे कार्यकर्ता शामिल बताए गए। कुछ संगठनों ने आरोप लगाया कि उनके सदस्यों को जबरन ट्रेन से उतारकर हिरासत में लिया गया। पुलिस ने इन कार्रवाइयों को कानून-व्यवस्था से जुड़ी आशंकाओं के संदर्भ में बताया।
पुणे के 14 छात्र भी हिरासत में लिए गए
इसी घटनाक्रम में पुणे के कम से कम 14 छात्र और युवा कार्यकर्ता भी इटारसी में हिरासत में लिए गए थे। वे विभिन्न छात्र और युवा संगठनों से जुड़े थे और दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन में भाग लेने जा रहे थे।
इनकी हिरासत को लेकर भी हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। अदालत के निर्देश के बाद इन छात्रों को शुक्रवार शाम रिहा किए जाने की खबर सामने आई। इस मामले ने दिल्ली जा रहे प्रदर्शनकारियों को दूसरे राज्यों में रोके जाने की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं।
प्रदर्शन की अनुमति को लेकर विवाद
दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को पुलिस से अनुमति नहीं मिली है। अधिकारियों ने सार्वजनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था की आशंकाओं का हवाला दिया है। दूसरी ओर, प्रदर्शन से जुड़े संगठनों का कहना है कि वे अपनी मांगें शांतिपूर्ण तरीके से उठाना चाहते हैं।
इस विवाद में मुख्य सवाल यह है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की निवारक कार्रवाई की सीमा क्या होनी चाहिए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भाग लेने के इच्छुक लोगों के कानूनी अधिकारों की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।
आगे क्या होगा?
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद अब पुलिस प्रशासन को हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। 12 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत के सामने मामले की आगे की जानकारी रखी जा सकती है।
यह मामला प्रदर्शन से जुड़े लोगों की आवाजाही, पुलिस की निवारक शक्तियों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण है। अदालत का अंतिम रुख आगे की सुनवाई और उपलब्ध तथ्यों पर निर्भर करेगा।
