नेपाल के लिए भारत का ‘ऑपरेशन राहत’, मुश्किल घड़ी में पड़ोसी प्रथम; दो सैन्य विमानों से पहुंची 21.5 टन मदद

नई दिल्ली/काठमांडू, 4 सितंबर 2026। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद हालात लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे मुश्किल समय में भारत ने एक बार फिर अपने पड़ोसी देश की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत ने नेपाल के लिए राहत अभियान को तेज करते हुए 21.5 टन से ज्यादा मानवीय सहायता की एक और खेप भेजी है। राहत सामग्री लेकर भारतीय वायुसेना के दो सैन्य विमान नेपाल पहुंचे। इस खेप में मेडिकल सप्लाई के साथ फॉरेंसिक किट और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल राहत, बचाव और प्रभावित लोगों की सहायता में किया जा रहा है।

संकट की घड़ी में नेपाल के साथ खड़ा भारत

नेपाल में 26 अगस्त 2026 को अचानक आई फ्लैश फ्लड ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। बाढ़ के पानी, मलबे और भूस्खलन के कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान गई, जबकि हजारों लोग लापता बताए गए हैं। कई इलाकों में सड़कें, पुल और दूसरी बुनियादी सुविधाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

इस आपदा के बाद भारत ने राहत और बचाव अभियान में नेपाल की मदद करने के लिए लगातार सहायता भेजी। भारत की ओर से राहत सामग्री के साथ बचाव दल, तकनीकी विशेषज्ञ, मेडिकल टीमें और फॉरेंसिक विशेषज्ञ भी भेजे गए हैं।

दो सैन्य विमानों से पहुंची 21.5 टन राहत सामग्री

ताजा सहायता के तहत भारत ने 21.5 टन से अधिक राहत सामग्री नेपाल भेजी है। यह सामग्री दो सैन्य विमानों के जरिए पहुंचाई गई। विदेश मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, नई खेप में विशेष रूप से मेडिकल सामान और फॉरेंसिक किट शामिल हैं।

फॉरेंसिक उपकरणों की जरूरत उन इलाकों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जहां बड़ी संख्या में लोग लापता हैं और आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान करना चुनौती बना हुआ है। राहत एवं बचाव अभियानों के साथ-साथ पीड़ितों की पहचान के प्रयासों में भी भारतीय विशेषज्ञ सहयोग कर रहे हैं।

पहले भी भेजी जा चुकी है बड़ी मात्रा में मदद

भारत की ओर से नेपाल को सहायता भेजने का सिलसिला आपदा के तुरंत बाद शुरू हो गया था। 26 अगस्त को फ्लैश फ्लड के बाद भारत ने शुरुआती राहत सामग्री भेजी थी। इसके बाद कई सैन्य उड़ानों के जरिए टेंट, कंबल, स्वच्छता किट, सोलर लैंप, दवाएं, पानी निकालने वाले पंप, जनरेटर, भोजन और अन्य जरूरी सामान नेपाल पहुंचाया गया।

30 अगस्त तक भारत चार सैन्य उड़ानों के जरिए लगभग 68.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका था। इसके अलावा सुरंग बचाव के लिए विशेष तकनीकी टीम और फॉरेंसिक विशेषज्ञ भी भेजे गए थे।

पांचवां भारतीय विमान भी पहुंचा था नेपाल

भारत का राहत अभियान केवल सामान भेजने तक सीमित नहीं है। 2 सितंबर को भारत का पांचवां विमान नेपाल पहुंचा था। इस विमान में 11 सदस्यीय बचाव दल के साथ 5 टन से अधिक जरूरी दवाएं भेजी गई थीं।

इस बचाव दल में ऐसे विशेषज्ञ शामिल थे जिन्हें आपदा प्रभावित क्षेत्रों में खोज और बचाव अभियानों में इस्तेमाल किया जा सके। खास तौर पर उन स्थानों पर मदद की जा रही है जहां बाढ़ और मलबे के कारण लोग फंस गए हैं।

सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश में भी मदद

नेपाल में आई आपदा से पनबिजली परियोजनाओं और सुरंगों को भी नुकसान पहुंचा है। कुछ स्थानों पर श्रमिकों के फंसे होने की आशंका के बाद भारत ने विशेष सुरंग बचाव दल और उपकरण भेजे हैं।

भारतीय टीमों ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण भी किया है। इन विशेषज्ञों का उद्देश्य स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर संभावित रूप से फंसे लोगों तक पहुंचना और खोज-बचाव अभियान को तकनीकी सहायता देना है।

फॉरेंसिक टीम भी कर रही है सहयोग

आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने से उनकी पहचान करना नेपाल के सामने एक बड़ी चुनौती है। इसी को देखते हुए भारत ने फॉरेंसिक विशेषज्ञों और डीएनए विश्लेषण से जुड़े उपकरण भी भेजे हैं।

इससे लापता लोगों की पहचान करने और उनके परिवारों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। भारत की ओर से भेजी जा रही सहायता में राहत सामग्री के साथ इस तरह की तकनीकी मदद भी शामिल है।

बाढ़ ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को पहुंचाया भारी नुकसान

नेपाल में आई आपदा का असर केवल जनजीवन तक सीमित नहीं रहा। बाढ़ और मलबे की वजह से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। महत्वपूर्ण परिवहन संपर्क टूटने से राहत सामग्री को प्रभावित इलाकों तक पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है।

रिपोर्टों के अनुसार, कई मोटरेबल और झूला पुल बाढ़ की चपेट में आए हैं तथा सड़क नेटवर्क को भी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में राहत सामग्री और बचाव दलों की पहुंच प्रभावित क्षेत्रों तक बनाना एक बड़ी प्राथमिकता है।

भारत ने स्टील ब्रिज के लिए भी भेजा उपकरण

नेपाल में परिवहन संपर्क बहाल करने में मदद के लिए भारत ने एक मॉड्यूलर स्टील ब्रिज से जुड़े उपकरण भी भेजे हैं। पहले ही 230 फुट लंबे सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के उपकरण लेकर 16 ट्रक नेपाल पहुंच चुके हैं।

ऐसे अस्थायी पुल आपदा के बाद टूटे हुए संपर्क मार्गों को जल्द बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे राहत सामग्री, बचाव दल और जरूरी सेवाओं को प्रभावित इलाकों तक पहुंचाना आसान हो सकता है।

पीएम मोदी ने नेपाल को दिया था हर संभव मदद का भरोसा

नेपाल में फ्लैश फ्लड की जानकारी सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बातचीत की थी। भारत की ओर से नेपाल को इस कठिन समय में हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया था।

इसके बाद भारत की ओर से लगातार राहत सामग्री और विशेषज्ञ दल भेजे जा रहे हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री ने भी संसद में आपदा के बाद भारत की त्वरित प्रतिक्रिया और सहायता के लिए धन्यवाद व्यक्त किया है।

भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का उदाहरण

नेपाल के लिए चलाया जा रहा यह राहत अभियान भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। ऐसे में प्राकृतिक आपदा के समय भारत की ओर से तेजी से सहायता पहुंचाना दोनों देशों के बीच सहयोग की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

भारत ने पहले भी पड़ोसी देशों और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता पहुंचाई है। इस बार नेपाल में राहत अभियान के तहत सैन्य विमानों, तकनीकी टीमों, मेडिकल विशेषज्ञों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को लगाया गया है।

राहत अभियान अभी जारी

नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाने, लापता लोगों की तलाश करने, घायलों को उपचार उपलब्ध कराने और विस्थापित परिवारों तक भोजन एवं जरूरी सामान पहुंचाने का काम जारी है।

भारत की ओर से भी सहायता की नई खेप लगातार भेजी जा रही है। ताजा 21.5 टन से अधिक सहायता के साथ भारत की कुल मानवीय मदद का आंकड़ा और बढ़ गया है। नई खेप में मेडिकल और फॉरेंसिक सामान शामिल होने से राहत अभियान के साथ-साथ लापता और मृतकों की पहचान के प्रयासों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, नेपाल की इस भीषण आपदा में भारत केवल राहत सामग्री उपलब्ध नहीं करा रहा, बल्कि बचाव दल, मेडिकल सहायता, सुरंग विशेषज्ञता, फॉरेंसिक तकनीक और बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करने में भी सहयोग दे रहा है। संकट की इस घड़ी में भारत की लगातार सहायता दोनों देशों के बीच मानवीय सहयोग और पड़ोसी प्रथम की नीति को सामने लाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *