भोपाल, 22 सितंबर 2026। मध्य प्रदेश में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर पुलिस मुख्यालय ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 24 बिंदुओं वाली इस गाइडलाइन में सोशल मीडिया पोस्ट, वर्दी में फोटो-वीडियो, संवेदनशील सरकारी जानकारी, आपराधिक जांच और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI टूल्स के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए हैं।
वर्दी में रील और वीडियो बनाने पर कार्रवाई
नई गाइडलाइन के अनुसार पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी के बाद वर्दी में रील, फोटो या वीडियो बनाकर निजी सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट नहीं कर सकेंगे। अशोभनीय वेशभूषा में इस तरह की सामग्री पोस्ट करने पर भी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।
नियमों का उल्लंघन होने पर मामले की गंभीरता के अनुसार कारण बताओ नोटिस से लेकर निलंबन जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
ChatGPT और अन्य AI प्लेटफॉर्म पर संवेदनशील जानकारी डालने पर रोक
गाइडलाइन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
पुलिसकर्मी सरकारी, गोपनीय या संवेदनशील दस्तावेजों, उनके स्क्रीनशॉट या अन्य महत्वपूर्ण जानकारी को ChatGPT अथवा दूसरे AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड नहीं कर सकेंगे।
इसका उद्देश्य पुलिस से संबंधित संवेदनशील सूचनाओं को अनधिकृत रूप से साझा होने से रोकना है।
जांच और गिरफ्तारी से जुड़ी जानकारी साझा करने पर सावधानी
नई व्यवस्था में गिरफ्तारी, छापेमारी और आपराधिक जांच से संबंधित जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करने को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए हैं।
ऐसी जानकारी केवल आवश्यक तथ्यों तक सीमित रखने को कहा गया है। जांच की प्रक्रिया और भविष्य में की जाने वाली कार्रवाई से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं करने के निर्देश हैं, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है।
पुलिस की ओर से जारी जानकारी में ऐसा संकेत भी नहीं होना चाहिए जिससे किसी आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही दोषी मानने का संदेश जाए।
संवेदनशील ड्यूटी और लोकेशन की जानकारी भी नहीं होगी साझा
जिन पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी संवेदनशील प्रकृति की है, उन्हें अपनी ड्यूटी की सटीक प्रकृति, कार्यस्थल और उससे जुड़ी गतिविधियों की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने को कहा गया है।
इस तरह की जानकारी सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है, इसलिए सोशल मीडिया पर इसके प्रसार से बचने के निर्देश दिए गए हैं।
निजी सोशल मीडिया अकाउंट पर सरकारी नीतियों पर टिप्पणी से बचने के निर्देश
गाइडलाइन में पुलिसकर्मियों के निजी सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर भी नियम तय किए गए हैं।
पुलिसकर्मियों को अपने निजी अकाउंट से सरकारी नीतियों और योजनाओं पर आधिकारिक राय के रूप में टिप्पणी करने से बचने को कहा गया है। सार्वजनिक मंचों पर राजनीतिक या धार्मिक बयान देने को लेकर भी सावधानी बरतने के निर्देश हैं।
यदि किसी निजी पोस्ट से यह प्रतीत होता है कि संबंधित पुलिसकर्मी सरकार या विभाग की आधिकारिक स्थिति बता रहा है, तो विभाग की ओर से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। गंभीर मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है।
सरकारी वाहन और वर्दी का निजी प्रचार में इस्तेमाल नहीं
नए निर्देशों में सरकारी संसाधनों के व्यक्तिगत प्रचार में इस्तेमाल को लेकर भी स्पष्टता दी गई है।
पुलिसकर्मियों को सरकारी वाहन, कार्यालय, आवास, वर्दी और अन्य सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल अपनी व्यक्तिगत छवि या प्रचार बढ़ाने के लिए नहीं करने को कहा गया है।
विभाग की उपलब्धियों को भी किसी एक अधिकारी की व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने से बचने के निर्देश दिए गए हैं।
सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर विभागीय अनुशासन
पुलिस मुख्यालय की नई गाइडलाइन का उद्देश्य पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया और मीडिया संवाद को निर्धारित नियमों के दायरे में रखना है।
24 बिंदुओं वाली गाइडलाइन में सोशल मीडिया पोस्ट से लेकर सरकारी जानकारी, AI टूल्स, संवेदनशील जांच, मीडिया ब्रीफिंग और निजी सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़े कई पहलुओं को शामिल किया गया है।
नियमों का उल्लंघन मामले की प्रकृति और गंभीरता के आधार पर विभागीय कार्रवाई का कारण बन सकता है।
