जबलपुर, मध्य प्रदेश | 18 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह 36 वर्षों से अधिक की न्यायिक सेवा पूरी करने के बाद 17 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त हो गए। जबलपुर में आयोजित फुल कोर्ट फेयरवेल के दौरान उनकी विदाई सिर्फ एक न्यायिक अधिकारी के रिटायरमेंट तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने समाजसेवा से जुड़े दो बड़े संकल्पों की घोषणा कर इसे यादगार बना दिया।
जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मेडिकल कॉलेज, जबलपुर में देहदान के लिए पंजीयन कराया है। इसके अलावा उन्होंने अपने GPF में जमा करीब एक करोड़ एक लाख रुपये प्रधानमंत्री केयर्स फंड में देने का संकल्प व्यक्त किया।
मृत्यु के बाद भी मेडिकल विद्यार्थियों के काम आएगी देह
विदाई समारोह में जस्टिस सिंह ने देहदान के फैसले के पीछे की भावना भी साझा की। उनका कहना था कि जिस शरीर ने जीवनभर न्यायिक दायित्व निभाया, वही शरीर मृत्यु के बाद मेडिकल विद्यार्थियों के अध्ययन और भविष्य के चिकित्सकों के ज्ञान में काम आए, इससे बड़ी सामाजिक उपयोगिता क्या हो सकती है।
उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी के साथ दो दिन पहले ही मेडिकल कॉलेज में देहदान के लिए पंजीयन कराया गया है। इस निर्णय के जरिए उनका उद्देश्य मृत्यु के बाद भी अपनी देह को चिकित्सा शिक्षा के काम आने देना है।
GPF की 1.01 करोड़ रुपये की राशि भी समाज को समर्पित करने का संकल्प
जस्टिस अवनीन्द्र सिंह ने सेवानिवृत्ति के साथ अपने GPF में जमा राशि को भी समाज के लिए समर्पित करने की घोषणा की। उन्होंने करीब ₹1.01 करोड़ की राशि प्रधानमंत्री केयर्स फंड में देने का संकल्प जताया।
बताया गया है कि राशि उनके GPF से संबंधित है और उन्होंने इसे अपने पास रखने के बजाय सार्वजनिक हित में देने की बात कही। इस घोषणा के दौरान वह भावुक भी हो गए।
36 वर्षों से अधिक लंबी रही न्यायिक यात्रा
जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह ने 31 मई 1990 को सिविल जज के रूप में न्यायिक सेवा शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने न्यायिक व्यवस्था में अलग-अलग पदों पर जिम्मेदारियां निभाईं और लंबे समय तक जिला न्यायपालिका में कार्य किया।
इसके बाद 1 मई 2023 को उन्हें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। करीब तीन साल से अधिक समय तक हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्य करने के बाद 17 सितंबर 2026 को उनकी न्यायिक यात्रा का औपचारिक समापन हुआ।
फुल कोर्ट फेयरवेल में याद किए गए न्यायिक योगदान
जबलपुर में आयोजित फुल कोर्ट फेयरवेल में न्यायमूर्ति सिंह के सहयोगियों और अधिवक्ताओं ने उनके लंबे न्यायिक योगदान को याद किया। उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में निर्णय दिए।
विदाई के दौरान उन्होंने अपने कार्यालय के कर्मचारियों, सहयोगियों और अधिवक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायिक दायित्व किसी एक व्यक्ति के प्रयास से पूरा नहीं होता, बल्कि इसमें पूरी न्यायिक व्यवस्था, कर्मचारी और अधिवक्ताओं की सामूहिक भूमिका होती है।
हाई कोर्ट में अब 38 न्यायाधीश
जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की सेवानिवृत्ति के बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 38 रह गई है, जबकि स्वीकृत पदों की संख्या 53 है। यानी 15 पद रिक्त हैं।
विदाई के साथ छोड़ गए दो बड़े संकल्प
आमतौर पर न्यायिक अधिकारी की सेवानिवृत्ति उनके लंबे करियर के औपचारिक समापन के रूप में देखी जाती है, लेकिन जस्टिस अवनीन्द्र सिंह ने अपनी विदाई को समाजसेवा के संकल्प से जोड़ दिया।
एक तरफ उन्होंने मृत्यु के बाद अपनी देह को मेडिकल शिक्षा के लिए उपलब्ध कराने का फैसला किया, वहीं दूसरी ओर जीवनभर की सेवा से जुड़ी GPF राशि में से करीब 1.01 करोड़ रुपये सार्वजनिक हित में देने का संकल्प लिया।
उनका यह फैसला उनकी सेवानिवृत्ति समारोह की सबसे प्रमुख बातों में रहा। न्यायिक सेवा के 36 वर्षों से अधिक लंबे सफर के बाद जस्टिस सिंह ने अपने विदाई संदेश के माध्यम से यह संदेश दिया कि समाज के प्रति योगदान केवल नौकरी या पद तक सीमित नहीं होता, बल्कि व्यक्ति अपनी इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार जीवन के बाद भी समाज के काम आ सकता है।
