भोपाल, 8 सितंबर 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार को नगर निगम मुख्यालय स्थित अटल भवन में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक नाराज कर्मचारी ने महापौर मालती राय की सरकारी गाड़ी में आग लगाने का प्रयास किया। कर्मचारी ने कुछ कागजों में आग लगाकर उन्हें महापौर की गाड़ी की छत पर रख दिया। मौके पर मौजूद निगम कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जलते कागजों को हटा दिया, जिससे आग को वाहन में फैलने से रोक लिया गया।
घटना के दौरान निगम परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कर्मचारियों ने तुरंत आग बुझाने की कोशिश की। इस दौरान आग बुझाते समय नगर निगम कर्मचारी रामसिंह यादव का हाथ झुलस गया।
पर्चे लेकर निगम मुख्यालय पहुंचा कर्मचारी
जानकारी के मुताबिक, संबंधित कर्मचारी सोमवार को नगर निगम कार्यालय पहुंचा था। उसके हाथ में कुछ पर्चे थे और उसने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी।
कुछ देर तक हंगामा करने के बाद वह महापौर मालती राय की सरकारी गाड़ी के पास पहुंचा। आरोप है कि उसने कागजों में आग लगाई और उन्हें गाड़ी की छत पर रख दिया।
गाड़ी के पास मौजूद कर्मचारियों को जैसे ही इसकी जानकारी हुई, उन्होंने तुरंत जलते हुए कागजों को हटाना शुरू कर दिया।
समय रहते बुझाई गई आग
जलते हुए कागज गाड़ी पर रखे जाने से वाहन में आग फैलने की आशंका पैदा हो गई थी। हालांकि मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने बिना समय गंवाए जलते कागजों को हटा दिया।
इसी दौरान रामसिंह यादव आग बुझाने की कोशिश में झुलस गए। कर्मचारियों की तत्परता के कारण आग को वाहन में बड़े स्तर पर फैलने से रोक लिया गया और एक बड़ा हादसा टल गया।
मांगें पूरी नहीं होने से नाराज था कर्मचारी
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कर्मचारी अपनी मांगों और रोजगार से जुड़ी समस्याओं को लेकर नाराज था। अलग-अलग रिपोर्टों में उसकी नियमितीकरण और स्थायी कर्मचारी बनाए जाने से जुड़ी मांग का उल्लेख किया गया है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार कर्मचारी ने यह दावा भी किया कि स्थायी नौकरी नहीं मिलने और उसके बच्चे को स्कूल से निकाले जाने जैसी परिस्थितियों से वह परेशान था। हालांकि ये उसके द्वारा बताए गए दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के जरिए होनी बाकी है।
कर्मचारी की तबीयत भी खराब बताई गई
रिपोर्टों के अनुसार कर्मचारी पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से भी जूझ रहा था और इलाज करा रहा था। घटना के दौरान उसके हाथ पर पट्टी बंधी होने की बात भी सामने आई।
वहीं नगर निगम अधिकारियों की ओर से यह भी कहा गया कि कर्मचारी लंबे समय से ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहा था। इस पूरे मामले की वास्तविक परिस्थितियां जांच के बाद ही स्पष्ट होंगी।
महापौर घटना के समय कार्यालय में थीं
घटना के समय महापौर मालती राय नगर निगम मुख्यालय की पहली मंजिल स्थित अपने कार्यालय में थीं। उनकी सरकारी गाड़ी परिसर में खड़ी थी।
घटना की जानकारी मिलते ही निगम परिसर में मौजूद कर्मचारियों ने स्थिति को संभाला और वाहन को सुरक्षित स्थान पर हटाया।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
घटना के बाद नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने संबंधित कर्मचारी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के निर्देश दिए।
इसके बाद पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कर्मचारी ने किस वजह से यह कदम उठाया और घटना से पहले उसकी ओर से किस तरह की मांगें या शिकायतें की गई थीं।
निगम कर्मचारियों में मची अफरा-तफरी
महापौर की सरकारी गाड़ी पर जलते कागज रखे जाने की घटना से निगम परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। कर्मचारियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और आग को फैलने से रोक लिया।
अगर समय पर जलते कागज नहीं हटाए जाते तो आग वाहन के अन्य हिस्सों तक फैल सकती थी और परिसर में मौजूद अन्य वाहनों या लोगों के लिए भी खतरा पैदा हो सकता था।
नियमितीकरण का मुद्दा फिर चर्चा में
इस घटना के बाद नगर निगम में काम करने वाले दैनिक वेतनभोगी और अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है।
कर्मचारियों की ओर से लंबे समय से रोजगार की स्थिरता और नियमितीकरण जैसी मांगें उठती रही हैं। हालांकि किसी भी मांग को लेकर इस तरह का कदम उठाना गंभीर मामला है और इसकी जांच कानून के तहत की जाएगी।
CCTV और प्रत्यक्षदर्शियों से जुटाई जा सकती है जानकारी
घटना नगर निगम मुख्यालय परिसर में हुई है, इसलिए पुलिस जांच के दौरान CCTV फुटेज और मौके पर मौजूद कर्मचारियों के बयान महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कर्मचारी ने घटना से पहले क्या किया, किस तरह गाड़ी तक पहुंचा और आग लगाने का प्रयास किस परिस्थिति में किया गया।
एक कर्मचारी का हाथ झुलसा
घटना में सबसे स्पष्ट रूप से सामने आया नुकसान यह है कि आग बुझाने के प्रयास में नगर निगम कर्मचारी रामसिंह यादव का हाथ झुलस गया। समय पर हस्तक्षेप नहीं होता तो नुकसान और गंभीर हो सकता था।
महापौर ने नहीं दी प्रतिक्रिया
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार घटना के संबंध में महापौर मालती राय से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कर्मचारी की शिकायतें क्या थीं, उसके खिलाफ निगम स्तर पर पहले क्या कार्रवाई हुई थी और घटना के पीछे तत्काल कारण क्या था।
