रतलाम, मध्य प्रदेश | 10 सितंबर 2026। रेलवे ग्रुप-D और लेवल-1 भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा यानी PET में डमी अभ्यर्थियों के जरिए फर्जीवाड़े का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रतलाम में बुधवार, 9 सितंबर को दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे फिरोजाबाद के युवकों का फर्जीवाड़ा रेटिना टेस्ट और फोटो रिकॉर्ड के मिलान के दौरान सामने आया। मामले में तीन युवकों को पकड़ा गया और उन्हें जीआरपी के सुपुर्द किया गया।
रेटिना टेस्ट और फोटो मिलान से खुला राज
रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ पश्चिम रेलवे की ओर से रतलाम के रेलवे फुटबॉल मैदान में ग्रुप-D/लेवल-1 पदों के लिए PET आयोजित की जा रही है। बुधवार को अभ्यर्थियों की पहचान सत्यापन प्रक्रिया के दौरान रेटिना टेस्ट के साथ फोटो और रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा था।
इसी दौरान कुछ अभ्यर्थियों की पहचान रिकॉर्ड में दर्ज वास्तविक उम्मीदवारों से मेल नहीं खाई। संदेह होने पर रेलवे कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों ने जांच की तो दूसरे उम्मीदवारों की जगह परीक्षा देने का मामला सामने आया।
दो युवक 2 सितंबर को भी दे चुके थे परीक्षा
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया कि पकड़े गए पंकज यादव और गौरव यादव इससे पहले 2 सितंबर 2026 को भी उन्हीं वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह PET दे चुके थे।
यानी दोनों पहली बार पहचान जांच में पकड़े नहीं गए थे और सात दिन बाद दोबारा उसी तरह परीक्षा देने पहुंच गए। इस घटनाक्रम ने रेलवे भर्ती प्रक्रिया में पहचान सत्यापन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
कौन-कौन पकड़ा गया?
रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ पश्चिम रेलवे के अधिकारी दीपक तिवारी के अनुसार, मामले में फिरोजाबाद जिले के तीन युवकों के नाम सामने आए हैं।
पकड़े गए युवकों में जफराबाद निवासी 21 वर्षीय गौरव यादव, अलीनगर निवासी 33 वर्षीय पंकज यादव और बावली निवासी 20 वर्षीय अनुज शामिल हैं। जांच में सामने आया कि गौरव यादव वास्तविक अभ्यर्थी अनुज दिवाकर के स्थान पर और पंकज यादव वास्तविक अभ्यर्थी मनीष सिंह के स्थान पर PET देने पहुंचा था।
वास्तविक अभ्यर्थी परीक्षा देने रतलाम आया ही नहीं
जांच में यह भी सामने आया कि जिस मनीष सिंह के स्थान पर पंकज यादव परीक्षा देने पहुंचा था, वह खुद PET में शामिल होने के लिए रतलाम नहीं आया।
रिपोर्ट के अनुसार मनीष सिंह फरार बताया जा रहा है और उसकी तलाश की जा रही है। वहीं मामले में पकड़े गए युवकों को आगे की कार्रवाई के लिए जीआरपी को सौंप दिया गया।
50 हजार रुपये में तय हुआ था सौदा
पूछताछ में फर्जीवाड़े के पीछे पैसों का लेन-देन भी सामने आया। पुलिस के अनुसार पंकज यादव ने मनीष सिंह की जगह PET देने के लिए 50 हजार रुपये में सौदा तय किया था।
बताया गया कि पंकज इससे पहले हैदराबाद में आयोजित ग्रुप-D की लिखित परीक्षा में भी मनीष की जगह शामिल हुआ था। PET के लिए वह हैदराबाद से फ्लाइट के जरिए इंदौर और फिर वहां से रतलाम पहुंचा था।
वहीं गौरव यादव और वास्तविक अभ्यर्थी अनुज के बीच पहले से परिचय बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार गौरव ने अनुज की जगह परीक्षा देने के लिए कोई रकम नहीं ली थी।
6 सितंबर को भी सामने आया था ऐसा ही मामला
रतलाम में डमी अभ्यर्थियों का यह मामला अकेला नहीं है। इससे कुछ ही दिन पहले 6 सितंबर 2026 को बिहार के दो युवक भी वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह रेलवे PET देने पहुंचे थे।
उस घटना के तीन दिन बाद 9 सितंबर को फिर डमी अभ्यर्थियों के पकड़े जाने से रेलवे भर्ती परीक्षा की सुरक्षा और पहचान सत्यापन प्रक्रिया को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं।
तकनीकी जांच ने रोका फर्जीवाड़ा
इस पूरे मामले में रेटिना टेस्ट और फोटो रिकॉर्ड का मिलान अहम साबित हुआ। पहचान प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद युवकों की जानकारी में अंतर सामने आया, जिसके बाद संदिग्धों को रोककर पूछताछ की गई।
लगातार सामने आ रहे मामलों से यह भी स्पष्ट हो रहा है कि भर्ती परीक्षाओं में केवल दस्तावेजों की जांच ही पर्याप्त नहीं है। बायोमेट्रिक और अन्य तकनीकी पहचान प्रणालियां फर्जी अभ्यर्थियों की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
रेलवे भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल
रेलवे जैसी बड़ी सरकारी भर्ती में हजारों अभ्यर्थी शामिल होते हैं। ऐसे में किसी वास्तविक उम्मीदवार की जगह डमी अभ्यर्थी का परीक्षा देना चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
रतलाम में 2 सितंबर को परीक्षा देने के बाद उसी पहचान के लिए 9 सितंबर को दोबारा डमी के पहुंचने की बात सामने आने से यह सवाल भी उठ रहा है कि पहली बार पहचान सत्यापन में यह फर्जीवाड़ा कैसे नहीं पकड़ा गया।
फिलहाल पुलिस और रेलवे स्तर पर मामले की जांच जारी है। पकड़े गए युवकों से पूछताछ के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और वास्तविक अभ्यर्थियों के साथ उनका क्या संबंध है।
